{"_id":"6a3f2a53ca248407d0082239","slug":"medical-team-and-relief-supplies-dispatched-to-venezuela-india-reinforcing-message-of-vasudhaiva-kutumbakam-2026-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"संकट में ढाल बना भारत: वेनेजुएला के लिए चिकित्सा दल व राहत सामग्री रवाना, फिर दिया वसुधैव कुटुंबकम का संदेश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
संकट में ढाल बना भारत: वेनेजुएला के लिए चिकित्सा दल व राहत सामग्री रवाना, फिर दिया वसुधैव कुटुंबकम का संदेश
Sat, 27 Jun 2026 07:11 AM IST
Pavan
आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sat, 27 Jun 2026 07:11 AM IST
सार
वेनेजुएला को चिकित्सा दल और राहत सामग्री भेजकर भारत ने एक बार फिर मानवीय सहायता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। पिछले एक दशक में प्राकृतिक आपदाओं और संकट के समय भारत ने बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के कई देशों की मदद की है। 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना पर चलते हुए भारत वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद सहयोगी के रूप में उभरा है।
विज्ञापन
वेनेजुएला के लिए चिकित्सा दल व राहत सामग्री रवाना
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
वेनेजुएला के लिए चिकित्सा दल और राहत सामग्री भेजना अकेला उदाहरण नहीं है। दुनिया के किसी भी कोने में जब भी कुदरत ने कहर बरपाया, भारत ने हमेशा वसुधैव कुटुंबकम् का शाश्वत सिद्धांत चरितार्थ किया है। पिछले एक दशक का इतिहास देखें तो भारत ने अपनी भौगोलिक सीमाओं से परे बिना किसी राजनीतिक नफा-नुकसान की परवाह किए संकटग्रस्त देशों की ढाल बनकर रक्षा की है। तिरंगा, संकट के समय दुनिया के लिए एक उम्मीद और भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है। एक विकासशील देश होने के बावजूद मानवीय सहायता के मामले में भारत का रिकॉर्ड कई विकसित देशों से बेहतर है।
यह भी पढ़ें- वेनेजुएला: त्रासदी के बीच गूंजी किलकारी, मलबे में बच्चे का जन्म; अब तक 920 की मौत, 3000 घायल, 50+ हजार लापता
नेपाल में ऑपरेशन मैत्री
साल 2015 में जब पड़ोसी देश नेपाल में सदी का सबसे विनाशकारी भूकंप आया, तब भारत ने महज कुछ ही घंटों के भीतर ऑपरेशन मैत्री की शुरुआत की थी। सेना और एनडीआरएफ ने मलबे से हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला। भारत ने टनों खाद्य और चिकित्सा सामग्री पहुंचाने के अलावा प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा दोबारा खड़ा करने में भी भूमिका निभाई।
विज्ञापन
अफगानिस्तान संकट: पिछले साल अफगानिस्तान राजनीतिक अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं के दोहरे संकट से जूझ रहा था। भारत ने मानवता को सर्वोपरि रखा और राजनीतिक गतिरोध दरकिनार करते हुए संकटग्रस्त अफगान नागरिकों के लिए गेहूं की बड़ी खेप, जीवन रक्षक दवाएं और आपातकालीन चिकित्सा उपकरण भेजे। इससे वहां एक बड़े मानवीय संकट को टालने में मदद की। इसके बाद भी भारत अफगानिस्तान में जरूरत पर मानवीय सहायता भेजता रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- वेनेजुएला: त्रासदी के बीच गूंजी किलकारी, मलबे में बच्चे का जन्म; अब तक 920 की मौत, 3000 घायल, 50+ हजार लापता
विज्ञापन
नेपाल में ऑपरेशन मैत्री
साल 2015 में जब पड़ोसी देश नेपाल में सदी का सबसे विनाशकारी भूकंप आया, तब भारत ने महज कुछ ही घंटों के भीतर ऑपरेशन मैत्री की शुरुआत की थी। सेना और एनडीआरएफ ने मलबे से हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला। भारत ने टनों खाद्य और चिकित्सा सामग्री पहुंचाने के अलावा प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा दोबारा खड़ा करने में भी भूमिका निभाई।
विज्ञापन
- तुर्की में ऑपरेशन दोस्त: इसी तरह तुर्की और सीरिया में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन दोस्त के तहत अपनी टीमें रवाना कीं। मलबे में दबे लोगों को ढूंढने के लिए विशेष खोजी कुत्ते और गरुड़ कमांडो तैनात किए गए। यहां सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल ने मलबे के बीच रहकर चौबीसों घंटे घायलों का इलाज किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का सिर फख्र से ऊंचा किया।
- म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा: पिछले वर्ष म्यांमार में आए तीव्र भूकंप के कारण भारी तबाही मची थी। भारत ने पड़ोसी पहले की नीति पर चलते हुए तुरंत ऑपरेशन ब्रह्मा शुरू किया। वायुसेना के विमानों के जरिए दवाइयां, टेंट, सूखा राशन और बचाव दल म्यांमार भेजे गए। साथ ही नौसेना के जहाजों ने भी राहत सामग्री पहुंचाई।
- वैक्सीन मैत्री: कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने वैक्सीन मैत्री पहल के जरिए दुनिया के 100 से ज्यादा देशों को करोड़ों खुराक कोविड-19 टीकों की आपूर्ति की और अनेक विकासशील देशों को महामारी से लड़ने में मदद की।
अफगानिस्तान संकट: पिछले साल अफगानिस्तान राजनीतिक अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं के दोहरे संकट से जूझ रहा था। भारत ने मानवता को सर्वोपरि रखा और राजनीतिक गतिरोध दरकिनार करते हुए संकटग्रस्त अफगान नागरिकों के लिए गेहूं की बड़ी खेप, जीवन रक्षक दवाएं और आपातकालीन चिकित्सा उपकरण भेजे। इससे वहां एक बड़े मानवीय संकट को टालने में मदद की। इसके बाद भी भारत अफगानिस्तान में जरूरत पर मानवीय सहायता भेजता रहा है।