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MEA: मिस्री व चीन के उप विदेश मंत्री ने दिल्ली में मुलाकात, व्यापार और सीमा स्थिरता पर चर्चा
Tue, 10 Feb 2026 11:12 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 10 Feb 2026 11:12 PM IST
सार
MEA: भारत और चीन ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार, व्यापारिक चिंताओं के समाधान और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने पर चर्चा की। विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू ने संबंधों को स्थिर करने और हवाई सेवा समझौते को अपडेट करने पर चर्चा की।
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मा झाओक्सू, विक्रम मिस्री।
- फोटो : एक्स/विदेश मंत्रालय
विस्तार
भारत और चीन ने द्विपक्षीय संबंधों में समग्र प्रगति, व्यापार से संबंधित चिंताओं के समाधान के तरीकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर मंगलवार को चर्चा की। विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू ने मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद गंभीर रूप से तनावपूर्ण हो चुके द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और संबंधों को फिर से बहाल करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा उठाए गए कदमों पर बात की।
चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा, ब्रिक्स शेरपा बैठक में भाग लेने के लिए अभी दिल्ली में हैं। भारत-चीन रणनीतिक वार्ता के ढांचे के तहत आयोजित इस बैठक में, दोनों पक्षों ने अद्यतन हवाई सेवा समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की आवश्यकता को स्वीकार किया।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
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जायसवाल ने कहा, मिसरी व मा ने अपने शीर्ष नेतृत्व के दिशा-निर्देशों को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार से संबंधित मुद्दों और चिंताओं के समाधान के लिए राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि मिसरी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल पुन: आरंभ होने का उल्लेख किया और यात्रा के पैमाने में निरंतर विस्तार की आशा व्यक्त की। इसके अलावा दोनों पक्षों ने हवाई सेवाओं के अद्यतन समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता को स्वीकार किया। दोनों पक्ष वीजा संबंधी सुविधा प्रदान करने और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने पर सहमत हुए।
वहीं, इस बारे में चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, चीन और भारत को एक-दूसरे को प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए और अपने मतभेदों का उचित प्रबंधन करना चाहिए।
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चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा, ब्रिक्स शेरपा बैठक में भाग लेने के लिए अभी दिल्ली में हैं। भारत-चीन रणनीतिक वार्ता के ढांचे के तहत आयोजित इस बैठक में, दोनों पक्षों ने अद्यतन हवाई सेवा समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की आवश्यकता को स्वीकार किया।
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विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में आई सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की और लोगों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाकर तथा संवेदनशील मुद्दों पर चिंताओं का समाधान करके संबंधों को और आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
- हालांकि जायसवाल ने संवेदनशील मुद्दों के बारे में विस्तार से नहीं बताया, लेकिन माना जा रहा है कि भारत चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों से संबंधित निर्यात नियंत्रण उपायों को लेकर चिंतित है।
- जायसवाल ने कहा कि द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा, चर्चा में कई अन्य क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे भी शामिल रहे। दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
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जायसवाल ने कहा, मिसरी व मा ने अपने शीर्ष नेतृत्व के दिशा-निर्देशों को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार से संबंधित मुद्दों और चिंताओं के समाधान के लिए राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि मिसरी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल पुन: आरंभ होने का उल्लेख किया और यात्रा के पैमाने में निरंतर विस्तार की आशा व्यक्त की। इसके अलावा दोनों पक्षों ने हवाई सेवाओं के अद्यतन समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता को स्वीकार किया। दोनों पक्ष वीजा संबंधी सुविधा प्रदान करने और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने पर सहमत हुए।
वहीं, इस बारे में चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, चीन और भारत को एक-दूसरे को प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए और अपने मतभेदों का उचित प्रबंधन करना चाहिए।
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