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अफगानी सरजमीं से भारत विरोधी गतिविधियों का इस्तेमाल नहीं होने देंगे: जयशंकर

Sat, 12 Sep 2020 10:10 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 12 Sep 2020 10:10 PM IST
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MEA Jaishankar attends meeting on Afghan peace process
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : एएनआई (फाइल)

कतर की राजधानी दोहा में अफगान शांति वार्ता पर आयोजित सम्मेलन में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि अफगानिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल किसी भी हाल में भारत के खिलाफ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, अफगानिस्तान में अरसे से चली आ रही शांति की कोशिशों को देखते हुए फौरन संघर्षविराम होना चाहिए। उन्होंने कहा, अफगानिस्तान के साथ हमारी दोस्ती ऐतिहासिक है। हमारी 400 से अधिक विकास परियोजनाओं से अफगानिस्तान का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं है। हमें विश्वास है कि यह सभ्यतागत संबंध आगे भी बढ़ता रहेगा।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर अफगानिस्तान और तालिबान के बीच यह वार्ता हो रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधन में विदेशमंत्री जयशंकर ने कहा, अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए और मानवाधिकारों तथा लोकतंत्र को बढ़ावा देना चाहिए। ट्विटर पर अफगान शांति वार्ता में शामिल होने की जानकारी देते हुए जयशंकर ने कहा, अफगानिस्तान के विकास में भारत बड़ा भागीदार रहा है। भारत ने हाल के बरसों में अफगानिस्तान में लाखों टन खाद्यान्न की आपूर्ति की है। 
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उन्होंने यह भी कहा है कि भारत ने अफगानी नागरिकों की यात्रा को बढ़ावा दिया है, जो इलाज के लिए भारत आते रहे हैं। ऐसे ही उदाहरणों से साबित होता है कि हम अफगानिस्तान की स्थिरता, समृद्धि और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोनों पक्षों से कहा कि महिलाओं, अल्पसंख्यकों और असहायों के हितों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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अफगानी नेतृत्व, स्वामित्व और नियंत्रित वाली हो शांति प्रक्रिया 
जयशंकर ने कहा, शांति प्रक्रिया अफगान के नेतृत्व वाली, अफगान के स्वामित्व वाली और अफगान नियंत्रित होनी चाहिए जिसमें राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना, मानव अधिकारों और लोकतंत्र को बढ़ावा देना, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और कमजोर को आगे बढ़ाना, प्रभावी रूप से देश भर में हिंसा मुक्त करना शामिल है।

5,000 तालिबानियों के मुकाबले 1,000 अफगानी सैनिक छोड़े जाएंगे
शांति प्रक्रिया की वार्ता के लिए अफगानिस्तान सरकार के 21 सदस्यीय दल की अगुवाई पूर्व खुफिया प्रमुख मासूम स्तानेकजई कर रहे हैं। वहीं, तालिबान का नेतृत्व इस समूह के मुख्य न्यायाधीश मावलावी अब्दुल हकीम और समूह के सरगना के करीबी हैबतुल्लाह अखूनजादा कर रहे हैं। यह शांति वार्ता वैसे तो इस साल मार्च में होनी थी, मगर कैदियों के आदान-प्रदान को लेकर यह टलती रही। अब समझौते के मुताबिक, अफगानिस्तान सरकार 5,000 तालिबानियों को रिहा करेगी, वहीं, तालिबान को 1,000 अफगानी सैनिकों को अपने कब्जे से छोड़ना है।


भारत-आसियान ने अगले पांच साल के लिए अपनाई कार्ययोजना
विदेश मंत्री जयशंकर ने शनिवार को ही थाईलैंड के विदेश मंत्री डॉन प्रमुदविनाई के साथ आसियान-भारत मंत्री स्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान अगले पांच साल के लिए आसियान-भारत कार्ययोजना (2021-2025) अपनाई गई। इस बैठक का अयोजन टेली कॉन्फ्रेंसिंग से किया गया था। इसमें भारत सहित आसियान देशों के दस विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक में जहाजरानी, आपसी संपर्क बढ़ाने, शिक्षा और क्षमता निर्माण तथा नागरिकों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने सहित आसियान-भारत सामरिक साझेदारी की समीक्षा की गई। आसियान-भारत कार्य योजना 2016-2020 के अमल में हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई।

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