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समुद्र में भारत की बढ़ी ताकत: नौसेना को मिली ब्रहमोस से लैस स्टेल्थ फ्रिगेट 'तारागिरि', जानें क्यों है यह खास

Sat, 29 Nov 2025 07:31 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 29 Nov 2025 07:31 PM IST
सार

प्रोजेक्ट 17ए के अंतर्गत नीलगिरि श्रेणी का चौथा स्वदेशी उन्नत टोही युद्धपोत तारागिरी मुंबई में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में यह बड़ी उपलब्धि है।
 

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Mazagon Dock delivers 'Taragiri' to Navy, fourth Nilgiri-class stealth frigate under Project 17A
स्वदेशी उन्नत टोही युद्धपोत तारागिरी - फोटो : @indiannavy

विस्तार

मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल) ने प्रोजेक्ट 17-ए के तहत तैयार की गई स्टील्थ फ्रिगेट (युद्धपोत) ‘तारागिरि’ को भारतीय नौसेना को सौंप दिया। यह निलगिरि-क्लास की चौथी और एमडीएल में बनी तीसरी फ्रिगेट है। इसे 28 नवंबर को मुंबई में सौंपा गया।

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट 17-ए फ्रिगेट्स बहुउद्देश्यीय युद्धपोत हैं, जिन्हें मौजूदा और भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। ‘तारागिरि’ उसी नाम के पुराने युद्धपोत का आधुनिक रूप है, जिसने 1980 से 2013 तक नौसेना में 33 वर्षों तक सेवा दी थी। नई ‘तारागिरि’ उन्नत स्टेल्थ तकनीक, बेहतर मारक क्षमता, अत्याधुनिक ऑटोमेशन और मजबूत सर्वाइवेबिलिटी से लैस है। मंत्रालय ने इसे युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि बताया है। 
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इस युद्धपोत वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है और वॉरशिप ओवरसीइंग टीम (मुंबई) की देखरेख में तय समय के भीतर बनाया गया। प्रोजेक्ट 17-ए के जहाजों में पिछली पी-17 (शिवालिक) क्लास की तुलना में अधिक आधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं। फ्रिगेट में ब्रहमोस सुपरसोनिक मिसाइल, एमएफस्टार रडार, एमआरएसएएम एयर डिफेंस सिस्टम, 76 मिमी गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम के साथ पनडुब्बी रोधी रॉकेट व टॉरपीडो भी शामिल हैं।
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तीन युद्धपोत 2026 तक नौसेना को सौंपे जाएंगे
पिछले 11 महीनों में नौसेना को यह प्रोजेक्ट 17-ए का चौथा जहाज मिला है। पहले दो जहाजों के अनुभव के कारण ‘तारागिरी’ का निर्माण समय घटाकर 81 महीने कर दिया गया, जबकि शुरुआती जहाज ‘निलगिरि’ में 93 महीने लगे थे। प्रोजेक्ट के बाकी तीन जहाज 2026 के अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना में 75 प्रतिशत स्वदेशी हिस्सेदारी है और इसमें 200 से अधिक एमएसएमई जुड़े हैं। इससे करीब 4,000 लोगों को सीधे और 10,000 से अधिक लोगों को परोक्ष रूप से रोजगार मिला है।

 

युद्धपोत 'तारागिरी' की खासियत
युद्धपोत 'तारागिरी' 3510 टन वजनी है। तारागिरी को भारतीय नौसेना के इन-हाउस ब्यूरो ऑफ नेवल डिजाइन की ओर से डिजाइन किया गया है। 149 मीटर लंबा और 17.8 मीटर चौड़ा ये जहाज दो गैस टर्बाइन और दो मुख्य डीजल इंजनों के संयोजन से संचालित होगा। इसकी गति 28 समुद्री मील (लगभग 52 किमी प्रति घंटे) से अधिक होगी। आईएनएस तारागिरी का डिस्प्लेसमेंट 6670 टन है। यह मैक्सिमम 59 किमी प्रतिघंटा की गति से समंदर की लहरों को चीरते हुए दौड़ सकता है। इस स्वदेशी युद्धपोत पर 35 अधिकारियों के साथ 150 लोग तैनात किए जा सकते हैं।
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