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आदेश: मारुति सुजुकी पर लगा 200 करोड़ रुपये का जुर्माना, 60 दिन में भरना होगा
Mon, 23 Aug 2021 06:33 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्रा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्रा
Updated Mon, 23 Aug 2021 06:33 PM IST
सार
सीसीआई ने इससे पहले 2019 में ही इस मामले में जांच का आदेश दिया था। दरअसल, यह आदेश डीलर्स के साथ रीसेल प्राइस मेंटेनेंस अरेंजमेंट के कथित आरोप के मामले में दिया गया था।
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मारुति सुजुकी
- फोटो : social
विस्तार
मारुति सुजुकी के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 200 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। बताया गया है कि कंपनी पर यह जुर्माना प्रतिस्पर्धा-रोधी कार्यप्रणाली से काम करने के लिए लगाया गया है। नियामक ने अपनी जांच में पाया कि मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने अपने डीलरों के साथ समझौता किया था, जिसके तहत उन्हें ग्राहकों को कंपनी द्वारा तय की गई छूट से ज्यादा डिस्काउंट देने से रोका गया। सीसीआई ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया।
सीसीआई ने 2019 में ही इस मामले में जांच बिठाई थी। दरअसल, यह आदेश डीलर्स के साथ रीसेल प्राइस मेंटेनेंस अरेंजमेंट के कथित आरोप के मामले में दिया गया था। रीसेल प्राइस मेंटेनेंस खरीदार और विक्रेता के बीच की गई व्यवस्था को कहते हैं। इसमें रीसेल कीमत विक्रेता तय करता है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मारुति सुजुकी पर कार बेचते समय बीमा योजनाएं सुझाने का आरोप लगाया गया था, जिससे ग्राहकों को बाजार में उपलब्ध विकल्पों की तुलना में ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ रहा था। इसके अलावा डीलरों की तरफ से मारुति सुजुकी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने उन्हें ग्राहकों को अतिरिक्त छूट देने की अनुमति नहीं दी है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीआई ने माना है कि मारुति सुजुकी ने डीलरों को ग्राहकों को दी जाने वाली छूट को सीमित करने पर मजबूर कर दिया। इसके जरिए मारुति ने डीलरों के बीच प्रतियोगिता खत्म करने की कोशिश की, जिससे कम कीमत पर कार खरीदने की कोशिश में लगे ग्राहकों को भी नुकसान हुआ।
जांच के बाद जारी किए गए अपने आदेश में सीसीआई ने मारुति को सख्त चेतावनी दी है और उसे ऐसे काम के तरीकों से बचने की भी हिदायत दी गई है। फिलहाल इस मामले पर मारुति की प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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सीसीआई ने 2019 में ही इस मामले में जांच बिठाई थी। दरअसल, यह आदेश डीलर्स के साथ रीसेल प्राइस मेंटेनेंस अरेंजमेंट के कथित आरोप के मामले में दिया गया था। रीसेल प्राइस मेंटेनेंस खरीदार और विक्रेता के बीच की गई व्यवस्था को कहते हैं। इसमें रीसेल कीमत विक्रेता तय करता है।
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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मारुति सुजुकी पर कार बेचते समय बीमा योजनाएं सुझाने का आरोप लगाया गया था, जिससे ग्राहकों को बाजार में उपलब्ध विकल्पों की तुलना में ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ रहा था। इसके अलावा डीलरों की तरफ से मारुति सुजुकी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने उन्हें ग्राहकों को अतिरिक्त छूट देने की अनुमति नहीं दी है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीआई ने माना है कि मारुति सुजुकी ने डीलरों को ग्राहकों को दी जाने वाली छूट को सीमित करने पर मजबूर कर दिया। इसके जरिए मारुति ने डीलरों के बीच प्रतियोगिता खत्म करने की कोशिश की, जिससे कम कीमत पर कार खरीदने की कोशिश में लगे ग्राहकों को भी नुकसान हुआ।
जांच के बाद जारी किए गए अपने आदेश में सीसीआई ने मारुति को सख्त चेतावनी दी है और उसे ऐसे काम के तरीकों से बचने की भी हिदायत दी गई है। फिलहाल इस मामले पर मारुति की प्रतिक्रिया नहीं आई है।