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US-India Relations: मार्को रूबियो ने की जयशंकर से मुलाकात, भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी पर कही बड़ी बात

Sun, 24 May 2026 12:38 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 24 May 2026 12:38 PM IST
सार

मार्को रूबियो और एस जयशंकर के बीच हुई यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की झलक मानी जा रही है। दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई इस चर्चा से भविष्य में रक्षा, आर्थिक और वैश्विक सहयोग के नए आयाम खुलने की उम्मीद है, जो दोनों देशों के साथ-साथ विश्व शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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Marco Rubio India Visit updates meeting S Jaishankar agra jaipur US Secretary of State US India Ralations
मार्को रूबियो और एस जयशंकर ने की बैठक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच रविवार को हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। एस. जयशंकर और मार्को रूबियो के बीच हैदराबाद हाउस में संयुक्त प्रेस वार्ता में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा की।

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संयुक्त प्रेस वार्ता में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, "जाहिर है, हमारे संबंध हैं और हम दुनिया भर के देशों के साथ काम करते हैं। हमें ऐसा करने की आवश्यकता भी है, ठीक वैसे ही जैसे भारत करता है। एक रणनीतिक साझेदारी बहुत अलग होती है। यह उससे कहीं अधिक व्यापक है। एक रणनीतिक साझेदारी तब होती है जब दो देशों के हित एक समान होते हैं और आप उन समस्याओं को हल करने के लिए रणनीतिक रूप से मिलकर काम करते हैं।"

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रणनीतिक साझोदारी राष्ट्रीय हितों पर आधारित : जयशंकर
संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच राजनीतिक समझ एक रणनीतिक साझेदारी से उपजी है, जो कई क्षेत्रों में राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी विदेश सचिव की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।

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उन्होंने कहा कि दूतावास में हुई बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया से संबंधित घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया गया। विदेश मंत्री ने कैरेबियन की अपनी हालिया यात्रा के कुछ अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि बातचीत में खाड़ी क्षेत्र में नए घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष पर ध्यान केंद्रित किया गया।

अमेरिका और भारत के संबंधों की समीक्षा
डॉ. जयशंकर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह अमेरिकी विदेश सचिव की भारत की पहली यात्रा है, लेकिन पदभार ग्रहण करने के पहले दिन से ही दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है। उन्होंने वॉशिंगटन डी.सी., न्यूयॉर्क और फ्रांस में अन्य कार्यक्रमों के मौके पर हुई मुलाकातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह निरंतर जुड़ाव दोनों देशों के बीच व्यापक-आधारित और बढ़ते सहयोग की निगरानी में सहायक रहा है।

रूबियो ने रणनीतिक साझेदारी को बताया 21वीं सदी का निर्णायक संबंध
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों की सराहना करते हुए कहा, ''पहला दिन अब तक शानदार रहा है। वे आगे की यात्राओं तथा बातचीत के लिए उत्सुक हैं।' उन्होंने इस बात पर खास तौर से जोर दिया कि अमेरिका और भारत केवल सहयोगी नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी हैं, जो बहुत महत्वपूर्ण है। 

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दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच सहयोग: रूबियो
रूबियो के अनुसार, यह रणनीतिक साझेदारी ही है जो इस संबंध को अन्य से अलग करती है, क्योंकि यह केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सहयोग के अवसर प्रदान करती है, जिसमें पश्चिमी गोलार्ध जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।

अमेरिकी विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देशों के पास चर्चा करने और मिलकर काम करने के लिए बहुत कुछ है। उन्होंने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते, यह अविश्वसनीय सहयोग की नींव रखता है। दोनों देशों के बीच साझा हितों की प्रचुरता को देखते हुए, इस मजबूत साझेदारी को निरंतर आगे बढ़ाना स्वाभाविक है। 


मार्को रूबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों की बहाली जैसे शब्दों के इस्तेमाल को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह पहले से ही एक बहुत ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का मामला है, जिसे वे दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक मानते हैं।

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जयशंकर बोले- कई मुद्दों पर हमारे हित एक जैसे
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस मौके पर कहा कि भारत और अमेरिका के बीच गहरा और व्यापक सहयोग है। उन्होंने इस रिश्ते को ऐसा बताया जो अन्य क्षेत्रों और विश्व को प्रभावित और निर्देशित करता है। उन्होंने कहा कि इसकी मुख्य वजह यह है कि दोनों देशों के कई मुद्दों पर और दुनिया के कई हिस्सों में हित समान हैं। जयशंकर ने जटिल समयों में भी एक मजबूत साझेदार के रूप में, खुले और उत्पादक विचार-विमर्श की उम्मीद जताई। उन्होंने अमेरिकी विदेश सचिव का गर्मजोशी से स्वागत किया।
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