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Hindi News ›   India News ›   Prithviraj Chavan Says It Is Too Early to Decide Rahul Gandhi as 2029 PM Face, Stresses Opposition Unity

विपक्ष के पीएम चेहरे पर सस्पेंस: कांग्रेस दिग्गज ने राहुल की उम्मीदवारी पर खड़े किए सवाल, बोले- फैसला जल्दबाजी

Wed, 09 Sep 2026 10:04 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 09 Sep 2026 10:04 PM IST
सार

कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि 2029 में राहुल गांधी विपक्ष के पीएम चेहरे होंगे या नहीं, यह तय करना अभी जल्दबाजी है। उन्होंने भाजपा के खिलाफ विपक्षी वोटों का बंटवारा रोकने और क्षेत्रीय दलों को साथ लाने पर जोर दिया।

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Prithviraj Chavan Says It Is Too Early to Decide Rahul Gandhi as 2029 PM Face, Stresses Opposition Unity
पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व सीएम, महाराष्ट्र - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे या नहीं, इस पर अभी कोई फैसला करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने जोर दिया कि फिलहाल विपक्ष की सबसे बड़ी प्राथमिकता भाजपा के खिलाफ वोटों का बंटवारा रोकना और विपक्षी दलों के बीच एकता मजबूत करना होना चाहिए।

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समाचार एजेंसी से बातचीत में चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस को आगामी चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को चुनौती देने के लिए क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी समेत इंडिया गठबंधन के घटक दलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

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क्या 2029 में राहुल गांधी होंगे विपक्ष का चेहरा?

जब चव्हाण से पूछा गया कि क्या 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश किए जाएंगे, तो उन्होंने कहा कि अभी यह कहना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज यह तय करने की स्थिति में नहीं है कि पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए किसी चेहरे को आगे करेगी या नहीं। इसी तरह इंडिया गठबंधन भी चुनाव के बाद इस संबंध में कोई फैसला ले सकता है।
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हालांकि, चव्हाण ने राहुल गांधी की लोगों के बीच स्वीकार्यता को लेकर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार पार्टी संगठन को मजबूत करने और युवाओं से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका चुनावी फायदा कांग्रेस और उसके सहयोगियों को मिल सकता है।

विपक्षी एकता पर इतना जोर क्यों?

चव्हाण के मुताबिक कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों के साथ मतभेदों को कम करते हुए व्यापक विपक्षी एकता की दिशा में काम करना होगा। उनका कहना है कि विपक्ष का सबसे अहम लक्ष्य यह होना चाहिए कि भाजपा विरोधी वोट अलग-अलग दलों में बंटने न पाएं। उन्होंने माना कि यह लक्ष्य आसान नहीं है, लेकिन असंभव भी नहीं है। उनके अनुसार कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक ताकत को भी स्वीकार करना होगा। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और तमिलनाडु में डीएमके जैसी पार्टियां व्यापक विपक्षी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

क्या डीएमके फिर इंडिया गठबंधन में लौटेगी?

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई कि तमिलनाडु की प्रमुख राजनीतिक पार्टी डीएमके फिर से इंडिया गठबंधन का हिस्सा बन सकती है। उन्होंने कहा कि डीएमके ने अपनी नाराजगी जाहिर की है और उन्हें यह जानकारी नहीं है कि इंडिया गठबंधन की ओर से पार्टी के साथ कौन बातचीत कर रहा है। चव्हाण ने संकेत दिया कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी मोर्चे को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय दलों को साथ रखना जरूरी होगा।

युवाओं के मुद्दों पर कांग्रेस का क्या फोकस?
चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस को युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया जेन जी आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं में शिक्षा, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। उनके मुताबिक यह केवल किसी एक क्षेत्र या भाषा तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी युवाओं की चिंताओं को समझने और उनके साथ दोबारा जुड़ने की कोशिश कर रही है।

2029 में एआई और नौकरियां बनेंगे बड़ा मुद्दा?

चव्हाण ने आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बताया। उनका मानना है कि 2029 तक AI के चलते नौकरियों की प्रकृति में बड़ा बदलाव हो सकता है और रोजगार का सवाल राजनीति के केंद्र में आ सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में बेरोजगारी, महंगाई, कृषि और बदलती नौकरियों जैसे आर्थिक मुद्दे अहम रहेंगे।

क्या सिर्फ गठबंधन से भाजपा को हराया जा सकता है?

चव्हाण ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल गठबंधन का गणित भाजपा को हराने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। उनके मुताबिक विपक्ष को मजबूत जमीनी संगठन तैयार करना होगा और जनता के बीच मौजूद असंतोष को चुनावी समर्थन में बदलने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष की रणनीति एक दिन में तैयार नहीं होगी और दलों को चुनावी परिस्थितियों से लगातार सीखना होगा।


हिंदुत्व को लेकर चव्हाण ने क्या कहा?

भाजपा के प्रमुख वैचारिक मुद्दे हिंदुत्व पर भी चव्हाण ने टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि हिंदुत्व की राजनीतिक विचारधारा के रूप में अपील कम हो रही है। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हालिया तीन देशों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर हिंदुत्व को लेकर कोई भ्रम नहीं होता तो इसे दुनिया के सामने समझाने की जरूरत नहीं पड़ती। चव्हाण ने आरएसएस के संदेश और भाजपा नेताओं के जमीनी बयानों एवं कार्यों के बीच विरोधाभास होने का भी दावा किया। उन्होंने भाषा, खान-पान, पहनावे और 'बुलडोजर न्याय' जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।

जीडीपी के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने जून तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को लेकर उठे विवाद पर भी सवाल किए। भारत ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की थी। चव्हाण ने कहा कि जीडीपी की गणना में आधार वर्ष बदलना सामान्य प्रक्रिया है और इससे आंकड़ों में बदलाव आता है। लेकिन उनके मुताबिक असली सवाल यह है कि जीडीपी की गणना के लिए इस्तेमाल की गई पद्धति कितनी सही है। उन्होंने कहा कि केवल जीडीपी के आंकड़े देखकर अर्थव्यवस्था के मजबूत होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, बल्कि इसके लिए जमीनी और वास्तविक आर्थिक आंकड़ों को भी देखना जरूरी है।
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