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म्यांमार सीमा से सटे गांवों पर ड्रोन हमला: कई घरों में आगजनी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; उग्रवादी संगठन पर शक
Fri, 08 May 2026 06:10 AM IST
अमन तिवारी
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 08 May 2026 06:10 AM IST
सार
मणिपुर के कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा से सटे गांवों पर कथित ड्रोन हमले के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। हमले में कई घरों में आग लगा दी गई, एक महिला घायल हुई और दो ग्रामीण लापता बताए जा रहे हैं। सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है।
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मणिपुर हमले की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। म्यांमार सीमा से सटे कामजोंग जिले के कई गांवों पर बुधवार तड़के ड्रोन हमले का दावा किया गया। उग्रवादियों के इस हमले में कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया। हमले में एक महिला घायल हुई है और दो ग्रामीण लापता हैं।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमला रात करीब दो बजे नामली मार्केट और चोरो गांव के आसपास हुआ। आशंका जताई जा रही है कि हमलावरों ने ड्रोन का इस्तेमाल कर विस्फोटक गिराए और इसके बाद गांवों में आगजनी की। कुछ रिपोर्टों में म्यांमार आधारित उग्रवादी संगठन केएनए-बी (कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा) का नाम भी सामने आया है, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है। सूत्रों के अनुसार, हमले के बाद कई ग्रामीण जान बचाने के लिए जंगलों और सुरक्षित इलाकों की ओर भाग गए। इसके बाद सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और पूरे इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों में हाल के महीनों में ड्रोन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की आशंका पहले भी जताई जाती रही है। ऐसे में इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
यह आतंकी हमला : बीरेन सिंह
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कामजोंग जिले के सीमावर्ती गांवों पर हुए ड्रोन हमले को सीमा पार आतंकवादी हमला करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जलते हुए घरों की तस्वीरें साझा कीं और लिखा, नामली, वांगली और चोरो गांवों पर हुए हमले भारत-म्यांमार सीमा के पार से सक्रिय बाहरी ताकतों की ओर से अंजाम दिया गया। जब तक मजबूत सीमा सुरक्षा और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मणिपुर में स्थायी शांति संभव नहीं है।
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बीते कुछ महीनों में हिंसा की घटनाएं बढ़ीं
पिछले कई महीनों से मणिपुर के पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में छिटपुट हमले, गोलीबारी और उग्रवादी गतिविधियां सामने आती रही हैं। राज्य के कई जिलों में सुरक्षाबलों और सशस्त्र समूहों के बीच तनाव बना हुआ है। फिलहाल पुलिस, असम राइफल्स और अन्य केंद्रीय एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों ने बताया कि नुकसान के वास्तविक आकलन और हमलावरों की पहचान के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमला रात करीब दो बजे नामली मार्केट और चोरो गांव के आसपास हुआ। आशंका जताई जा रही है कि हमलावरों ने ड्रोन का इस्तेमाल कर विस्फोटक गिराए और इसके बाद गांवों में आगजनी की। कुछ रिपोर्टों में म्यांमार आधारित उग्रवादी संगठन केएनए-बी (कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा) का नाम भी सामने आया है, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है। सूत्रों के अनुसार, हमले के बाद कई ग्रामीण जान बचाने के लिए जंगलों और सुरक्षित इलाकों की ओर भाग गए। इसके बाद सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और पूरे इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों में हाल के महीनों में ड्रोन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की आशंका पहले भी जताई जाती रही है। ऐसे में इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
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यह आतंकी हमला : बीरेन सिंह
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कामजोंग जिले के सीमावर्ती गांवों पर हुए ड्रोन हमले को सीमा पार आतंकवादी हमला करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जलते हुए घरों की तस्वीरें साझा कीं और लिखा, नामली, वांगली और चोरो गांवों पर हुए हमले भारत-म्यांमार सीमा के पार से सक्रिय बाहरी ताकतों की ओर से अंजाम दिया गया। जब तक मजबूत सीमा सुरक्षा और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मणिपुर में स्थायी शांति संभव नहीं है।
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बीते कुछ महीनों में हिंसा की घटनाएं बढ़ीं
पिछले कई महीनों से मणिपुर के पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में छिटपुट हमले, गोलीबारी और उग्रवादी गतिविधियां सामने आती रही हैं। राज्य के कई जिलों में सुरक्षाबलों और सशस्त्र समूहों के बीच तनाव बना हुआ है। फिलहाल पुलिस, असम राइफल्स और अन्य केंद्रीय एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों ने बताया कि नुकसान के वास्तविक आकलन और हमलावरों की पहचान के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।