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Stipend Scam: मेडिकल कॉलेज के 5.88 करोड़ की संपत्ति ईडी ने की कुर्क, छात्रों को लगाया 33 करोड़ का चूना
Mon, 21 Jul 2025 06:19 PM IST
शुभम कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
Published by: शुभम कुमार
Updated Mon, 21 Jul 2025 06:19 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेवप्पा रामपुरे मेडिकल कॉलेज वजीफा घोटाले में 5.88 करोड़ रुपये की अचल और चल संपत्तियों को पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया है। मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी ने छात्रों के नाम पर आए 33.34 करोड़ रुपये के वजीफे की राशि से धोखाधड़ी कर संपत्तियां अर्जित कीं।
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ED
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मैंगलोर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 18 जुलाई को महादेवप्पा रामपुरे मेडिकल कॉलेज वजीफा घोटाले के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 5.88 करोड़ रुपये (लगभग) की दो अचल संपत्तियों और कई चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
कुर्क की गई अचल संपत्तियां, मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी ने अपराध की आय का उपयोग करके अपने बेटों राजकुमार बिलगुंडी और संतोष बिलगुंडी के नाम पर अर्जित की थीं। मेडिकल छात्रों के बैंक खातों में जमा किए गए 33.34 करोड़ रुपये (लगभग) की धोखाधड़ी की गई। वजीफे के फंड को छात्रों के प्रवेश के समय उनसे खाली हस्ताक्षरित चेक लेकर और बाद में खाली चेक में विवरण भरकर उसे भुनाकर छात्रों को उनके हकदार वजीफे से वंचित कर दिया गया। उस पैसे से आरोपियों ने अचल संपत्तियां खरीदी।
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ईडी ने भीमाशंकर बिलगुंडी, डॉ. एसएम पाटिल, सुभाष, केनरा बैंक मैनेजर और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत कर्नाटक के कलबुर्गी सिटी सीईएन क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। अप्रैल और मई 2025 के महीने के दौरान की गई पूछताछ से पता चला है कि मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी, (हैदराबाद एजुकेशन सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष जो एमआरएमसी का प्रबंधन करते हैं), एमआरएमसी के अकाउंटेंट सुभाषचंद्र जगन्नाथ और मल्लन्ना (एचकेई सोसाइटी के कार्यालय अधीक्षक) की सहायता से, 2018 और 2024 के बीच की अवधि के दौरान, एमआरएमसी के पीजी मेडिकल छात्रों के बैंक खातों में जमा किए गए 33.34 करोड़ रुपये (लगभग) के वजीफे के फंड को लेकर धोखाधड़ी की है।
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ईडी के अनुसार, छात्रों के प्रवेश के समय उनसे खाली हस्ताक्षरित चेक ले लिए गए। आरोपियों ने बाद में खाली चेक में विवरण भरकर उसे भुना लिया गया। इस तरह से छात्रों को उनके वजीफे से वंचित कर दिया गया। इसके अलावा, जांच अवधि के दौरान, भीमाशंकर बिलगुंडी ने अपने बेटों राजकुमार बिलगुंडी और संतोष बिलगुंडी के नाम पर दो अचल संपत्तियां खरीदीं। इसके लिए उन्होंने शांतप्पा पाटिल नामक एक मध्यस्थ के माध्यम से मधुसूदन मालू को 5.87 करोड़ रुपये की भारी नकद राशि का भुगतान किया। तब उनके पास आय का कोई वैध स्रोत नहीं था, इस कारण से उक्त संपत्तियों को कुर्क किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
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कुर्क की गई अचल संपत्तियां, मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी ने अपराध की आय का उपयोग करके अपने बेटों राजकुमार बिलगुंडी और संतोष बिलगुंडी के नाम पर अर्जित की थीं। मेडिकल छात्रों के बैंक खातों में जमा किए गए 33.34 करोड़ रुपये (लगभग) की धोखाधड़ी की गई। वजीफे के फंड को छात्रों के प्रवेश के समय उनसे खाली हस्ताक्षरित चेक लेकर और बाद में खाली चेक में विवरण भरकर उसे भुनाकर छात्रों को उनके हकदार वजीफे से वंचित कर दिया गया। उस पैसे से आरोपियों ने अचल संपत्तियां खरीदी।
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ईडी ने भीमाशंकर बिलगुंडी, डॉ. एसएम पाटिल, सुभाष, केनरा बैंक मैनेजर और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत कर्नाटक के कलबुर्गी सिटी सीईएन क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। अप्रैल और मई 2025 के महीने के दौरान की गई पूछताछ से पता चला है कि मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी, (हैदराबाद एजुकेशन सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष जो एमआरएमसी का प्रबंधन करते हैं), एमआरएमसी के अकाउंटेंट सुभाषचंद्र जगन्नाथ और मल्लन्ना (एचकेई सोसाइटी के कार्यालय अधीक्षक) की सहायता से, 2018 और 2024 के बीच की अवधि के दौरान, एमआरएमसी के पीजी मेडिकल छात्रों के बैंक खातों में जमा किए गए 33.34 करोड़ रुपये (लगभग) के वजीफे के फंड को लेकर धोखाधड़ी की है।
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ईडी के अनुसार, छात्रों के प्रवेश के समय उनसे खाली हस्ताक्षरित चेक ले लिए गए। आरोपियों ने बाद में खाली चेक में विवरण भरकर उसे भुना लिया गया। इस तरह से छात्रों को उनके वजीफे से वंचित कर दिया गया। इसके अलावा, जांच अवधि के दौरान, भीमाशंकर बिलगुंडी ने अपने बेटों राजकुमार बिलगुंडी और संतोष बिलगुंडी के नाम पर दो अचल संपत्तियां खरीदीं। इसके लिए उन्होंने शांतप्पा पाटिल नामक एक मध्यस्थ के माध्यम से मधुसूदन मालू को 5.87 करोड़ रुपये की भारी नकद राशि का भुगतान किया। तब उनके पास आय का कोई वैध स्रोत नहीं था, इस कारण से उक्त संपत्तियों को कुर्क किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।