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मालेगांव ब्लास्ट केस के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित जेल से रिहा

Tue, 22 Aug 2017 09:43 PM IST
amarujala.com, Written by: मुकेश झा
amarujala.com, Written by: मुकेश झा Updated Tue, 22 Aug 2017 09:43 PM IST
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 Lt Col Purohit from Taloja Jail in compliance to SC order after completion of formalities.
कर्नल पुरोहित - फोटो : ie

मालेगांव ब्लास्ट केस के आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित  तलोजा जेल से रिहा हो गए हैं। मंगलवार को एनआईए की विशेष अदालत ने पूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जेल से रिहा करने का ऑर्डर जारी किया। करीब नौ साल जेल में रहने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित जेल से रिहा हुए।

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बता दें कि लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित 2008 में हुए मालेगांव बम धमाके के आरोपी थे। बम धमाके में उस समय छह लोग मारे गए थे। पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। पुरोहित ने एटीएस पर भी उन्हें फंसाने का आरोप लगाया है।
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पढ़ेंः- कौन हैं श्रीकांत पुरोहित, कैसे आए NIA के शिकंजे में? SC से 9 साल बाद मिली जमानत

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ही अंतरिम जमानत दे दी थी। जमानत देते हुए एससी ने कहा कि हम बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलट रहे हैं। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त को ही जमानत मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

NIA ने किया था जमानत का विरोध

 Lt Col Purohit from Taloja Jail in compliance to SC order after completion of formalities.
col srikant purohit

वर्ष 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखते हुए बताया था कि अभियुक्त लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित के खिलाफ दोषी ठहराने लायक कई परिस्थितियां हैं जो साबित करती हैं कि उनकी मामले में गहरी सहभागिता थी।

वहीं मामले में प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इसी बिना पर प्रज्ञा ठाकुर को जमानत मिल गई थी। इसी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने बांबे हाईकोर्ट द्वारा प्रज्ञा को जमानत देने के खिलाफ दायर की गई  याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है।

पढ़ेंः- मालेगांव ब्लास्ट केसः सुप्रीम कोर्ट से कर्नल पुरोहित को राहत, 9 साल बाद मिली जमानत

प्रज्ञा को जमानत मिलने के बद पुरोहित ने अपनी जमानत के लिए अदालत में हलफनामा दाखिल किया था। जस्टिस आरके अग्रवाल और एमएम शांतनागोदर की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान एनआईए ने कहा कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत देने में कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं, लेकिन पुरोहित को जमानत नहीं दी जा सकती।

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