लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर घमासान चरम पर पहुंच चुका है। विपक्षी पार्टियां भाजपा को हराने के लिए लामबंद होने लगी हैं तो वहीं भाजपा सत्ता में दोबारा आने के लिए लगातार नई रणनीति बना रही है। उसने विभिन्न राज्यों में सहयोगियों के साथ गठबंधन को तेजी से आगे बढ़ाया है। महाराष्ट्र में जहां उसने 30 साल पुराने दोस्त शिवसेना के साथ फिर दोस्ती की है, वहीं तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और पीएमके के गठजोड़ में शामिल हो गई है।
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उत्तर प्रदेश - 80 सीटें
सीटों के लिहाज से उत्तप्रदेश पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। आबादी के लिहाज से यहां सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं। पिछली बार भाजपा ने यहां जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 71 सीटों पर कब्जा जमाया था। यहां मिली प्रचंड जीत ने उसे केंद्र की सत्ता तक पहुंचाया। पीएम मोदी ने खुद वाराणसी से चुनाव लड़ा और संसद पहुंचे। इस राज्य में मोदी लहर इतनी प्रचंड थी कि बसपा का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया जबकि समाजवादी पार्टी 5 सीटें ही जीत सकी। कांग्रेस अमेठी और रायबरेली में ही टिक सकी।लेकिन इस बार हालात अलग है। एक अरसे बाद उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और तमाम सर्वे में भाजपा को कम सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। सर्वे की मानें तो सपा-बसपा गठबंधन 50 से 60 सीटों पर कब्जा जमा सकता है। अगर अनुमान सही निकला तो भाजपा के लिए दोबारा सत्ता तक पहुंचना बेहद मुश्किल होगा।
महाराष्ट्र - 48 सीटें
ये राज्य भाजपा के लिए किस कदर महत्वपूर्ण इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उसने लंबे समय से नाराज चल रहे दोस्त शिव सेना को मनाना पड़ा।भाजपा से नाराज शिवसेना अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी थी। लेकिन भाजपा ने किसी तरह शिवसेना के साथ दोबारा दोस्ती कर बड़ी मुसीबत को टाल दिया। समझौते के तहत भाजपा 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। दोनों मिलकर फिर से 2014 का जलवा दोहरा सकते हैं। 2014 में इस गठबंधन ने 48 में से 41 सीटों पर कब्जा किया था। भाजपा को 23 जबकि शिवसेना को 18 सीटों पर जीत मिली थी। दोनों मिलकर इसके आसपास का आंकड़ा फिर हासिल कर सकते हैं।
मध्यप्रदेश - 29 सीटें
ये राज्य भाजपा के लिए इस बार कड़ी परीक्षा लेने जा रहा है। 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 साल से काबिज भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया। सबसे बड़ा कारण सवर्ण आंदोलन को माना गया। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 29 में से 27 सीटों पर कब्जा जमाया था। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार का असर लोकसभा चुनाव में भी दिख सकता है। अगर 2019 में इसी पैटर्न पर वोटिंग हुई तो भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गुजरात - 26 सीटें
2014 चुनाव में मोदी लहर के चलते भाजपा ने गुजरात में भी भगवा परचम लहराया। भाजपा ने सभी 26 सीटों पर कब्जा किया। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता हासिल करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। कांग्रेस ने उसे कड़ी टक्कर दी थी। इस लिहाज से 2019 चुनाव में इस राज्य में भाजपा को थोड़ा बहुत नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी जैसे युवा नेता लगातार भाजपा को चुनौती दे रहे हैं। लेकिन आखिरी वक्त पर मोदी बाजी को पूरी तरह अपने पक्ष में भी कर सकते हैं। करीब दो दशकों से यहां की जनता भाजपा पर भरोसा जताता आ रही है।