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लोकसभा चुनाव 2024: पहले चरण के मतदान में दुनिया की सबसे छोटी महिला का वोट, शोंपेन जनजाति को पहली बार मताधिकार
Sat, 20 Apr 2024 06:36 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 20 Apr 2024 06:36 AM IST
सार
अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की शोंपेन जनजाति के सात सदस्यों ने केंद्रशासित प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट के लिए मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह पहला मौका था, जब विशेष संवेदनशील जनजाति समूह की श्रेणी में आने वाले समुदाय ने जंगल से बाहर निकलकर वोट डाला।
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पहले चरण के मतदान के दौरान मतदाता पहचान पत्र दिखाते लोग।
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में हिंसा की छिटपुट घटनाओं को छोड़कर पहले चरण का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। तमाम चुनौतियों के बावजूद पहले चरण के मतदान को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। शारीरिक रूप से असमर्थ और दिव्यांग मतदाता स्ट्रेचर एवं व्हीलचेयर पर बैठकर मतदान करने पहुंचे। पहाड़ी इलाकों में कई जगह लंबी और कठिन चढ़ाई के बावजूद लोग वोट देने मतदान केंद्रों पर पहुंचे। पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं में लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की अपनी भूमिका के निर्वहन को लेकर भारी उत्साह दिखा।
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पहले चरण के मतदान के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रंग देखने को मिला। नवविवाहित जोड़े भी वोट देने के अपने अधिकार को बखूबी निभाते नजर आए। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में एक बूथ पर शादी के लिबास पहुंचे कपिल गुप्ता ने मतदान किया। उनकी बृहस्पतिवार को ही शादी हुई और शुक्रवार को घर लौटने के साथ उन्होंने सबसे पहले वोट डाला। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में भी एक नवविवाहित जोड़े ने मतदान किया।
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देहरादून में मतदान केंद्र पर एक परिवार की तीन पीढ़ियों ने एक साथ वोट डाले। प्रभा शर्मा ने बेटी प्रीति कौशिक, पोतियों शमिता कौशिक और साक्षी कौशिक के साथ मतदान किया। नैनीताल में महिलाएं पारंपरिक पोशाक में मतदान करने पहुंचीं। उधर, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, असम और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कुछ बूथों पर ईवीएम में गड़बड़ी की घटनाएं भी सामने आईं, लेकिन मतदान पर कोई असर नहीं दिखा।
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दिव्यांग मतदाता के लिए 18 किमी घने जंगल में गए : केरल के इडुक्की जिले में आदिवासी गांव एडमलाक्कुडी में 92 वर्षीय दिव्यांग शिवलिंगम का मतदान कराने के लिए मतदान कर्मियों की एक टीम ने 18 किलोमीटर लंबा रास्ता तय किया। रास्ते में जंगल भी था।
डोडा में महिलाओं को भाया पिंक बूथ
जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की पांच से एक उधमपुर सीट के लिए मतदान हुआ। इस लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले डोडा जिले में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच पूरी तरह महिला कर्मियों की तैनाती वाले पिंक बूथ महिला मतदाताओं को खूब आकर्षित किया। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए डोडा स्थित राजकीय कन्या स्कूल में बने पिंक बूथ पहुंची। यहां लंबी कतारें नजर आईं।
डोडा जिले के भदरवाह में पहली बार वोट करने वाली वंशिका शर्मा ने कहा कि 18 साल की होने के बाद मुझे मतदान को लेकर बेसब्री से इंतजार था। भदरवाह में एक केंद्र पर सबसे पहले मतदान करने वाले मूल राज का चुनावकर्मियों ने बुके देकर स्वागत किया।
एक वोट पड़ा और हो गया 100 फीसदी मतदान
इटानगर। अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले में एक मतदान केंद्र पर 100 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। दरअसल इस मतदान केंद्र पर सिर्फ एक ही मतदाता था और वह भी महिला थी। 44 साल की सोकेला तायांग ने दोपहर 1 बजे मतदान किया। इसके लिए मतदान कर्मियों ने दुर्गम इलाके में 40 किलोमीटर की पैदल यात्रा की और मतदान केंद्र स्थापित किया था।
दुनिया की सबसे छोटी महिला ने डाला वोट
दुनिया की सबसे छोटे कद (2.7 फुट) की मतदाता ज्योति आम्गे ने नागपुर में मतदान किया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, ज्योति की लंबाई मात्र 62.8 सेंटीमीटर है।
अंडमान : शोंपेन जनजाति ने पहली बार किया मताधिकार का इस्तेमाल
अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की शोंपेन जनजाति के सात सदस्यों ने केंद्रशासित प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट के लिए मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह पहला मौका था, जब विशेष संवेदनशील जनजाति समूह की श्रेणी में आने वाले समुदाय ने जंगल से बाहर निकलकर वोट डाला। जनगणना 2011 के अनुसार, शोंपेन जनजाति की आबादी 229 थी। इसके कुल 98 मतदाता हैं।
शरणार्थी शिविर में जन्मी नलैनी ने किया मतदान
तमिलनाडु में एक शरणार्थी शिविर में पैदा हुई श्रीलंकाई तमिल नलैनी किरुबाकरन ने पहली बार मतदान किया। नलैनी का जन्म 1986 में रामेश्वरम मंडपम शिविर के एक शरणार्थी केंद्र में हुआ था और अब वह त्रिची के कोट्टापट्टू में श्रीलंकाई तमिलों के पुनर्वास शिविर में रह रही है। इस साल जनवरी में उसे मतदाता पहचान पत्र मिल गया था। नलैनी ने कहा, मैंने पहली बार वोट दिया है। बहुत खुश हूं। 38 साल की उम्र में मेरा सपना पुरा हो गया है। मैं श्रीलंकाई तमिलों के पुनर्वास शिविर से मतदान करने वाली पहली मतदाता हूं।
प्रमाणिक की सीट पर सबसे अधिक मतदान, गडकरी के क्षेत्र में सबसे कम वोट पड़े
लोकसभा चुनाव के पहले चरण में नौ केंद्रीय मंत्रियों की किस्मत भी ईवीएम में कैद हो गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक की सीट कूचबिहार पर सबसे ज्यादा 80.95 प्रतिशत मतदान हुआ है। नितिन गडकरी की सीट नागपुर पर सबसे कम 54.46 प्रतिशत वोट पड़े हैं।
भूपेंद्र यादव की राजस्थान की अलवर सीट पर 59.79 फीसदी मतदान हुआ है। अर्जुन राम मेघवाल की बीकानेर सीट पर 53.96 फीसदी मत पड़े हैं। सर्बानंद सोनोवाल की असम की डिब्रूगढ़ सीट पर 71.48 फीसदी मत पड़े हैं। जितेंद्र सिंह की उधमपुर सीट पर 67.99% मतदान हुआ। किरेन रिजिजू की अरुणाचल पश्चिम सीट पर 68.75 प्रतिशत और फग्गन सिंह कुलस्ते की मध्य प्रदेश की मंडला सीट पर 72.49 प्रतिशत मतदान हुआ। संजीव बालियान की मुजफ्फरनगर सीट पर 59.29 फीसदी मत पड़े हैं।
कहां-कितना मतदान