फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   landslide ai forecasting system identifies risk zones with over 95 per cent accuracy in prediction

भूस्खलन: एआई से 95 फीसदी से ज्यादा सटीकता के साथ पूर्वानुमान संभव, जोखिम वाले क्षेत्र की पहचान करती है प्रणाली

Mon, 07 Apr 2025 04:54 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 07 Apr 2025 04:54 AM IST
सार

वैज्ञानिकों ने एक एआई आधारित प्रणाली विकसित की है जो 95.6% सटीकता से भूस्खलन की भविष्यवाणी कर सकती है। यह मॉडल पर्यावरणीय और मानवीय कारकों का विश्लेषण कर जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करता है।

विज्ञापन
landslide ai forecasting system identifies risk zones with over 95 per cent accuracy in prediction
भूस्खलन - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भूस्खलन की विभीषिका को ध्यान में रखते हुए जर्मनी के लिबनिज सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल लैंडस्केप रिसर्च (जेडएएलएफ) के वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक नया एआई आधारित ढांचा (मॉडल) तैयार किया है।

विज्ञापन


मॉडल लगभग 95.6 फीसदी सटीकता के साथ भूस्खलन की भविष्यवाणी कर सकता है। इसमें छह अलग-अलग मशीन लर्निंग एल्गोरिदम शामिल हैं जो मिलकर पूर्वानुमान की गुणवत्ता को और बेहतर बनाते हैं। इसे मौसम के पूर्वानुमान की तरह समझा जा सकता है, जहां पुराने आंकड़ों और संकेतों के आधार पर आने वाले खतरों का अनुमान लगाया जाता है। यह ढांचा मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग करते हुए भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों का अत्यंत सटीक पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है। वैज्ञानिक पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित शोध के अनुसार यह प्रणाली आंकड़ों का विश्लेषण कर जोखिम वाले इलाकों को पहचानती है और उनका विस्तृत मानचित्र तैयार करती है।  शोधकर्ताओं ने भारत के पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्र में इस तकनीक का परीक्षण किया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: पड़ोसी देशों के विकास में अहम भूमिका निभा रहा भारत; बीते 10 सालों में पेश की वसुधैव कुटुम्बकम की मिसाल
विज्ञापन
विज्ञापन


इस तरह करता है काम : यह प्रणाली बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय आंकड़ों जैसे वर्षा की तीव्रता, मिट्टी की प्रकृति, इलाके की ढलान, सड़क निर्माण या पेड़ों की कटाई जैसी मानवीय गतिविधियों का विश्लेषण करती है। मॉडल अतीत में हुए भूस्खलनों और उनमें मौजूद समानताओं के आधार पर संभावित खतरों की पहचान करता है। पूर्वानुमान की प्रक्रिया तीन चरण में पूरी होती है। इसमें बेस मॉडल का प्रशिक्षण, मेटा-फीचर्स का निर्माण व मेटा क्लासिफायर का प्रशिक्षण शामिल है।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed