इतिहास पढ़ा, क्रिकेट खेला और नेता बन गए, ये है कीर्ति के भाजपा से 'आजाद' होने की कहानी
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भारतीय जनता पार्टी से निलंबित नेता कीर्ति आजाद ने सोमवार को कांग्रेस का दामन थाम लिया। कीर्ति आजाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पारंपरिक मैथिली पाग पहनाकर पार्टी में शामिल हुए। उन्हें पिछले हफ्ते ही कांग्रेस में शामिल होना था लेकिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आत्मघाती आतंकी हमले की वजह से उनके कांग्रेस पार्टी में शामिल होने में देरी हुई। पूर्व क्रिकेटर और बिहार के दरभंगा से सासंद कीर्ति आजाद को चार साल पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते भारतीय जनता पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।
चार साल पहले ही कांग्रेस ने दे दिया था न्यौता!
कीर्ति आजाद के भारतीय जनता पार्टी से निलंबित होते ही कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में शामिल होने का न्यौता दे दिया था। कांग्रेस का कहना था कि कीर्ति आजाद के पिता कांग्रेसी थे। उनकी रगों में कांग्रेसी खून बहता है। यह बयान कांग्रेसी नेता शकील अहमद ने दिया था। इस घटना के चार साल बाद 2019 में कीर्ति आजाद ने न सिर्फ अपने कांग्रेसी पिता की परंपरा को आगे बढ़ाया है बल्कि कांग्रेस की उस ख्वाहिश को भी पूरा कर दिया जो उनके एक नेता ने बयां की थी।
भारतीय जनता पार्टी से साल 2015 में निलंबित होते ही कीर्ति बिफर पड़े थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि वह इस बात से खुश हैं कि उनके भ्रष्टाचार से लड़ने के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का वास्तविक चेहरा सामने आया है। कहा गया, कीर्ति आजाद को पार्टी से निलंबन की सजा अरुण जेटली से उलझने की वजह से मिली।
जेटली बने कीर्ति के भारतीय जनता पार्टी से 'आजादी' की वजह
कीर्ति आजाद और अरुण जेटली के बीच तनातनी की नींव साल 2009 में ही पड़ गई थी। जब अरुण जेटली डीडीसीए (दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ ) के अध्यक्ष थे उस वक्त कीर्ति आजाद ने डीडीसीए के सदस्यों पर अपने साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। साल 2011-12 में अरुण जेटली से खार खाए बैठे कीर्ति ने डीडीसीए में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जेटली से सवाल किए और उनपर आरोप लगाए।
ऐसे पड़ी कीर्ति के 'आजाद' होने की पटकथा की नींव
कीर्ति यहीं नहीं रुके। उन्होंने साल 2012 में इस मामले को संसद में उठाया। तात्कालिक कांग्रेस सरकार ने इस पर एसएफआईओ जांच का आदेश दिया। 2015 में दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने इस पूरे मामले का राजनीतिक फायदे लेने की कोशिश कि और जेटली को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया। 20 दिसंबर 2015 को आम आदमी पार्टी के जेटली के खिलाफ मुखर होते ही कीर्ति आजाद ने एक और बाण छोड़ा और भारतीय हॉकी टीम में जेटली और उनके परिवार वालों के कथित हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए। एक ही दिन बाद 21 दिसंबर 2015 को कीर्ति ने सार्वजनिक तौर पर अरुण जेटली को चुनौती दे डाली कि अगर हिम्मत है तो उनके खिलाफ मानहानि का दावा ठोके।
कीर्ति ने कहा- "हैल्लो डियर जेटली, हम पर डेफिमेशन फाइल कर रहे हो ना? प्लीज करो ना''
इतिहास पढ़ें, क्रिकेट खेला और राजनीतिज्ञ बन गए
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कीर्ति आजाद ने राजनीति में कदम रखा और बिहार के दरभंगा से तीन बार सांसद चुने गए। वह साल 1993 से 1998 के बीच दिल्ली से तीन बार विधायक रहे।