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Karnataka: डीके शिवकुमार की अपील पर HC करेगा सुनवाई, आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा मामला
Wed, 15 Nov 2023 10:55 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 15 Nov 2023 10:55 PM IST
सार
एकल न्यायाधीश पीठ ने इससे पहले शिवकुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार द्वारा 25 सितंबर, 2019 को दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई थी। पढ़िए पूरा मामला....
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- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई को मुकदमा चलाने के लिए पिछली भाजपा सरकार द्वारा दी गई मंजूरी के खिलाफ उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार की अपील पर 22 नवंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। सीबीआई ने बुधवार को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ के समक्ष उच्चतम न्यायालय के निर्देश की जानकारी दी। इसके बाद अदालत ने सुनवाई की तारीख 22 नवंबर तय की।
एकल न्यायाधीश पीठ ने इससे पहले शिवकुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार द्वारा 25 सितंबर, 2019 को दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई थी। इसके बाद शिवकुमार ने इसे खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी जिसने एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। केंद्रीय एजेंसी ने एक विशेष अनुमति याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, हम इसमें हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं, खासकर तब जब सीबीआई ने पहले ही उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश पर लगी रोक को हटाने के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दायर कर दिया है। हालांकि, इसने हाईकोर्ट को आवेदन और अपील को दो सप्ताह के भीतर सुनने और निपटाने का निर्देश दिया था।
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एकल न्यायाधीश पीठ ने इससे पहले शिवकुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार द्वारा 25 सितंबर, 2019 को दी गई मंजूरी को चुनौती दी गई थी। इसके बाद शिवकुमार ने इसे खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी जिसने एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। केंद्रीय एजेंसी ने एक विशेष अनुमति याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, हम इसमें हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं, खासकर तब जब सीबीआई ने पहले ही उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश पर लगी रोक को हटाने के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दायर कर दिया है। हालांकि, इसने हाईकोर्ट को आवेदन और अपील को दो सप्ताह के भीतर सुनने और निपटाने का निर्देश दिया था।
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