कानों देखी: लालू के लाल तेजस्वी यादव ने कर दिया सबको पस्त
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कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह ने महागठबंधन को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। वह रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा को न केवल कांग्रेस अध्यक्ष के करीब ले आए, बल्कि लालू से भी मिलवाए। बिहार में 06 सीट देने के लिए राजी भी कराया। कांग्रेस को 12 की बजाय 11 सीट देने पर राजग के नाता सहमत हो गए हैं। हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी को दो ही सीट मिलेगी।
एक सीट पर शरद यादव की पार्टी चुनाव लड़ेगी। 19 सीट पर राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार लोकसभा चुनाव में मैदान में होंगे। एक सीट एक अन्य सहयोगी को देने की योजना है। बताते हैं इसकी घोषणा अब कभी भी हो सकती है।
संघ अब क्या करे?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) बड़ी दुविधा में फंस गया है। उसके कार्यकर्ता जहां मोदी सरकार के कामकाज के रवैय्ये से खीझे हैं, वहीं यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा में भी वह खुश नहीं हैं। ऊपर से राम मंदिर, गाय और गंगा ने उन्हें सवालों के नये मुहाने पर खड़ा कर दिया है। संघ के कार्यकर्ता जिधर निकल रहे हैं, लोग सवाल पूछ रहे हैं। इधर सरकार है कि फेस सेविंग के लिए भी कुछ नहीं कर रही है।विहिप के नेताओं की भी बोलती बंद है। भैय्या जी जोशी ने 2025 तक राम मंदिर बनकर तैयार हो जाने की घोषणा कर दी, लेकिन इस पर लोगों की प्रतिक्रिया ने संघ को नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। आरएसएस प्रमुख अपने बयानों से केन्द्र की भाजपा सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की टीम काल में तेल डालकर सोई हुई है।
ऐसे में संघ की दुविधा यह है कि वह करे तो क्या? अब 2019 तक राम तो मिलने से रहे, लेकिन राम को छोड़ भी नहीं सकता। मोदी सरकार और भाजपा का क्या करे? इससे तो संघ को काफी उम्मीदें थी और अब.....?
कस लो ईडी तुम भी शिकंजा
जब सरकार की एक एजेंसी चौकस होती है तो दूसरी को भी शिकार मिल जाता है। मामला यूपी का है। सीबीआई में आलोक वर्मा की वापसी के बाद सपा में थोड़ी जान आई थी, लेकिन वह 48 घंटे के भीतर हटा दिए गए। अब खबर है कि मनी लांडरिंग एक्ट के तहत ईडी यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, आईएस अधिकारी बी. चंद्रकला समेत 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहे हैं। एक नामी अखबार के नामी संपादक भी इसके घेरे में बताए जा रहे हैं।अखिलेश यादव भले ही राजनीतिक कार्रवाई बताएं, लेकिन उन्हें पता है कि एक बार मामला दर्ज हो जाने के बाद क्या होता है? गर्दन अपनी होती है और कसाव दूसरे का। लेकिन यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री करें भी तो क्या? इधर आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला हैं कि उनके शानदार कविताओं ने लोगों के होश उड़ा रखे हैं।
खबर तो यह भी मार्च के पहले तक लोकसभा चुनाव की घोषणा होनी है। इससे पहले ही अखिलेश यादव समेत अन्य को बुलाकर पूछताछ भी की जा सकती है। हो भी क्यों न। मोदी जी लगातार कह रहे हैं कि उन्होंने सरकार धन लूटने वालों पर निगाह रखनी शुरू की तो सब एकजुट होकर महागठबंधन बना रहे हैं।
किसकी बद्दुआ से जूझ रही है भाजपा
फिर संघ, प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के संबंधों में खिंचाव सा महसूस हो रहा है। यहां तक तो कुछ हद तक ठीक है। असल की चिंता टॉप लीडरशिप को लेकर है। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली अस्वस्थ हैं। इलाज के लिए अमेरिका गए हैं। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर...? भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को स्वाइन फ्लू, संगठन मंत्री राम लाल अस्वस्थ, रविशंकर प्रसाद की भी अचानक तबियत खराब हुई। पार्टी तब सन्न रह गई जब अचानक अनंत कुमार के बारे में खबर आई।
सुषमा स्वराज ने किडनी ट्रांसप्लांट कराने के बाद स्वास्थ्य कारणों से 2019 में लोकसभा चुनाव न लडऩे का ऐलान कर दिया है। यह सबकुछ तब हो रहा है, जब भाजपा 2019 में पानीपत जैसा विचारधारा वाला युद्ध लडऩे जा रही है। पार्टी के एक मार्ग दर्शक मंडल के सदस्य का कहना है कि जरूर कुछ गड़बड़ है। पार्टी को इसका उपाय करना चाहिए।
चारो तरफ तलवार नचाऊंगा
कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के यहां दावत पर पहुंचे। दावत में नव नियुक्त दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित मिल गई। आजाद ने बधाई दी और संदेश में कहा कि आपके पास साल भर का भी समय नहीं बचा है। शीला ने अपने अंदाज में बधाई कुबूल की। लेकिन शीला तो शीला हैं। उन्होंने तपाक से यूपी का जिक्र किया।वहां सपा-बसपा का गंठबंधन हो चुका है। शीला मुस्कराई, थोड़ा इंतजार किया और आजाद से कहा कि वह उन्हें एक तलवार देंगी। आजाद साहब को शीला की धार समझते देर न लगी। उन्होंने खुशी से तोहफा कुबूल करने में सहमति देते हुए कहा कि फिर तो वह यूपी में इसे सिख लड़ाकों की तरह चारों तरफ नचाएंगे। क्योंकि हमला तो चारों तरफ से होने की संभावना बन रही है। इसके बाद आप जानते हैं कि समय तो केवल ठहाकों का ही बचा रह जाता है।
जिंद में फंसे रणदीप बाबा
पानी पी पीकर मोदी सरकार को कोसने वाले कांग्रेस के चैंपियन प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला की आवाज कम सुनाई दे रही है। क्षेत्रीय नेता का चोला उतारकर बहुत कम समय में फेंक देने वाले रणदीप बाबा जिंद विधानसभा के उपचुनाव में फंस गए हैं। कांग्रेस पार्टी ने वहां से उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। जिंद में जाट बनाम अन्य का खेल शुरू हो गया है।रणदीप बाबा को हराने के लिए कांग्रेसी खेमे के कुछ नेता भी लग गए हैं। उमेश पंडित भी बदला ले रहे हैं। इतना ही नहीं इस जिंद बहादुर को धूल चटाने में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की भी काफी रुचि है। ऐसे में बयान वीर चैंपियन रणदीप ने लॉज बचाने के लिए जिंद को ही पूरा समय देने का मन बनाया है। दे भी रहे हैं। देखिए होता क्या है। उनके एक सिपहसालार का भी मानना है कि स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन फिर भी लडऩा तो बहादुरी से है।
यूपी में होगा कड़ा मुकाबला
यूपी में सपा-बसपा ने गठबंधन कर लिया है। रालोद भी गठबंधन की स्टेपनी बन गई है। दबाव बनाकर अनुप्रिया पटेल भी भाजपा से दो सीटें फिर लेने में कामयाब होती दिखाई दे रही हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह राज्य में सपा-बसपा गठबंधन के बाद मानकर चल रहे हैं कि कड़ा मुकाबला इन दोनों की संयुक्त ताकत से होना है। इधर कांग्रेस के पास चुनौती बड़ी है, संसाधन कम।
लिहाजा पार्टी ने बातचीत और तालमेल के सारे रास्ते खोल दिए हैं। यूपी महासचिव गुलाम नबी आजाद के अनुसार यह समय कुंडी खटकाने का नहीं है, अब जिसे आना हो सीधे चला आए। खबर है कि गुलाम नबी की यह गुजारिश समाजवादी पार्टी छोड़कर नई पार्टी बनाने वाले शिवपाल यादव ने सुन ली है।पीस पार्टी, कृष्णा पटेल समूह वाले अपना दल ने तालमेल बनाने की पहल शुरू कर दी है। ओम प्रकाश राजभर भी साथ आ सकते हैं। निषाद पार्टी को भी संभावना दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर इन सहयोगियों के सहारे कांग्रेस अपनी उम्मीद को मजबूती दे रही है।
गुलाम नबी और बब्बर शेर
राज बब्बर खुद को बब्बर शेर से कम नहीं समझते हैं। उ.प्र. के प्रभारी गुलाम नबी आजाद भी उन्हें बब्बर शेर ही मानते हैं। लेकिन आजाद का बब्बर शेर कुछ ज्यादा ही आजादी इंज्वॉय कर रहा है। यह आजादी गुलाम नबी को भी खल रही है, लेकिन दुविधा में हैं कि करे तो क्या?
दरअसल, गुलाम नबी के यूपी दौरे में लखनऊ पहुंचने के कुछ देर पहले ही बब्बर वहां पहुंच जाते हैं। सामना होते ही जाड़े में पसीना पोंछकर बताते हैं कि दो दिन पहले वह आ गए थे। काफी तूफानी होमवर्क किया है। बब्बर बताते हैं कि अब वह यहां कुछ समय रहकर पार्टी के कामकाज को धार देंगे।
इसके बाद मंत्रणा में जब आजाद कुछ जिम्मेदारियों का खाका तैयार करके उसे बब्बर के भरोसे छोड़कर दिल्ली के लिए निकलते हैं तो बब्बर भी मुंबई की उड़ान भर लेतेे हैं। अब नबी आजाद को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वह अपने बब्बर शेर का क्या करें? कैसे इसे यूपी के पिजड़े में बांधकर रखा जाए।