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Hindi News ›   India News ›   Jaishankar says India looking for partners, not preachers; highlights New Delhi's 'Russia realism'

S Jaishankar: 'भारत को उपदेशकों की नहीं, साझेदारों की जरूरत', रूस-यूक्रेन युद्ध पर जयशंकर की पश्चिम को लताड़

Sun, 04 May 2025 07:41 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 04 May 2025 07:41 PM IST
सार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत को उपदेश देने वालों की नहीं, साझेदारों की जरूरत है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर उन्होंने कहा कि युद्ध का हल तभी निकलेगा जब रूस को बातचीत में शामिल किया जाएगा।

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Jaishankar says India looking for partners, not preachers; highlights New Delhi's 'Russia realism'
एस जयशंकर - फोटो : एक्स/डॉ. एस जयशंकर

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत को उपदेश देने वालों की नहीं, बल्कि साझेदारों की आवश्यकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर उनका इशारा यूरोप की तरफ था। उन्होंने रूस के साथ भारत के व्यावहारिक संबंधों पर बात की। 

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एक संवाद कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि यूरोप को अब हकीकत का अहसास हो रहा है और अगर वह भारत से मजबूत संबंध चाहता है, तो उसे आपसी सम्मान और साझा हितों की भावना से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा, 'भारत और रूस के बीच एक तालमेल है। रूस संसाधन देता है और भारत उसका उपभोक्ता है। रूस के साथ भारत के मजबूत संबंध राष्ट्रहित पर आधारित हैं, इसलिए भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा, भले ही पश्चिमी देश इसकी आलोचना करते रहे।'
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रूस-यूक्रेन युद्ध पर पश्चिमी देशों के विचार की आलोचना
जयशंकर ने पश्चिमी देशों के उस विचार की भी आलोचना की, जिसमें वे रूस को वार्ता से बाहर रखकर यूक्रेन युद्ध का हल ढूंढना चाहते हैं। उन्होंने कहा, यह पूरी तरह से वास्तविकता से परे है। उन्होंने कहा, 'मैं जैसे रूसी यथार्थवाद का समर्थक हूं, वैसे ही अमेरिकी यथार्थवाद का भी समर्थक हूं।' इसका मतलब यह है कि भारत अमेरिका के साथ उस बुनियाद पर संबंध चाहता है, जहां विचाराधारा के मतभेदों को पीछे रखकर साझा हितों पर फोकस किया जाए। 

Jaishankar says India looking for partners, not preachers; highlights New Delhi's 'Russia realism'
एस जयशंकर। - फोटो : एक्स/डॉ. एस जयशंकर

'अपने देश में पालन नहीं करते, हमें ज्ञान बांटते हैं..'
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत किसी (देश) को यह नहीं बताया कि उसे क्या करना चाहिए और यही शिष्टाचार भारत के साथ भी होना चाहिए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, पश्चिम अक्सर भारत को सलाह देता है। जयशंकर से जब पूछा गया कि यूरोप से भारत की क्या अपेक्षा है, तो उन्होंने कहा, हमें साझेदारों की जरूरत है, उपदेशकों की नहीं। खासकर ऐसे उपदेशक जो अपने देश में पालन नहीं करते, लेकिन बाहर ज्ञान बांटते हैं। 

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'मजबूत संबंध के लिए आपसी हितों की भावना जरूरी'
उन्होंने कहा, यूरोप अब वास्तविकता की जमीन पर उतर रहा है। कुछ देश इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और कुछ अभी भी पीछे हैं। अगर भारत को यूरोप के साथ मजबूत साझेदारी बनानी है, तो समझदारी, संवेदनशीलता और आपसी हितों की भावना जरूरी है। रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने इस बात को दोहराया कि भारत किसी पक्ष के साथ नहीं है। लेकिन युद्ध का समाधान तभी निकलेगा, जब रूस को वार्ता में शामिल किया जाए। जयशंकर ने कहा कि दुनिया आज आपस में जुड़ी हुई है और कोई भी युद्ध सभी के लिए नुकसान लेकर आता है। इसलिए भारत ने हमेशा बातचीत और यथार्थवादी (हकीकत वाले) दृष्टिकोण को अपनाया है। 
 
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