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क्या उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के लिए लॉकडाउन का अर्थ कुछ अलग है?

Mon, 20 Apr 2020 08:12 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 20 Apr 2020 08:12 PM IST
सार

  • राज्यों और केन्द्र के बीच तालमेल में कमी, भेदभाव के उठ रहे मसले
  • गुजरात 1800 लोगों को हरिद्वार से ले आया
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आनंद विहार और कोटा बसें भेजीं
  • मध्य प्रदेश भी बसों का इंतजाम कर कोटा से छात्रों को ला रहा है  
  • अन्य राज्यों ने भी की है केन्द्र से मांग
  • केरल में लॉकडाउन में ढील पर केन्द्र ने दी चेतावनी

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is there is any difference of lockdown for Uttar pradesh, gujarat and madhya pradesh
लॉकडाउन - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

केन्द्र सरकार के लॉकडाउन का पालन करने में कई राज्य आनाकानी कर रहे हैं, तो कुछ राज्यों ने केंद्र सरकार से भी सख्त रवैया अपना लिया है। लॉकडाउन 2.0 की घोषणा सबसे पहले ओडिशा ने की और इसके बाद पंजाब समेत दो राज्यों ने कर डाली।
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केंद्र सरकार जहां लॉकडाउन 2.0 के पालन की गाइडलाइन जारी कर रही है, वहीं केरल ने अपने यहां होटल, रेस्टोरेंट समेत कई कामकाज के क्षेत्र को खोलने का फैसला कर लिया। इसके बाबत केंद्र सरकार को एडवाइजरी भेजते हुए सख्त हिदायत देने की नौबत आ गई। क्या केंद्र और राज्य के बीच में तालमेल का अभाव है?

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इस बारे में उत्तर भारत के एक प्रमुख राज्य की सुनिए। राज्य ने अनेक अहम पदों पर रहे एक पूर्व नौकरशाह को अपना सलाहकार बनाया है। उनका कहना है केन्द्र को बिना भेदभाव के कोविड-19 के संक्रमण का फैलाव रोकने का काम करना चाहिए।

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भेदभाव से बचना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। केन्द्र सरकार राज्यों के बीच में भी भेदभाव कर रही है। इस स्थिति में राज्य हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते। कोविड-19 के खतरे से नागरिकों को बचाना हर राज्य की जिम्मेदारी है।

इसलिए राज्य अपने हिसाब से कदम उठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। सूत्र का कहना है कि देश के संघीय ढांचे में राज्य की आमदनी का स्रोत देख लीजिए। बड़ा हिस्सा केन्द्र सरकार से आता है और वह रुका हुआ है। जीएसटी का राज्यों को बकाया नहीं मिल पा रहा है। कुछ राज्यों के लिए कुछ नियम हैं और कुछ के लिए अलग।

क्या कुछ राज्यों के साथ भेदभाव हो रहा है

गैरभाजपाई राज्य के एक मुख्यमंत्री का कहना है कि हमने प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग में कुछ मुद्दे उठाए थे। बात रखी थी। उनमें से कुछ का समाधान हुआ है, कुछ बचे हैं। हमारे पास अभी भी संक्रमण की जांच के संसाधनों का अभाव है।

हमनें इस संदर्भ में केन्द्र से सहयोग मांगा है। यह पूछने पर कि क्या केन्द्र राज्यों के साथ भेदभाव कर रहा है,  मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे पास इस तरह का कोई प्रमाण नहीं है। वैसे भी यह समय आरोप-प्रत्यारोप के लिए नहीं है।

वह केवल इतना कह सकते हैं कि राज्य इस संकट की घड़ी में केन्द्र के साथ हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पंजाब के मुख्यमंत्री के कैप्टन पहले ही कह चुके हैं कि राज्य बिना केन्द्र के सहयोग के कोविड-19 जैसी महामारी का मुकाबला नहीं कर सकते।

लॉकडाउन में गुजरात के लोग क्यों गए

एक प्रमुख पार्टी के राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता का कहना है कि लॉकडाउन 1.0 के दौरान गुजरात के 1800 लोग बस से हरिद्वार से गुजरात ले जाए गए। सूत्र का कहना है कि उन्हें जानकारी है कि इसके लिए केन्द्र सरकार के स्तर से लॉकडाउन में ढील उपलब्ध कराई गई।

यह ढील गुजरात के मुख्यमंत्री की पहल पर दी गई। जबकि अनेक राज्यों के तमाम लोग 23 मार्च के बाद से कई राज्यों में फंसे हैं लेकिन उनको लेकर कुछ नहीं हो पा रहा है। इसी तरह से मार्च के आखिरी सप्ताह में दिल्ली में आनंनद विहार बस अड्डे पर गरीब, मजदूरों के इकट्ठा होने के बाद सबसे पहले बसें भेजने की घोषणा उ.प्र. के मुख्यमंत्री ने ही की थी।

उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश भी वापस ला रहा है छात्र

मध्य प्रदेश सरकार ने 100 बसों का इंतजाम करके राजस्थान के कोटा से छात्रों को मंगाने का निर्णय लिया है। इससे पहले उत्तर प्रदेश ने यह कदम उठाया। बिहार के एक भाजपा विधायक ने अपने परिवार के छात्र को कोटा से मंगाने के लिए रसूख का इस्तेमाल किया।

इसे लेकर बिहार के जद (यू) के पूर्व उपाध्यक्ष और चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुटकी ली है। जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने राज्य के  छात्रों को झारखंड लाने की पहल तेज कर दी है।

राजस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार पर इस तरह का दबाव तेज हो गया है। इस बारे में केंद्रीय सचिवालय के एक एडिशनल सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी का कहना है कि इस तरह की कोशिश ठीक नहीं है।

जब एक राज्य के लोगों को जाने की छूट दी जाएगी, तो दूसरे राज्य के लोग भी इस तरह की सुविधा चाहेंगे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी कह रहे हैं कि उनपर भी अपने प्रदेश के छात्रों को कोटा से वापस लाने का दबाव पड़ रहा है।

राज्यों ने बढ़ाया लोगों को लाने का दबाव

केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि कई राज्य इस बात का आग्रह कर रहे हैं हैं कि गरीब, मजदूर, छात्र या पर्यटन के इरादे से जाकर दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को लाने की छूट मिले।

दिल्ली सरकार के पास भी लोगों के इस तरह के आवेदन आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के पास भी लोग अपने विधायकों, सांसदों के माध्यम से संपर्क कर रहे हैं। बिहार में राजद के नेता तेजस्वी यादव ने इसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है।

केन्द्रीय गृहमंत्रालय के निदेशक स्तर के एक अधिकारी ने कहा कि दबाव की स्थिति और आवश्यकता को देखते हुए ही अभी गरीबों, मजदूरों को राज्य के भीतर आने-जाने की छूट दी गई है। कुल मिलाकर उद्देश्य कोविड-19 के संक्रमण को रोकना है। यह बिना राज्यों और लोगों के सहयोग के संभव नहीं है।

केरल के कदम से गृह मंत्रालय हुआ खफा तो बदली गाइडलाइन

केरल में कोविड-19 का संक्रमण करीब-करीब काबू में है। इसलिए केरल ने लॉकडाउन में ढील का निर्णय लिया। इस पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई। केरल सरकार के अधिकारियों का कहना था, हमने फैसला सोच-समझकर लिया था।

केरल में लॉकडाउन खीचने पर आर्थिक नुकसान ही बढ़ेगा। इसलिए राज्य सरकार इस तरह का कदम उठाया। लेकिन केन्द्र के कहने पर गाइडलाइन संशोधिक की गई है।

केरल में कोविड-19 काबू में

केरल में वुहान से कोविड-19 का संक्रमित छात्र जनवरी में लौटा था।  कोविड का पहला संक्रमित आने से काफी पहले केरल ने संक्रमण को रोकने, इलाज के उपायों पर पहल तेज कर दी थी। केरल में 20 अप्रैल तक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वहां 77 विदेशी सहित 402 संक्रमित अब तक मिले हैं।

270 को ठीक किया जा चुका है और केवल तीन मरीजों की मृत्यु हुई है। केरल स्वास्थ्य विभाग निदेशालय के कल शाम के आंकड़े के अनुसार 129 संक्रमितों का केरल में इलाज चल रहा है। कुल 402 पॉजिटिव मरीज हैं।

55, 590 लोगों की निगरानी की जा रही है। 55,129 लोग आइसोलेशन (कोविड केयर) में हैं। अस्पतालों में 461 लोग निगरानी में हैं। 72 लोगों को 19 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती किया गया था। केरल स्वास्थ्य विभाग निदेशालय का कहना है कि यहां अब कोई विशेष चिंता की बात नहीं रह गई है।



इसलिए केरल सरकार ने ऑड-इवेन फार्मूले पर टैक्सी चलाने, रेस्टोरेंट आदि चलाने की अनुमति देने समेत कई निर्णय लिए थे। लेकिन हमारी सीमाएं दूसरे राज्यों के लोगों की आवाजाही के लिए अभी नहीं खुली हैं।

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