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Terror attack: सेना पर हमलों के पीछे क्या इंटेलिजेंस फेल्योर है जिम्मेदार? अमेरिकी हथियारों से क्यों है डर?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 27 Apr 2023 06:49 PM IST
सार

Terror attack: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, 20 अप्रैल को पुंछ में शहीद हुए भारतीय सेना के पांच जवानों हवलदार मनदीप सिंह, लांस नायक कुलवंत सिंह, लांस नायक देबाशीष, सिपाही हरकिशन सिंह और सिपाही सेवक सिंह की अंत्येष्टि पर कोई भी केंद्रीय मंत्री नहीं पहुंचा। कांग्रेस नेता ने सवाल किया, देश में लोकसभा चुनाव नहीं हैं, क्या इसलिए?

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Is intelligence failure responsible for terror attacks on army camps? congress asked questions to modi govt
Terror attack: पुंछ में आतंकी हमले के बाद जांच करते सुरक्षाबल - फोटो : संवाद

विस्तार

देश के विभिन्न हिस्सों में सैन्य शिविरों पर हो रहे आतंकी हमलों के लिए क्या इंटेलिजेंस फेल्योर जिम्मेदार है। आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी की सच्चाई क्या है। अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो के दूसरे सहयोगी देशों के सैनिकों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियार, अब अफगान डीलरों के हाथ लग रहे हैं। संभव है कि हथियारों और गोला बारूद के उस जखीरे में से कुछ राइफल व गोलियां, पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के जरिए जम्मू-कश्मीर में पहुंच रही हों। पिछले दिनों पुंछ में हुए आतंकी हमले में भारतीय सैनिकों पर स्टील की बुलेट इस्तेमाल की गई हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने गुरुवार को ये सवाल उठाए हैं।

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सेना के पांच जवानों की अंत्येष्टि पर नहीं पहुंचे केंद्रीय मंत्री

खेड़ा ने कहा, 20 अप्रैल को पुंछ में शहीद हुए भारतीय सेना के पांच जवानों हवलदार मनदीप सिंह, लांस नायक कुलवंत सिंह, लांस नायक देबाशीष, सिपाही हरकिशन सिंह और सिपाही सेवक सिंह की अंत्येष्टि पर कोई भी केंद्रीय मंत्री नहीं पहुंचा। कांग्रेस नेता ने सवाल किया, देश में लोकसभा चुनाव नहीं हैं, क्या इसलिए। पवन खेड़ा ने कहा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, आतंकवाद से लड़ने में राष्ट्र के साथ एकजुट हैं। हालांकि केंद्र सरकार को कुछ सवालों का जवाब देना चाहिए। पुंछ आतंकी हमले पर केंद्र सरकार चुप क्यों है। क्या यह सच नहीं है कि हमारे सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर कम से कम 18 बड़े आतंकी हमले हुए हैं। इनमें सीआरपीएफ कैंप, आर्मी कैंप, वायुसेना स्टेशन और सैन्य स्टेशन शामिल हैं। पुलवामा, पंपोर, उरी, पठानकोट, गुरदासपुर, अमरनाथ यात्रा हमला और सुंजवान सेना शिविर आदि जगहों पर हमारे सैकड़ों जवानों ने बलिदान दिया है। इससे केंद्र सरकार की आतंकियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति की सच्चाई उजागर होती है।

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अच्छे अफसर हैं, मगर सरकार की प्राथमिकता कुछ और... 

कांग्रेस नेता ने कहा, केंद्र सरकार ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। जम्मू-कश्मीर में 1,249 आतंकी हमले हुए हैं। इनमें 350 नागरिक मारे गए, जबकि 569 जवान शहीद हुए हैं। आमने-सामने की लड़ाई में हमारे जवान दुश्मन के घुटने टिका देते हैं। दुनिया ने कई बार हमारे जवानों की बहादुरी देखी है। 1971 की लड़ाई हो या 1999 का कारगिल युद्ध हो, भारतीय सेना ने दुश्मन को पछाड़ा है। जब पीठ पीछे हमला हो तो उसमें जवान क्या करेगा। यह तो इंटेलिजेंस फेल्योर होने के कारण होता है। इंटेलिजेंस विंग में अनेक अच्छे अफसर हैं, लेकिन सरकार की प्राथमिकता कुछ और है। इस स्थिति में हमलों को कैसे रोका जाएगा। इंटेलिजेंस का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है। सरकार की थ्योरी है कि तुम चुप रहो, तुम्हें राज्यपाल बना देंगे।

अमेरिका के हथियारों को बेचेगा तालिबान

बतौर पवन खेड़ा, तालिबान अपने राजस्व प्रवाह को बढ़ाने के लिए अफगानिस्तान में नाटो के जितने भी हथियार बचें हैं, उनके एक हिस्से को बेच रहा है। वैकल्पिक रूप से, तालिबान का पूरे शस्त्रागार पर नियंत्रण नहीं हो सकता है। इसका मतलब, हथियार और दूसरे उपकरण तस्करों या बंदूक डीलरों द्वारा चुराए या तस्कर किये जा सकते हैं। उन्हें खुले बाजार में बेचा जा सकता है। अमेरिका निर्मित पिस्तौल, राइफल, ग्रेनेड, दूरबीन और नाइट विजन चश्मे सहित अमेरिकी निर्मित उपकरण, अफगान बंदूक डीलरों के हाथों में पहुंच गए हैं। अतीत में कवच भेदी गोलियों की कई घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन मोदी सरकार ने उससे कोई सबक नहीं सीखा।

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पहली बार 2017 में हुआ था स्टील बुलेट का इस्तेमाल

पहली बार कश्मीर में दिसंबर 2017 में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने लेथापोरा में सीआरपीएफ शिविर पर आत्मघाती हमले में स्टील की गोलियों का इस्तेमाल किया था। जून 2019 में अनंतनाग में सीआरपीएफ जवानों पर हमले में आतंकवादियों द्वारा कवच भेदी गोलियों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद 03 अप्रैल, 2019 को सांबा से चार चीनी ग्रेनेड और तीन पिस्तौल जब्त किए गए। इन्हें पाकिस्तान की तरफ से एक ड्रोन द्वारा गिराया गया था। 07 जनवरी 2019 को बालाकोट सेक्टर में मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से मैगजीन के साथ एक चीन निर्मित पिस्टल और पांच राउंड और दो चाइनीज हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए थे। 24 दिसंबर 2022 को सेना ने उरी सेक्टर में 12 चीनी पिस्तौल और नौ चीन निर्मित हथगोले बरामद किए थे।

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