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इराक : पति ने तब फोन पर कहा था कि आखिरी फोन है

Wed, 21 Mar 2018 03:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 21 Mar 2018 03:52 PM IST
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iraq : when husband said that this is last call on phone

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का संसद में दिया गया बयान पंजाब के संगरूर जिले के धुरी शहर में सदमे की तरह पहुंचा है। जब हमने प्रीतपाल शर्मा के घर का रास्ता पूछा तो जवाबी सवाल आया, 'जिनके यहां मौत हुई है?' ये मौत तो शायद तीन साल पहले हो गई थी पर इसकी पुष्टि, इतने समय से मौत के ना होने का यकीन दिलाने वाली विदेश मंत्री ने अभी की है। प्रीतपाल शर्मा के घर को जाने वाली 12 फुट की गली कच्ची-पक्की है और आबादी निम्न मध्य वर्गीय है। खबर शहर में फैल गई है और पत्रकारों के आने का अंदाजा प्रीतपाल शर्मा के बेटे नीरज शर्मा को पहले से है। घर के अंदर सभी लोग टेलीविजन पर खबरें सुन रहें है। प्रीतपाल शर्मा की पत्नी राज रानी लगातार रो रही हैं जब कि नीरज अपने आंसुओं को रोकने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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एजेंट की मदद से गए थे इराक

प्रीतपाल शर्मा की बेटी कालेज गई है और अभी घर के इस माहौल से नावाकिफ हैं। हर चेहरा उदास है। राज रानी कुछ समय बाद बात करने का हौसला करती हैं। वो बताती हैं, "मेरे पति बिजली का काम करते थे। घर की हालत अच्छी नहीं थी। जब हमें एक एजेंट से पता चला तो 2011 में दो लाख रुपए लगा कर वो इराक गए थे।" इराक जाने के बाद प्रीतपाल शर्मा 2014 तक पैसे भेजते रहे पर 2014 में उन्हें इराक के मूसल शहर में इस्लामिक स्टेट ने बंदी बना लिया। बंदी बनाए जाने के बाद उनका आखिरी बार फोन आया था। राज रानी को वह फोन अभी भी याद है, "उन्होंने कहा था कि शायद यह उनका आखिरी फोन हो, और यही हुआ।" उनका गला भर आया है और वह कुछ देर बाद अपनी चुप्पी तोड़ती हैं, "उन्हें एक फैक्ट्री में रखा गया था।"
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पढ़ाई छूट गई...

उन्हें इस फोन के बाद लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। इस दौर में उनका तकरीबन डेढ़ लाख रुपया खर्च हुआ। अब राज रानी को लगता है, "सरकार को पता था तो हमें धोखे में नहीं रखना चाहिए था। हम इतना परेशान न होते।" आखिरी शब्द बोलते हुए उनका गला भर जाता है। ये अंदाजा होना मुश्किल हो जाता है कि वह पहले की परेशानी की बात कर रही हैं या आने वाले समय की बात कर रहीं हैं। नीरज बताते हैं कि जब उनके पिता इराक गए तो वे पढ़ाई कर रहे थे, "डैडी के लापता हो जाने के बाद मेरी पढ़ाई छूट गई और मैं मजदूरी करता हूं क्योंकि घर चलाना मेरी जिम्मेदारी है।" नीरज अपनी बात करते-करते उन तमाम 39 लोगों की बात करने लगतें हैं जिन्हें मृत करार दिया गया है।
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डीएनए के नमूने

नीरज कहते हैं, "सब के डैडी गए हैं। कई के भाई भी गए हैं। हम सभी के डैडी कमाई करने गए थे। अब हमारा गुजारा मुश्किल हो गया है।" नीरज मांग करते हैं कि अगर नौकरी मिल जाए हो उनका गुजारा आसान हो सकता है। इस परिवार का दुःख बांटने स्थानीय नायब तहसीलदार करमजीत सिंह पहुंचे हैं, जिन्होंने प्रीतपाल शर्मा की मृत्यु की पुष्टि करने के लिए डीएनए के नमूने इराक भेजे थे।


उनका कहना है, "परिवार की मांग पर हम इराक से अस्थियां लाने का प्रयास कर रहें हैं। परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की सिफारिश की जा रही है।" अभी तक प्रीतपाल शर्मा की बेटी दीक्षा शर्मा कालेज से नहीं लौटी हैं। घर वालों को ये खबर दीक्षा को सुनाने की जल्दी नहीं है पर ये खबर देने में देरी करने वाली विदेश मंत्री से उनकी नाराजगी हर बात में उमड़ पड़ती है।

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