{"_id":"68bae047dd485e9e470406a0","slug":"indo-gangetic-plains-fog-episodes-more-intense-frequent-world-meteorological-organization-rise-air-pollution-2025-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Weather Alert: धुंध से ढक जाएगा उत्तर भारत! प्रदूषण का खतरा बढ़ा, समझें विश्व मौसम संगठन की चेतावनी के मायने","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Weather Alert: धुंध से ढक जाएगा उत्तर भारत! प्रदूषण का खतरा बढ़ा, समझें विश्व मौसम संगठन की चेतावनी के मायने
Fri, 05 Sep 2025 06:36 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 05 Sep 2025 06:36 PM IST
सार
विश्व मौसम संगठन ने चेताया है कि गंगा के मैदानों में सर्दियों के दौरान धुंध के मामले पहले से ज्यादा घने और लंबे हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषण, वाहनों का धुआं, फसल जलाना और ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं इसके प्रमुख कारण हैं। घनी धुंध न केवल परिवहन पर असर डालती है बल्कि दमा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ाती है।
विज्ञापन
धुंध।
- फोटो : संवाद
विस्तार
विश्व मौसम संगठन ने चेतावनी दी है कि सिंधु-गंगा के मैदान यानि गंगा के मैदानी इलाके में धुंध के मामले लगातार गंभीर और बार-बार सामने आ रहे हैं। उत्तर भारत में गंगा का यह इलाका है। यहां करीब 90 करोड़ लोग रहते हैं और अब प्रदूषण व मौसम के बदलावों की वजह से सर्दियों में धुंध का असर और खतरनाक हो गया है। संगठन ने कहा है कि यह समस्या मानवीय गतिविधियों और पर्यावरणीय बदलाव से जुड़ी है।'
मौसम संगठन ने बताया कि धुंध तब बनती है जब जमीन के पास की हवा ठंडी होकर नमी से मिलती है और छोटे-छोटे कणों पर जमकर पानी की बूंदें बनाती है। वाहनों का धुआं, उद्योगों से निकलने वाली गैसें, फसल अवशेष जलाना और बायोमास जलाने जैसी गतिविधियां इन कणों को बढ़ाती हैं। यही कारण है कि धुंध ज्यादा घनी और लंबे समय तक बनी रहती है।
तापमान उलटाव और प्रदूषण की परत
सर्दियों में तापमान उलटाव यानि टेम्परेचर इनवर्जन होता है, जिसमें ठंडी हवा गर्म हवा की परत के नीचे फंस जाती है। इस कारण प्रदूषण और धुंध नीचे ही अटक जाती है। शहरी इलाकों के तेजी से फैलने और शहरी गर्मी द्वीप (अर्बन हीट आइलैंड) बनने से स्थानीय मौसम भी बदल रहा है, जिससे धुंध का असर और अधिक होता है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- केंद्रीय एजेंसी से जांच की बात पर कन्नी काट गए सिद्धारमैया, बोले-क्या NIA के लोग पुलिस हैं?
ईंट भट्ठे और पराली जलाना भी शामिल
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट में कहा गया कि पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष जलाना यानि पराली जलाना भी धुंध का बड़ा कारण है। इसके अलावा ईंट भट्ठों में घटिया कोयले और पुराने तरीकों का इस्तेमाल प्रदूषण को बढ़ाता है। उपग्रह आंकड़े दिखाते हैं कि इन महीनों में एरोसोल की मात्रा तेजी से बढ़ती है, जिससे पूरे ईजीपी क्षेत्र में धुंध गहरी हो जाती है।
धुंध के स्वास्थ्य और परिवहन पर असर
घनी धुंध से परिवहन बुरी तरह प्रभावित होता है। इससे सड़क हादसे और उड़ानों में देरी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। डब्ल्यूएमओ ने चेताया कि धुंध में जहरीली धातुएं और ऑर्गेनिक कंपाउंड्स मौजूद रहते हैं, जो दमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देते हैं। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
ये भी पढ़ें- ट्रंप के करीबी पीटर नवारो के बयान पर भारत का पलटवार, विदेश मंत्रालय ने उनके दावों को बताया गलत और भ्रामक
सिंधु-गंगा के मैदान यानि उत्तरी भारत के ज्यादातर इलाके में धुंध अब केवल मौसमी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि प्रदूषण और मानव गतिविधियों की वजह से यह एक बड़ा संकट बन गई है। विश्व मौसम संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में धुंध और भी गंभीर खतरा साबित हो सकती है।
विज्ञापन
मौसम संगठन ने बताया कि धुंध तब बनती है जब जमीन के पास की हवा ठंडी होकर नमी से मिलती है और छोटे-छोटे कणों पर जमकर पानी की बूंदें बनाती है। वाहनों का धुआं, उद्योगों से निकलने वाली गैसें, फसल अवशेष जलाना और बायोमास जलाने जैसी गतिविधियां इन कणों को बढ़ाती हैं। यही कारण है कि धुंध ज्यादा घनी और लंबे समय तक बनी रहती है।
विज्ञापन
तापमान उलटाव और प्रदूषण की परत
सर्दियों में तापमान उलटाव यानि टेम्परेचर इनवर्जन होता है, जिसमें ठंडी हवा गर्म हवा की परत के नीचे फंस जाती है। इस कारण प्रदूषण और धुंध नीचे ही अटक जाती है। शहरी इलाकों के तेजी से फैलने और शहरी गर्मी द्वीप (अर्बन हीट आइलैंड) बनने से स्थानीय मौसम भी बदल रहा है, जिससे धुंध का असर और अधिक होता है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- केंद्रीय एजेंसी से जांच की बात पर कन्नी काट गए सिद्धारमैया, बोले-क्या NIA के लोग पुलिस हैं?
ईंट भट्ठे और पराली जलाना भी शामिल
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट में कहा गया कि पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष जलाना यानि पराली जलाना भी धुंध का बड़ा कारण है। इसके अलावा ईंट भट्ठों में घटिया कोयले और पुराने तरीकों का इस्तेमाल प्रदूषण को बढ़ाता है। उपग्रह आंकड़े दिखाते हैं कि इन महीनों में एरोसोल की मात्रा तेजी से बढ़ती है, जिससे पूरे ईजीपी क्षेत्र में धुंध गहरी हो जाती है।
धुंध के स्वास्थ्य और परिवहन पर असर
घनी धुंध से परिवहन बुरी तरह प्रभावित होता है। इससे सड़क हादसे और उड़ानों में देरी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। डब्ल्यूएमओ ने चेताया कि धुंध में जहरीली धातुएं और ऑर्गेनिक कंपाउंड्स मौजूद रहते हैं, जो दमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देते हैं। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
ये भी पढ़ें- ट्रंप के करीबी पीटर नवारो के बयान पर भारत का पलटवार, विदेश मंत्रालय ने उनके दावों को बताया गलत और भ्रामक
सिंधु-गंगा के मैदान यानि उत्तरी भारत के ज्यादातर इलाके में धुंध अब केवल मौसमी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि प्रदूषण और मानव गतिविधियों की वजह से यह एक बड़ा संकट बन गई है। विश्व मौसम संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में धुंध और भी गंभीर खतरा साबित हो सकती है।