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मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने का दावा, मौत का आंकड़ा हुआ 65 से 3

Sun, 03 Feb 2019 09:21 AM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अजय सिंह Updated Sun, 03 Feb 2019 09:21 AM IST
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Indian railways did away 11 unmanned level crossings every day
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग के कारण होने वाले हादसों की संख्या अब पहले से काफी कम हो गई है। बीते दस महीनों में अपनी हजारों मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग में प्रति दिन 11 को रेलवे खत्म किया है। ये खतरा पहले से कहीं गुना कम हुआ है। 


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इसके उपायों में रेलवे क्रॉसिंग डाइवर्जन रोड बनाकर अन्य क्रॉसिंग से मर्ज किया जाता है, रेल अंडर ब्रिज या सबवे बनाए जाते है या फिर लोगों की तैनाती की जाती है। रेल हादसों का मुख्य कारण रहीं मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को पूरी तरह खत्म करने का दावा इस साल की शुरुआत में सरकार ने कर दिया था। एक क्रॉसिंग इलाहाबाद मंडल में बची थी। इसे भी गुरुवार को खत्म कर दिया गया।

बीते साल अप्रैल में हुए कुशीनगर हादसे के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सभी मानवरहित क्रॉसिंग को खत्म करने की समय सीमा 2020 से घटाकर सितंबर, 2019 तय कर दी थी। स्थानीय लोगों के प्रतिरोध के कारण इलाहाबाद मंडल में बची मानवरहित क्रॉसिंग को खत्म किया गया।

रेल मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार 16 अप्रैल, 2018 को उत्तर प्रदेश में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर हुए हादसे का शिकार एक स्कूल वैन भी हो गई थी। इस हादसे में 13 लोगों की जान गई थी। जिसके बाद सरकार के लिए इन क्रॉसिंग को जल्द से जल्द खत्म करना जरूरी हो गया।

मंत्रालय ने संसद में कहा है कि इस तरह की क्रॉसिंग मार्च 2020 तक अतीत बन जाएंगी। इस दौरान होने वाली मौत के आंकड़ों में भी कमी आई है। 2009-10 में ऐसे हादसो में 65 लोगों की मौत हुई थी। अब 2018-19 में मौत का आंकड़ा 3 रह गया है। ऑपरेटिंग गेट्स और इंटर लॉकिंग सिस्टम से इस दिशा में सफलता मिली है।

जानकारी के लिए बता दें 2014-15 में मानवरहित क्रॉसिंग के कारण होने वाली विभिन्न घटनाओं में 130 लोगों की जान गई थी। 2015-16 में 40 लोगों की मौत हुई। 2017-2018 में 26 लोगों को ऐसी फाटकों के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी, 1 अप्रैल 2018 से 15 दिसंबर 2018 तक 16 लोग मारे गए, उनमें 13 लोग कुशीनगर हादसे में मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे। शुक्रवार को भी पीयूष गोयल ने कहा था कि मंत्रालय के लिए लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना सबसे अहम है।

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