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नेहरू की विदेश नीति पर अब दिखेगी पटेल की छाप, सरकार ने बनाया ये प्लान 

Thu, 04 Jul 2019 10:58 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 04 Jul 2019 10:58 AM IST
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Indian foreign policy now might have impression of Sardar Patel idealism, government make plan
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

भारत की विदेश नीति पर नेहरू और उनकी विचारधारा की छाप दिखाई देती है। मगर अब सरकार सरदार पटेल की विरासत को आगे ले जाना चाहती है। अब विदेश सेवा के उच्चाधिकारी 'भारत के बिस्मार्क' कहे जाने वाले पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए नजर आएंगे। इसके लिए नर्मदा के तट पर बनी सरदार पटेल की मूर्ति के पास पहली बार विदेश मंत्रालय के वार्षिक प्रमुख मिशनों की कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। 

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पहले यह कांफ्रेंस लोकसभा चुनाव की वजह से टाल दी गई थी। अब सितंबर में इसका आयोजन होगा। इस कांफ्रेंस में सभी भारतीय राजदूत और उच्चायोग शिरकत करेंगे। इसका मकसद विदेशों में भारतीय हितों को साधना है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कांफ्रेस के लिए विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति के पास एक टेंट सिटी बनाई जाएगी। इस कांफ्रेंस का उद्घाटन विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसको संबोधित करेंगे।
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इस साल की कांफ्रेंस में ट्रंप प्रशासन के अप्रत्याशित रवैये के बीच अमेरिका के साथ भारत के व्यापार मसले, चीन और रूस के साथ रिश्ते, आतंकवाद पर सरकार की स्थिति के लिए समर्थन जुटाने, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ाने, कांसुलर और प्रवासियों के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
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दिल्ली की बजाए गुजरात में कांफ्रेस होना जहां कुछ लोगों को हैरानी वाला कदम लग रहा है। वहीं जो लोग मोदी और शाह को करीब से देख रहे हैं वह जानते हैं कि इसमें कुछ नया नहीं है क्योंकि दोनों नेता नेहरू द्वारा पटेल के साथ किए गए अन्याय के बारे में बात करते रहते हैं।


पिछले हफ्ते राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह तथ्य सभी को मालूम है कि यदि सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री बनते तो हमें जम्मू-कश्मीर में समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से अनुरोध किया था कि उन्हें पटेल को श्रद्धांजलि देने के लिए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जाना चाहिए। वहीं दो दिन बाद राज्यसभा में अमित शाह ने पाक अधिकृत कश्मीर के निर्माण के लिए नेहरू को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि यदि नेहरू पटेल को विश्वास में लेते तो राज्य की स्थिति इस हद तक नहीं बिगड़ती।

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