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रक्षा समझौतों की समीक्षा करेंगे भारत-अमेरिका, तकनीकी साझेदारी होगा अहम मुद्दा
Fri, 25 Oct 2019 09:40 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Fri, 25 Oct 2019 09:40 AM IST
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भारत और अमेरिका रक्षा प्रौद्योगिकी को बड़े स्तर पर साझा करने की योजना बना रहे हैं। इसमें स्टार्टअप पर ध्यान केंद्रित करने, प्रौद्योगिकी निर्यात के लिए तीसरे देशों की पहचान करने और व्यावहारिक उद्योग साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करने सहित कई मुद्दों पर बात होगी।
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साल 2012 में भारत और अमेरिका के बीच भारत-यूएस प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल' (डीटीटीआई) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसका मुख्य उद्देश्य खोज और रक्षा बलों के लिए प्रमुख संयुक्त विकास और विनिर्माण परियोजनाओं को बढ़ावा देना था लेकिन इसका कोई बड़ा परिणाम नहीं निकला।
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इस महत्वाकांक्षी समझौते के तहत प्लान किया गया था कि दोनों राष्ट्र जेट इंजन प्रौद्योगिकी को साझा करेंगे। यह एक ऐसी पहल थी जो अमेरिका में निर्यात प्रतिबंधित कानून के लागू होने से पूरी नहीं हो सकी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तत्कालीन अमेरिकी सरकार प्रौद्योगिकी निर्यात के पक्ष में नहीं थी। इस कारण भारत की तरफ से भी व्यापार मामले में गर्मजोशी देखने को नहीं मिली थी।
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सूत्रों ने बताया कि इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच अगली मुलाकात नई दिल्ली में की जाएगी, जिसमें अमेरिका की तरफ से 'अधिग्रहण और निर्वाह के लिए उपमंत्री' एलन एम लॉर्ड और भारत की तरफ से 'रक्षा उत्पादन सचिव' सुभाष चंद्रा भाग लेंगे।
ये दोनों नए विचारों के साथ चीजों को आगे ले जाने का प्रयास करेंगे, जिसमें एक उद्योग मंच की स्थापना करना शामिल है जो भविष्य में उठाए जाने वाले व्यावहारिक परियोजनाओं की पहचान करें और उस पर सुझाव दे सकें।
इस समझौते के तहत रक्षा उद्योग सलाहकार समिति (डीआईएसी) की स्थापना के लिए उद्योग की ओर से कड़े सुझाव दिए गए, जो प्रौद्योगिकी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रयासों को पूरा करने में सक्षम होंगे, लेकिन इस पर अमेरिका से तरफ से अनिच्छा व्यक्त की गई है।
सूत्रों ने कहा कि स्टार्टअप पर ध्यान केंद्रित करने के पीछे की असल वजह अमेरिका की रक्षा अनुसंधान प्रयोगशालाओं को भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ समन्वय में काम करने में सक्षम बनाया जाना है। इसके अलावा, दोनों पक्षों द्वारा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग के लिए परियोजनाओं की पहचान करने की संभावना है।