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Global South: 'वैश्विक दक्षिण के साथ संबंध बनाने के लिए अच्छी स्थिति में भारत-यूरोपीय संघ', राजदूत को विश्वास

Sat, 12 Apr 2025 09:35 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sat, 12 Apr 2025 09:35 AM IST
सार

नई दिल्ली में हो रहे वैश्विक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन में भारत और भूटान में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने वैश्विक मामलों को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत वैश्विक दक्षिण की अपेक्षाओं को पूरा करने और संबंध बनाने के लिए मिलकर काम करने की बहुत अच्छी स्थिति में हैं।

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'India-EU in good position to build relations with Global South', assures Ambassador
भारत और भूटान में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन। - फोटो : ANI

विस्तार

भारत और भूटान में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) में भारत और यूरोपीय संघ की स्थिति को लेकर विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के साथ संबंध बनाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में हैं। दोनों का भू-राजनीतिक परिदृश्य भी बेहतर है। 

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नई दिल्ली में हो रहे वैश्विक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन में डेल्फिन ने वैश्विक मामलों को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि भू-राजनीति चार तरह से होती है। इसमें पूंजीवाद का उभरता स्वरूप, तकनीक की रणनीतिक भूमिका, सामाजिक दबाव और बदलता सुरक्षा वातावरण शामिल होता है। विभिन्न आर्थिक मॉडलों के बीच चल रहे मुकाबले और तकनीक की बदलती भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि यह नवाचार और प्रगति के साधन से आगे बढ़कर भू-राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्र बन गई है।
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डेल्फिन ने वर्तमान वैश्विक व्यवस्था पर सामाजिक परिवर्तनों और सुरक्षा खतरों के प्रभाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत वैश्विक दक्षिण की अपेक्षाओं को पूरा करने और संबंध बनाने के लिए मिलकर काम करने की बहुत अच्छी स्थिति में हैं। इसे हमें केवल प्रतिस्पर्धा के चश्मे से नहीं देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भू-राजनीति को कई कारकों से बढ़ावा मिलता है। पहला पूंजीवाद के विभिन्न संस्करणों द्वारा अर्थव्यवस्था को कैसे चुनौती दी जा रही है? दूसरा कैसे तकनीक आर्थिक और सामाजिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नवाचार और प्रगति के क्षेत्र से हटकर ऐसी बन गई है जो स्पष्ट रूप से सुरक्षा और भू-राजनीति के चौराहे पर है। तीसरा सामाजिक विकल्प, इसमें दिन के अंत में लोगों की सेवा करने के लिए हैं क्योंकि वे चिंताओं और विकल्पों की दुनिया में रहते हैं और अंतिम सुरक्षा वातावरण है, जहां हम नए युद्ध और युद्ध के नए रूप देखते हैं। 


डेल्फिन ने कहा कि परिवर्तन की गति प्रणाली के लिए थका देने वाली रही है, क्योंकि वह इसके साथ तालमेल नहीं रख पा रही है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इस दुनिया से जो निकलता है उसमें कुछ तत्व होते हैं। परिवर्तन की गति इतनी आकर्षक होती है कि यह सिस्टम को भी थका देती है क्योंकि यह आसानी से नहीं चल सकती और आपको यह पहचानना होगा कि आपके पास सबसे अच्छी एजेंसी हो सकती है; आप किसी न किसी तरह से पीछे रह जाएंगे।

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उन्होंने कहा कि दूसरा एक और टी शब्द है, जो टेक या टैरिफ नहीं है बल्कि ट्रस्ट है। मुझे लगता है कि इसे मैं भू-राजनीति का एक महत्वपूर्ण कच्चा माल कहूंगा जिसका अब पहले से कहीं अधिक मूल्य है, और मुझे लगता है कि यह वह है जो उस नई दुनिया की गतिशीलता को आकार देने जा रहा है जिसमें हम रह रहे हैं। नौवां वैश्विक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन (जीटीएस) भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सहयोग से 10 से 12 अप्रैल, 2025 तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।

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