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Who Is Dayan Krishnan: क्यों चर्चा में दयान कृष्णन, आतंकी तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण में इनकी क्या भूमिका?

Sat, 12 Apr 2025 08:23 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 12 Apr 2025 08:23 AM IST
सार

दयान कृष्णन सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, जिन्होंने संसद हमले के आतंकी और निर्भया कांड के दरिंदों को फांसी तक पहुंचाया। गांधीजी को आदर्श मानते हैं और वेस्टइंडीज के पूर्व धाकड़ गेंदबाज कॉलिन क्रॉफ्ट से भी प्रभावित हैं। खाली वक्त में जीवनियां पढ़ने वाले दयान कृष्णन ने 26/11 के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के मामले में ऐसे तर्क दिए, जिनसे अमेरिकी अदालतें भी प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकीं।

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Who Is Dayan Krishnan Lawyer Leading Prosecution Against Tahawwur Rana Extradition Mumbai Terror Attack
दयान कृष्णन - फोटो : Amar Ujala
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26/11 मुंबई हमले साजिशकर्ता आतंकी तहव्वुर राणा के अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन अब भारत में एनआईए के अभियोजन की पैरवी कर रहे हैं। वह तहव्वुर को कड़ी सजा दिलाएंगे। राणा को सजा दिलाने में विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र मान उनका साथ दे रहे हैं। इसके अलावा अभियोजन टीम में वकील संजीवी शेषाद्रि और श्रीधर काले भी शामिल हैं।

Who Is Dayan Krishnan Lawyer Leading Prosecution Against Tahawwur Rana Extradition Mumbai Terror Attack
dayan krishnan - फोटो : PTI

न्याय के पैरोकार
26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों के सरगना और पाकिस्तानी मूल के आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा को तमाम कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद भारत लाया गया है। इसके पीछे बेशक भारत सरकार और उसकी कूटनीति ने काम किया है, लेकिन अमेरिकी अदालतों में सरकार का मजबूती और तार्किकता के साथ पक्ष रखने में जिस शख्स की सबसे अहम भूमिका रही, वह हैं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ क्रिमिनल लॉयर दयान कृष्णन। उन्हें भारत में भी राणा के खिलाफ एनआईए की ओर से अदालत में पैरवी करने वाली टीम को लीड करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और भारत के सॉलिसिटर जनरल रहे न्यायमूर्ति एन संतोष हेगड़े के संरक्षण में वकालत का ककहरा सीखने वाले दयान कृष्णन देश के उन चुनिंदा वकीलों में से हैं, जिन्होंने मेहनत और काबिलियत के बलबूते अपनी पहचान बनाई है। 2001 में संसद पर हुआ आतंकी हमला हो या फिर 2012 का दिल्ली का निर्भया कांड या ऐसे तमाम अपराध, जिनसे देश और समाज की अस्मिता पर आंच आई, उन मामलों में दुर्दांत अपराधियों को फांसी के तख्त तक पहुंचाने के लिए अदालत में जिस सलीके और तर्क के साथ अपनी दलीलों को दयान कृष्णन ने पेश किया, उससे जाहिर होता है कि वह कानून और न्याय के सच्चे सेवक व मजबूत पैरोकार हैं।

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Tahawwur Rana - फोटो : PTI

न्यायमूर्ति हेगड़े से सीखा ककहरा
तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में स्थित हिल स्टेशन ऊटी (अब उदगमंडलम) में 17 नवंबर, 1968 को पैदा हुए दयान कृष्णन ने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलूरू से वकालत में 1993 में स्नातक की डिग्री हासिल की। वह इस विश्वविद्यालय के पहले बैच के विद्यार्थी रहे हैं। उनके पिता एन वी कृष्णन ऊटी में ही वकालत करते थे, लेकिन जब दयान कृष्णन को दिल्ली में न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े (तब वकील थे) के मार्गदर्शन में काम करने का मौका मिला, तो उन्होंने ज्यादा सोच-विचार किए तत्काल दिल्ली की ट्रेन पकड़ ली।

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दयान कृष्णन ने करीब छह वर्ष तक उनके साथ काम किया। वर्ष 1999 में न्यायमूर्ति हेगड़े सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त हो गए, तो दयान कृष्णन ने स्वतंत्र रूप से वकालत शुरू कर दी। वह न्यायमूर्ति हेगड़े को अपना रोल मॉडल मानते हैं। दयान कृष्णन आपराधिक कानून, प्रत्यर्पण कानून और धन-शोधन, जैसे मामलों के विशेषज्ञ हैं। दयान कृष्णन की पत्नी निहारिका कृष्णन कानून की शिक्षिका हैं। उनका एक बेटा है, जो अभी पढ़ाई कर रहा है। बहन प्रिया कृष्णन भी पेशे से वकील हैं। उनकी मां का नाम चंद्रा कृष्णन है।

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NIA - फोटो : PTI

दिग्गज वकीलों का मिला साथ
दयान कृष्णन के लिए दिल्ली एकदम नई थी, लेकिन उनके अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा था। गोपाल सुब्रमण्यम, राजीव धवन और जोसेफ वेलापल्ली जैसे दिग्गज वकीलों ने उनके कॅरिअर में अहम योगदान दिया। गोपाल सुब्रमण्यम ने उन्हें 2001 के संसद हमले से जुड़े मामले के ट्रायल के लिए अपने साथ जोड़ा। वह 1999 में न्यायमूर्ति जेएस वर्मा, जो उस वक्त राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन थे, के साथ काम कर चुके हैं। राजीव धवन ने उन्हें कावेरी जल विवाद में अपने साथ शामिल किया।

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NIA - फोटो : PTI

निर्भया के दरिंदों को चढ़वाया फांसी के तख्ते पर
2012 के निर्भया कांड के दोषियों को सजा दिलवाने के लिए दयान कृष्णन को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया, जिसमें दरिंदों को फांसी हुई। निर्भया मामले की पैरवी उन्होंने नि:शुल्क की थी। उन्होंने बहुचर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड, गोवा बाल शोषण कांड, उपहार सिनेमा त्रासदी, 2जी घोटाले में भी पैरवी की। वह नौसेना के पूर्व अधिकारी रवि शंकरन के ब्रिटेन से प्रत्यर्पण में सीबीआई के विशेष वकील थे। उन्होंने नेवी वार रूम लीक मामले और सत्यम कंप्यूटर घोटाले में भी पैरवी की। दयान ने भ्रष्टाचार के मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की जमानत याचिका का भी विरोध किया था।

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