फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ED: DHFL misused loans worth rs42,871 crore; 17 banks suffered a loss of rs 34,615 crore

ED: डीएचएफएल ने 42871 करोड़ रुपये के लोन का गलत इस्तेमाल किया, 17 बैंकों को हुआ 34615 करोड़ का नुकसान

Fri, 28 Aug 2026 04:22 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 28 Aug 2026 04:22 PM IST
विज्ञापन
ED: DHFL misused loans worth rs42,871 crore; 17 banks suffered a loss of rs 34,615 crore
ED , ईडी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हेडक्वार्टर इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने पिछले दिनों प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत एक सर्च ऑपरेशन चलाया। यह ऑपरेशन दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) और उसके प्रमोटरों द्वारा किए गए लोन फ्रॉड से जुड़ी मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में किया गया। ईडी ने तलाशी के दौरान 5.41 मिलियन यूएस डॉलर की संपत्ति फ्रीज की है। आरोप है कि विदेशी संपत्ति, 'हर्टमोर हाउस' (यूके), को कई ट्रांजैक्शन के जरिए बेचा गया था।  

विज्ञापन


एफआईआर 17 बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से की गई दर्ज
ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। यह एफआईआर 17 बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद दर्ज की गई थी। एफआईआर में कहा गया है कि कपिल वधावन और धीरज वधावन समेत आरोपी व्यक्तियों ने कंसोर्टियम बैंकों को धोखा देने के लिए आपराधिक साजिश रची। 
विज्ञापन


इन बैंकों ने डीएचएफएल को कुल 42,871.42 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधाएं मंजूर की थीं। लोन के पैसे को डीएचएफएल के अकाउंट्स की किताबों में हेराफेरी करके दूसरी जगह भेज दिया गया। उसका गलत इस्तेमाल किया गया, जिससे कंसोर्टियम लेंडर्स को लगभग 34,615 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


जांच से पता चला है कि कपिल वधावन की पत्नी वनिता वधावन के नाम पर मौजूद एक विदेशी संपत्ति, 'हर्टमोर हाउस' (यूनाइटेड किंगडम), को कई ट्रांजैक्शन के जरिए बेच दिया गया। इन ट्रांज़ैक्शन में उनके नाम पर एक फर्जी देनदारी बनाई गई थी। अल जालोर ट्रेडिंग 'एफजेडई' और वनिता वधावन के बीच एक कथित लोन एग्रीमेंट किया गया। उसी के तहत यूके की उक्त संपत्ति को गिरवी रखा गया। जांच से पता चला है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल विदेशी संपत्ति पर बोझ बनाने के लिए किया गया था, ताकि डीएचएफएल लोन फ्रॉड से भारत में पैदा हुई देनदारी को निपटाया जा सके।

करोड़ों की रकम में हुआ हेरफेर
इसके बाद, 2026 में वह प्रॉपर्टी बेच दी गई। बिक्री से मिली रकम रजिस्टर्ड मालिक वनिता वधावन को मिलने के बजाय, भारत में मौजूद अल जालोर ट्रेडिंग के बैंक अकाउंट में भेजी गई। इस तरह, इस ट्रांजैक्शन में अपराध से मिली रकम का गलत इस्तेमाल हुआ। साथ ही, विदेशी प्रॉपर्टी और कंपनियों से जुड़े एक खास तरह के ट्रांजैक्शन के जरिए भारतीय देनदारी को चुकाने के मकसद से विदेशी एसेट का इस्तेमाल और निपटान किया गया।


तलाशी के दौरान, अल जालोर ट्रेडिंग 'एफजेडई' के बैंक अकाउंट की जांच की गई। उस कंपनी के अकाउंट में मौजूद लगभग 5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 51.75 करोड़ रुपये) की रकम को पीएमएलए 2002 की धारा 17(1A) के तहत फ्रीज कर दिया गया है। यह रकम अपराध से मिली हुई थी। तलाशी के दौरान जांच के दायरे में आए ट्रांजैक्शन और एसेट से जुड़े दूसरे अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड भी जब्त किए गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed