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मक्का समझौते पर सऊदी-पाकिस्तान और तुर्किये का हस्ताक्षर: भारत की पैनी नजर, आखिर क्यों बना यह नया गुट?

Fri, 07 Aug 2026 05:13 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 07 Aug 2026 05:13 PM IST
सार

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का में एक ऐतिहासिक सामूहिक रक्षा समझौता किया है, जिसे मक्का पैक्ट कहा जा रहा है। इसके तहत किसी एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। भारत ने इस घटनाक्रम पर बेहद सतर्क रुख अपनाते हुए कहा है कि वह स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। दूसरी ओर भारत ने साफ कर दिया है कि शेख हसीना के मीडिया कार्यक्रम से सरकार का कोई संबंध नहीं था।

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india clarifies on sheikh hasina media event mea says government had no role
मक्का पैक्ट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अनिश्चितता के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने आपस में एक बड़ा रक्षा समझौता किया है। इसे 'मक्का पैक्ट' का नाम दिया गया है। इस समझौते के तहत तीनों देशों ने एलान किया है कि किसी भी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस बड़े सैन्य गठबंधन के बनते ही पूरी दुनिया में हलचल तेज हो गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि भारत इस पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
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क्या है मक्का पैक्ट और क्यों हुआ यह समझौता?
यह त्रिपक्षीय रक्षा समझौता मक्का शहर में आयोजित एक साझा रक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ। इस बैठक में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शामिल हुए। शहबाज शरीफ उमराह करने के बाद इस सम्मेलन में पहुंचे थे। तीनों देशों के जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि यह समझौता उनके पुराने ऐतिहासिक, धार्मिक और रणनीतिक संबंधों पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य तीनों देशों की सुरक्षा को मजबूत करना और किसी भी बाहरी हमले को रोकना है।
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इस नए सैन्य गठबंधन की बड़ी बातें
  • किसी भी एक देश पर हुआ सशस्त्र हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।
  • तुर्किये के पास नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना है, सऊदी अरब के पास अकूत पैसा और तेल है, वहीं पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है।
  • पाकिस्तान और तुर्किये उन्नत हथियार और ड्रोन बनाएंगे, जबकि सऊदी अरब इसमें भारी निवेश करेगा।
  • तुर्किये के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह रक्षात्मक समझौता है और यह किसी देश के खिलाफ नहीं है।
  • पाकिस्तान ने पहले से ही सऊदी अरब में हजारों सैनिक, लड़ाकू विमान, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर रखे हैं।
  • यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच तनाव और युद्ध का माहौल बना हुआ है।
  • भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम को बहुत ध्यान से देख रहा है।

क्या भारत की सुरक्षा पर पड़ेगा इसका असर?
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस समझौते पर भारत का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि तीनों देशों के बीच हुआ यह समझौता एक नया घटनाक्रम है। भारत इस पर लगातार नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे की जानकारी साझा की जाएगी। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का परमाणु हथियार नेटवर्क मुख्य रूप से भारत केंद्रित है, इसलिए इस समझौते में परमाणु पहलू शामिल होने की संभावना बेहद कम है। फिर भी, पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य मौजूदगी पर भारत की कड़ी नजर है।
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शेख हसीना के मीडिया संबोधन पर MEA बोला- सरकार का कोई रोल नहीं
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में हुए एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम के बाद दोनों देशों के बीच नया राजनयिक विवाद खड़ा हो गया है। भारत आने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलते हुए शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर कई तीखे बयान दिए। इसके बाद ढाका ने भारत के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने पर भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम से भारत सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।



एमईए ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह एक निजी मीडिया संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम था। इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और न ही सरकार इस मंच से दिए गए किसी बयान का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के खिलाफ दिए गए विचार भारत सरकार के नहीं हैं।


यह भी पढ़ें: MEA: एफसीआरए पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी को भारत ने किया खारिज, विदेश मंत्रालय ने कहा- यह हमारा आंतरिक मामला

शेख हसीना ने क्या कहा?
अपने वर्चुअल संबोधन में शेख हसीना ने कहा कि वह इस साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं। उन्होंने कहा कि जेल या मौत का डर उन्हें अपने देश वापस जाने से नहीं रोक सकता। उन्होंने 2024 के आंदोलन को सुनियोजित साजिश बताया और लोकतंत्र की बहाली का दावा किया।

बांग्लादेश ने क्यों जताई नाराजगी?
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की धरती का इस्तेमाल उनके देश के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी के लिए नहीं होना चाहिए। ढाका ने इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताया और शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भी दोहराई। इस पर अब भारत ने दो टूक जवाब दे दिया है। 
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