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राजकोट के चुनावी रंग में होर्डिंग्स और बैनर की जंग

Sat, 18 Nov 2017 04:14 PM IST
अतुल सिन्हा/ राजकोट
अतुल सिन्हा/ राजकोट Updated Sat, 18 Nov 2017 04:14 PM IST
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hoardings and banners Battle in Rajkot election
rajkot

गुजरात की औद्योगिक राजधानी के तौर पर विकसित राजकोट पूरी तरह भाजपा और कांग्रेस के पोस्टरों, बैनरों और होर्डिंग्स से पटा पड़ा है। मुख्यमंत्री विजय रूपानी से पहले यहां कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार इंद्रनील राजगुरु ने सारे खंभों और चौराहों की बड़ी-बड़ी होर्डिग्स अपने नाम बुक कर लिए और बाद में विजय रूपानी ने उन्हीं खंभों पर नीचे की तरफ उतनी ही संख्या में अपने पोस्टर्स और बैनर लगवा दिए।

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पोस्टर वार में यहां कोई किसी से कम नहीं है। इंद्रनील फिलहाल राजकोट पूर्व से कांग्रेस के विधायक हैं लेकिन इस बार उन्होंने रूपानी को चुनौती देने के लिए पूर्व की अपनी सीट छोड़कर राजकोट पश्चिम से लड़ने की तैयारी कर रखी है। 
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हालांकि कांग्रेस ने अभी उनकी उम्मीदवारी घोषित नहीं की है, लेकिन वो राजकोट के इकलौते कांग्रेसी विधायक हैं जो आत्मविश्वास से भरे हैं।

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रूपानी करते हैं दिखावे की राजनीति
रेसकोर्स के पास कांग्रेस के दफ्तर में सुबह से ही बहुत गहमागहमी है। इंद्रनील से मिलने वालों का तांता लगा है और रूपानी को हराने के लिए रणनीतियां बनाई जा रही हैं। अमर उजाला से बात करते हुए इंद्रनील बताते हैं कि रूपानी हर हफ्ते यहां आते हैं, लोगों से मिलते हैं, घर-घर जाते हैं लेकिन उन्होंने राजकोट के लिए कुछ नहीं किया।

भ्रष्टाचार और दिखावे का यहां बोलबाला है। अपराधियों से उनकी सांठगांठ है और लोग अब उनकी असलियत समझ चुके हैं। मोदी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनवा दिया और पिछले साल इस सीट से चुनाव भी जितवा दिया। लेकिन राजकोट की जनता जानती है कि रूपानी सिर्फ दिखावे की राजनीति करते हैं।

इंद्रनील को सता रहा हार का डर

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vijay rupani

दूसरी तरफ भाजपा प्रवक्ता और राजकोट में रूपानी के खास राजू ध्रुव इंद्रनील के दावों को खोखला बताते हैं और कहते हैं कि पहले वो ये बताएं कि अपनी जीती हुई सीट से दोबारा क्यों नहीं लड़ना चाहते? वहां उन्होंने कोई काम नहीं किया, इसलिए उन्हें हार का डर सता रहा है। 

रूपानी के खिलाफ लड़कर वो अपनी हार को यह कहकर प्रचारित करेंगे कि मुख्यमंत्री के पास तो सत्ता और रसूख सब कुछ है, इसलिए हार गए। फिलहाल राजकोट पश्चिम, दक्षिण और ग्रामीण सीट पर भाजपा का कब्जा है। राजू के मुताबिक रूपानी की छवि बेहद साफ सुथरी है, वे सरल हैं और मेयर रहते हुए उन्होंने राजकोट का जबरदस्त विकास किया है।

राहुल गांधी ने बदली है अपनी इमेज
दरअसल नोटबंदी और जीएसटी के बाद व्यापारी वर्ग और आम आदमी की नाराज़गी का फायदा कांग्रेस उठाने की पूरी कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने जिस तरह पिछले एक साल में इस इलाके में मेहनत की है और लोग अब ये खुलकर कहने लगे हैं कि जीत-हार अलग बात है, लेकिन राहुल ने अपनी इमेज बदली है, लोग उन्हें गंभीरता से ले रहे हैं। 

भाजपा के विकास की उन्होंने हवा निकाल दी है, इसलिए बार-बार रूपानी को अपने काम और विकास को गिनवाना पड़ रहा है। उनकी हर होर्डिंग और बैनर में विकास की ही बात हो रही है। भाजपा को कांग्रेस डराने लगी है, इसलिए सचिन पायलट और राहुल गांधी को जगह-जगह उनके प्रायोजित विरोध का सामना कर पड़ रहा है।

नोटबंदी-जीएसटी पर कहीं खुशी, कहीं गम
राजकोट में काम करने वाले 30 साल के योगेश गिरी गोस्वामी नोटबंदी और जीएसटी को सकारात्मक बताते हैं और इसके दूरगामी फायदे गिनवाते हैं। ठीक वैसे जैसे मोदी और अमित शाह गिनवाते हैं। टैगोर रोड चौराहे पर खड़े योगेश का साथ देने कई और युवा जमा हो जाते हैं और कैशलेश इंडिया के फायदे बताने लगते हैं। 

लेकिन इसके उलट पाटीदार समाज से आने वाले और पुष्कर धाम में रहने वाले रणछोड़ भाई वसाया भाजपा के लिए सबसे बड़ा खतरा नोटबंदी और जीएसटी को ही बताते हैं। उनका दावा है कि गांव के लोगों में भाजपा के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है।

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