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अस्थायी जजों की नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट ने दी थी मंजूरी, किसी हाईकोर्ट ने नौ महीने में नहीं की नाम की सिफारिश

Sun, 12 Oct 2025 05:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 12 Oct 2025 05:27 PM IST
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High courts unenthusiastic in posting ad-hoc judges to tackle pending criminal cases
judge court हथोड़ा - फोटो : Adobe Stock
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में लाखों लंबित आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए अस्थायी जजों की नियुक्ति का रास्ता साफ किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने अब तक किसी के नाम की सिफारिश नहीं की है। करीब नौ महीने बीत जाने के बावजूद हाईकोर्ट में इससे जुड़ी कोई पहल नहीं हुई है। 
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शीर्ष कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े लोगों के मुताबिक, 11 अक्तूबर तक देश के 25 में से किसी भी हाईकोर्ट ने अस्थायी जजों की नियुक्ति के लिए किसी नाम की सिफारिश नहीं भेजी है। केंद्रीय कानून मंत्रालय को भी इस संबंध में किसी भी हाईकोर्ट कोलेजियम से कोई सिफारिश नहीं मिली है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को चिंता जताई थी कि देश में 18 लाख से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। इसको देखते हुए शीर्ष कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को यह अनुमति दी थी कि वे अपने कुल स्वीकृत पदों की 10 फीसदी सीमा तक अस्थायी जज नियुक्त कर सकते हैं।


संविधान के अनुच्छेद 224ए के तहत हाईकोर्ट में सेवानिवृत्त जजों को अस्थायी जज के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान है, ताकि मामलों के बोझ को कम किया जा सके। नियम के मुताबिक, संबंधित हाईकोर्ट कोलेजियम अभ्यर्थियों के नाम की सिफारिश कानून मंत्रालय के न्याय विभाग को भेजता है। इसके बाद मंत्रालय उम्मीदवारों की जानकारी जोड़कर फाइल सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम को भेजता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम अंतिम फैसला लेकर सरकार से अनुशंसा करता है कि किन व्यक्तियों को जज नियुक्त किया जाए। इसके बाद राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर करते हैं। 

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अस्थायी जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी समान होगी, फर्क केवल इतना होगा कि राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, लेकिन उनकी सहमति आवश्यक होगी। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक एक मामले को छोड़कर हाईकोर्ट के अस्थायी जज के रूप में सेवानिवृत्त जज की नियुक्ति का कोई उदाहरण नहीं है। 

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