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PM Modi: 'भारत की सभ्यतागत चेतना के प्रतीक थे गुरुदेव', रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर पीएम मोदी का भावुक संदेश

Sat, 09 May 2026 10:03 AM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Sat, 09 May 2026 10:03 AM IST
सार

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारत की सभ्यतागत चेतना की कालजयी आवाज बताया। उन्होंने कहा कि टैगोर ने साहित्य, शिक्षा, कला और दर्शन के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया और अपनी रचनाओं के जरिए मानवता, संस्कृति और राष्ट्रवाद के श्रेष्ठ आदर्शों को अभिव्यक्त किया।

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He was a symbol of India's civilisational consciousness, PM emotional message on Tagore's birth anniversary
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैगोर को दी श्रद्धांजलि - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारत की सभ्यतागत चेतना की कालजयी आवाज बताया। पश्चिम बंगाल में पोची हे बोइशाख के रूप में मनाए जाने वाले इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुदेव टैगोर ने साहित्य, शिक्षा, कला और दर्शन के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया, जिसने पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

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पीएम मोदी ने क्या-क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज पोची हे बोइशाख के विशेष अवसर पर हम गुरुदेव टैगोर को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि टैगोर केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि विलक्षण चिंतक, लेखक, दार्शनिक, शिक्षाविद और कलाकार भी थे।

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PM मोदी ने कहा कि गुरुदेव ने मानवता की गहरी भावनाओं और भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ आदर्शों को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टैगोर ने समाज को नए विचार, रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास प्रदान किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, हम उन्हें गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। उनकी विचारधारा आगे भी लोगों के मन को आलोकित करती रहे और हमारे प्रयासों का मार्गदर्शन करती रहे।

रवींद्रनाथ टैगोर की उपलब्धियां

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म बंगाली पंचांग के अनुसार 25 बोइशाख 1268 को हुआ था, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 7 मई 1861 की तारीख थी। गुरुदेव टैगोर एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे। उन्हें 1913 में उनकी काव्य कृति गीतांजलि  के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। उन्होंने भारत के राष्ट्रगान जन गण मन और बांग्लादेश के राष्ट्रगान आमार सोनार बांग्ला की भी रचना की थी।



टैगोर को भारतीय पुनर्जागरण का प्रमुख स्तंभ माना जाता है। उन्होंने शांति निकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज भी भारतीय संस्कृति, शिक्षा और कला का महत्वपूर्ण केंद्र है। उनकी रचनाओं में राष्ट्रवाद, मानवता, प्रकृति और आध्यात्मिकता की गहरी छाप देखने को मिलती है।

गुरुदेव की जयंती के मौके पर पश्चिम बंगाल समेत देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, कविता पाठ, गीत और नृत्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है। कोलकाता और शांतिनिकेतन में विशेष कार्यक्रमों के जरिए उन्हें याद किया गया।

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