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Haldwani: सुप्रीम कोर्ट ने चार हजार परिवारों को दी राहत, जानें क्या है हल्द्वानी में अतिक्रमण का पूरा विवाद

Thu, 05 Jan 2023 04:53 PM IST
Jaidev Singh जयदेव सिंह
Updated Thu, 05 Jan 2023 04:53 PM IST
सार

हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में आखिर बुलडोजर कहां-कहां चलना था? पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ? इस कार्रवाई से कितने लोगों पर असर पड़ता? अतिक्रमण की जद में आने वाले स्कूलों के बच्चों का क्या होता? आइये जानते हैं...

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Haldwani Demolition Threat Case Hearing in Supreme Count All You Know in Full Details
हल्द्वानी अतिक्रमण केस - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में 4000 से ज्यादा घरों पर चलने वाले बुलडोजर पर सुप्रीम रोक लग गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तराखंड सरकार और रेलवे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई सात फरवरी को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सात दिन के अंदर अतिक्रमण हटाने के आदेश पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखना होगा। कोर्ट के आदेश के साथ करीब 50 हजार से ज्यादा लोगों को फौरी राहत मिल गई है। 
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सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ? बनभूलपुरा में आखिर बुलडोजर कहां चलना था? पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ? इस कार्रवाई से कितने लोगों पर असर पड़ना था? अतिक्रमण की जद में आने वाले स्कूलों के बच्चों का क्या होता? आइये जानते हैं...
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Haldwani Demolition Threat Case Hearing in Supreme Count All You Know in Full Details
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई के लिए 7 फरवरी की तारीख तय की गई। कोर्ट ने बहस के दौरान कहा कि यह एक मानवीय मामला है। इस मामले में कुछ व्यावहारिक समाधान खोजने की जरूरत है।   

Haldwani Demolition Threat Case Hearing in Supreme Count All You Know in Full Details
हल्द्वानी रेलवे प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
बुलडोजर कहां चलना था?
हल्द्वानी के जिस इलाके में अतिक्रमण बताया जा रहा है। वह करीब  2.19 किमी लंबी रेलवे लाइन का क्षेत्र है। रेल अधिकारियों का कहना है कि रेल लाइन से 400 फीट से लेकर 820 फीट चौड़ाई तक अतिक्रमण है। रेलवे करीब 78 एकड़ जमीन पर कब्जे का दावा कर रहा है। अतिक्रमित जमीन पर पांच सरकारी स्कूल, 11 प्राइवेट स्कूल, मंदिर, मस्जिद, मदरसे और पानी की टंकी के साथ ही सरकारी स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल है। जिन इलाकों में बुलडोजर चलना है उनमें ढोलक बस्ती, गफूर बस्ती, लाइन नंबर 17, नई बस्ती,  इंद्रानगर छोटी रोड, इंद्रानगर बड़ी रोड शामिल हैं। 
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हल्द्वानी में विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ?
2013 में एक जनहित याचिका में कहा गया कि रेलवे स्टेशन के पास गौला नदी में अवैध खनन हो रहा है। याचिका में कहा गया कि अवैध खनन की वजह से ही 2004 में नदी पर बना पुल गिर गया। याचिका पर कोर्ट ने रेलवे से जवाब मांगा। रेलवे ने 1959 का नोटिफिकेशन, 1971 का रेवेन्यू रिकॉर्ड और 2017 का लैंड सर्वे दिखाकर कहा कि यह जमीन रेलवे की है इस पर अतिक्रमण किया गया है। 
 हाईकोर्ट में यह साबित हो गया कि जमीन रेलवे की है। इसके बाद ही लोगों को जमीन खाली करने का नोटिस दिया गया। लोगों ने जमीन खाली करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से  इन लोगों का भी पक्ष सुनने को कहा। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस इलाके में अतिक्रमण की बात मानी। बीते 20 दिसंबर को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे भूमि से अतिक्रमण की बात मानते हुए इसे हटाने का आदेश दे दिया। अब इसे हटाने की तैयारी में प्रशासन जुटा है। इस बीच दो जनवरी को प्रभावितों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जिस पर आज सुनवाई हुई। जिसके बाद कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया। 

इस कार्रवाई से कितने लोगों पर असर पड़ता? 
 जिन लोगों ने दो जनवरी तक अतिक्रमण नहीं हटाया उनके अतिक्रमण को तोड़ा जाना था और उसका खर्च भी अतिक्रमणकारियों से वसूलने की बात कही गई थी। इस पूरे इलाके में करीब पचास से साठ हजार लोग रहते हैं। इनमें से करीब 35 हजार लोगों के पास वोटर आईडी कार्ड है। इन लोगों का कहना है ये कई दशकों से यहां रह रहे हैं। कुछ लोगों का तो दावा है कि वो यहां 70-80 साल से रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से स्टे नहीं मिलता तो 10 जनवरी को जिला प्रशासन इस पर बुलडोजर चलाता। 

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हल्द्वानी में विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
अतिक्रमण की जद में आने वाले स्कूलों के बच्चों का क्या होगा?
बनभूलपुरा के पांच सरकारी स्कूल आ रहे हैं। इनमें जीजीआईसी, जीआईसी, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालय बनभूलपुरा और प्राथमिक विद्यालय इंदिरानगर शामिल हैं। इन स्कूलों में दो हजार से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं। ईओ हरेंद्र मिश्रा की ओर से इसमें एक पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि इन स्कूलों की वैकल्पिक व्यवस्था नजदीकी स्कूलों में की गई है। जीजीआईसी बनभूलपुरा को जीजीआईसी हल्द्वानी, जीआईसी बनभूलपुरा को महात्मा गांधी इंटर कॉलेज, प्राथमिक विद्यालय इंदिरानगर को गांधीनगर, प्राथमिक विद्यालय बनभूलपुरा को बरेली रोड, उच्च प्राथमिक विद्यालय बनभूलपुरा को गांधी नगर में संचालित किया जाएगा।
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