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Gujarat Election 2022: हिमाचल टिकट वितरण विवाद से भाजपा ने ली सीख, गुजरात में RSS पर होगी बड़ी जिम्मेदारी
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अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में टिकट वितरण के बाद से ही भाजपा को अंतर्विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही दोहराव गुजरात में नहीं देखने को मिले। इसके लिए भाजपा फूंक फूंक कर कदम रख रही है। टिकट न पाने वाले नेताओं की वजह से पार्टी को चुनाव में नुकसान नहीं हो इसके लिए भाजपा ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक की शरण ले ली है। टिकट वितरण के बाद अगर कोई नेता नाराज होता है तो संघ के कार्यकर्ता घर जाकर उसे मनाएंगे। उन्हें पार्टी की अहमियत और उससे अलग होने के नफा नुकसान समझाएंगे।
अमर उजाला को विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश टिकट बंटवारे के बाद से ही भाजपा के भीतर विरोध देखने को मिल रहा है। कई नेताओं ने टिकट कटने की वजह से पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में उतरने का एलान तक कर दिया। इसकी वजह से पार्टी को अपने कई नेताओं का निलंबन तक करना पड़ा। ऐसी स्थिति गुजरात में नहीं देखनी पड़े, इसे लेकर भाजपा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मदद ले रही है। पार्टी नेतृत्व ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश जारी कर दिए है वे संघ के साथ कदमताल मिलाकर काम करे। इसके लिए संघ की तरफ से हर एक विधानसभा में वरिष्ठ स्वयंसेवकों की एक टीम बनाई गई है, जो संघ और बीजेपी के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने का काम करेगी।
हालांकि इस टीम की भूमिका टिकटों के एलान के बाद और बढ़ जाएगी, क्योंकि फिलहाल ये टीम इतने सालों से सत्ता में रही पार्टी के लिए तैयार हुए एंटी इनकंबेंसी या नाराज कार्यकर्ता जिनके कार्य नहीं हो पाए, उन्हें पार्टी के दोबारा नजदीक लाने का प्रयास कर रही है। अब यही टीम टिकट बंटवारे के बाद जब टिकट पाने से चूके नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढ़ जाएगी तो उन्हें मनाने में लग जाएगी।
गुजरात आरएसएस के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध पर अमर उजाला से कहा कि इसका पूरा खाका पहले से तैयार किया जा चुका है, जिसमे संघ के कार्यकर्ता इन नेताओं के घर और उनसे जुड़े कार्यकर्ताओं के घर-घर जाकर उन्हें पार्टी की अहमियत और उससे अलग होने के नफा नुकसान समझाएंगे। जिन्हें टिकट नहीं मिल पाएगा, ऐसे दावेदार अगर पाला बदल कर विरोधी पार्टी से खड़े हो जाए, तो उन्हें समझा बुझाकर बिठाने की जिम्मेदारी अंदरखाने संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवकों को सौंपी जा रही है। ताकि वो पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ परेशानी न खड़ी करें और पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने के लिए तैयार हो जाएं।
6 हजार स्वयंसेवक मैदान में
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक साल पहले ही जमीनी तौर पर चुनाव की तैयार शुरु कर दी थी। संघ ने चुनाव को ध्यान में रखते हुए गुजरात को दो हिस्सों में बांटा है। एक क्षेत्र का मुख्यालय अहमदाबाद तो दूसरा क्षेत्र का मुख्यालय सौराष्ट्र में बनाया है। प्रदेश की एक-एक विधानसभा क्षेत्र में संघ ने 30 से 40 लोगों को दायित्व सौंपा है। पूरे गुजरात में लगभग 6 हजार से ज्यादा स्वयं सेवकों को अलग अलग चुनावी काम सौंपे गए है। सभी स्वयंसेवक अपने अपने क्षेत्रों में लोगों को उनके मताधिकार के प्रति जागरूक करने का अभियान शुरु कर चुके है। संघ के वरिष्ठ और पुराने कार्यकर्ता क्षेत्र के बुजुर्ग, युवा और महिला मतदाता के बीच जाकर मौजूदा सरकार और सत्ताधारी पार्टी के काम गिनाने में जुट गए है।