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GPF: सामान्य भविष्य निधि में सरकारी कर्मियों को झटका, ब्याज दर में बढ़ोतरी नहीं, 5 साल से 7.1 फीसदी पर अटकी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 05 Jul 2024 03:08 PM IST
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सार
वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने 'एक जुलाई से 30 सितंबर' तिमाही के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड और उससे मिलते जुलते अन्य प्रोविडेंट फंड के लिए ब्याज की दरें घोषित की हैं। सरकारी कर्मियों को इस बार एनडीए सरकार से जनरल प्रोविडेंट फंड की दरों में बदलाव किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्रालय ने ब्याज की दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। लंबे समय से ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है। 
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GPF: Shock to government employees in General Provident Fund no increase in interest rate, stuck for 5 years
GPF - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्र सरकार ने 2024-25 में 'जुलाई से सितंबर' तिमाही के लिए सामान्य भविष्य निधि 'जीपीएफ' पर मिलने वाले ब्याज की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले पांच वर्षों से ब्याज दरें एक ही प्वाइंट पर अटकी हैं। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने तीन जुलाई को जीपीएफ की ब्याज दरों की घोषणा की है। इसमें कहा गया है कि इस तिमाही के लिए भी ब्याज की दर 7.1 फीसदी ही रहेगी। इससे पहले अप्रैल-जून की तिमाही में भी जीपीएफ की ब्याज दर 7.1 फीसदी रही थी। 



एनडीए सरकार से थी ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद ... 
वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने 'एक जुलाई से 30 सितंबर' तिमाही के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड और उससे मिलते जुलते अन्य प्रोविडेंट फंड के लिए ब्याज की दरें घोषित की हैं। सरकारी कर्मियों को इस बार एनडीए सरकार से जनरल प्रोविडेंट फंड की दरों में बदलाव किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्रालय ने ब्याज की दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। लंबे समय से ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है। 


कोरोना के दौरान भी नहीं बढ़ाई गईं दरें
वर्ष 2021-22 के दौरान सामान्य भविष्य निधि तथा उसी प्रकार की अन्य निधियों के अभिदाताओं की कुल जमा रकमों पर दी जाने वाली ब्याज दर एक जुलाई 2021 से लेकर सितंबर 2021 तक 7.1 फीसदी रखी गई थी। आर्थिक कार्य विभाग के 19 अप्रैल 2021 को जारी संकल्प में भी सामान्य भविष्य निधि की राशि पर ब्याज दर 7.1 फीसदी तय की गई थी। उस वक्त देश में कोरोना की दूसरी लहर ने अपना कहर बरपा रखा था। तब केंद्रीय कर्मियों का महंगाई भत्ता भी 18 माह से रोका गया था। इसी वजह से कर्मियों को यह उम्मीद थी कि सरकार 'जीपीएफ' की राशि पर मिलने वाले ब्याज की दरों में बढ़ोतरी करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका। एक जुलाई 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 तक जीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की दर 7.1 फीसदी रखी गई थी। 

इन विभागों में लागू होती हैं दरें
ये दरें सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएं), अंशदायी भविष्य निधि (भारत), अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि, राज्य रेलवे भविष्य निधि (रक्षा सेवाएं), भारतीय आयुद्ध विभाग भविष्य निधि, भारतीय आयुद्ध कारखाना कामगार भविष्य निधि, भारतीय नौसेना गोदी कामगार भविष्य निधि, रक्षा सेवा अधिकारी भविष्य निधि और सशस्त्र सेना कार्मिक भविष्य निधि पर लागू होती हैं। जीपीएफ में जमा कर्मियों की राशि पर बैंकों के मुकाबले ब्याज अधिक मिलता है, इसलिए बहुत से कर्मचारी अपना शेयर बढ़ा देते हैं। जीपीएफ में ज्यादा वेतन इसलिए कटवाया जाता था, ताकि कर्मचारी अपनी बड़ी जरूरत के समय इसका इस्तेमाल कर सकें। 

अब वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय
कर्मचारी अपने जीपीएफ में से 90 फीसदी राशि निकाल सकते हैं। हालांकि इस लेकर नियम-शर्तें बदलती रहती हैं। बच्चों की शिक्षा, शादी, घर बनाना या उसके लिए प्लॉट खरीदना, फ्लैट लेना है, पुश्तैनी मकान की मरम्मत करानी है और घर का लोन चुकाना है, जैसे कामों में जीपीएफ राशि काम आ जाती है। दो वर्ष पहले केंद्र सरकार ने एक वित्त वर्ष में जनरल प्रोविडेंट फंड में वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय कर दी थी। नए प्रावधान के अनुसार, एक वित्त वर्ष में जीपीएफ खाते में जमा की गई कुल राशि पांच लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती है।

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