{"_id":"688766e818d2cba313004786","slug":"google-officials-depose-before-ed-in-online-betting-linked-pmla-case-2025-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"ED: ऑनलाइन सट्टेबाजी की जांच के मामले में ईडी के सामने पेश हुए गूगल के अधिकारी, मेटा ने नहीं दर्ज कराया बयान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ED: ऑनलाइन सट्टेबाजी की जांच के मामले में ईडी के सामने पेश हुए गूगल के अधिकारी, मेटा ने नहीं दर्ज कराया बयान
Mon, 28 Jul 2025 05:32 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 28 Jul 2025 05:32 PM IST
सार
ED: गूगल के अधिकारियों ने सोमवार को ईडी के सामने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के प्रचार से जुड़े धनशोधन मामले में बयान दर्ज कराया, जबकि मेटा के अधिकारी पेश नहीं हुए। ईडी जानना चाहती है कि ऐसे प्लेटफॉर्म गूगल और अन्य सोशल मीडिया पर विज्ञापन कैसे चलाते हैं; कुछ अभिनेता और खिलाड़ी भी जांच के घेरे में हैं।
विज्ञापन
ED
- फोटो : Adobe Stock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गूगल के प्रतिनिधियों ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ खेलने वाले 'अवैध' प्लेटफॉर्म के प्रचार से जुड़ी धनशोधन जांच के तहत बयान दर्ज कराया। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि मेटा के अधिकारियों ने बयान दर्ज नहीं कराया है। ईडी ने दोनों टेक कंपनियों के अधिकारियों को पहले 21 जुलाई को बुलाया था, लेकिन बाद में उन्हें अधिक समय देते बयान दर्ज करने की तारीख 28 जुलाई तक बढ़ा दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में ईडी गूगल के एक अनुपालन अधिकारी का भी बयान दर्ज कर सकती है और कंपनी से कुछ दस्तावेज भी प्राप्त कर सकती है।
ये भी पढ़ें: अदालत ने जस्टिस वर्मा से पूछा- पहले कोर्ट क्यों नहीं आए? 'नकदी विवाद' पर अब 30 जुलाई को सुनवाई
विज्ञापन
गूगल के एक प्रवक्ता ने पिछले हफ्ते पीटीआई को बताया था कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाए रखने और अवैध जुआ विज्ञापनों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा था, हम पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं, ताकि दोषी लोगों को जिम्मेदार ठहराया जा सके और उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) की सुरक्षा हो।
मेटा ने नहीं दर्ज कराया बयान
मेटा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसे पहले फेसबुक के नाम से जाना जाता था। केंद्रीय एजेंसी कई ऐसे प्लेटफॉर्म की जांच कर रही है, जो अवैध सट्टेबाजी और जुआ से जुड़े लिंक होस्ट करते हैं। साथ ही ऐसे विज्ञापनों की भी जांच कर रही है, जो विभिन्न सोशल मीडिया और ऐप स्टोर पर दिखाए गए हैं।
जांच के दायर में अभिनेता और खिलाड़ी
ईडी ने इन टेक दिग्गजों को बुलाकर यह पता लगाने की कोशिश की है कि ये अवैध प्लेटफॉर्म उनके प्लेटफॉर्म पर कैसे विज्ञापन देते हैं। कुछ अभिनेता, सेलिब्रिटी और खिलाड़ी भी इस जांच के दायरे में हैं और उनसे भी बयान लिए जाने की संभावना है।
ये भी पढ़ें: हरिद्वार मंदिर में रिसीवर नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, उत्तराखंड सरकार को जारी किया नोटिस
कर चोरी और धनशोधन करते हैं सट्टेबाज
ईडी का दावा है कि अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ खेलने वाले प्लेटफॉर्म लोगों की कमाई का गबन करते हैं और करोड़ों रुपये की कर चोरी व धनशोधन करते हैं। गूगल ने यह भी कहा कि उनकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक और मानव विशेषज्ञता निरंतर सुनिश्चित करती है कि उनके प्लेटफॉर्म पर सभी विज्ञापन स्थानीय कानूनों और उनकी सख्त विज्ञापन नीतियों के अनुरूप हों और यूजर्स को बढ़ते खतरे से बचाएं।
गूगल ने पिछले साल 2.47 करोड़ अवैध विज्ञापन हटाए
उन्होंने बताया कि पिछले साल भारत में उन्होंने 2.47 करोड़ से ज्यादा अवैध विज्ञापन हटाए और 29 लाख से अधिक विज्ञापन देने वाले खातों को निलंबित किया। ईडी देशभर में अवैध जुआ और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से जुड़े दर्जनों मामलों की जांच कर रही है, जिनमें महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) ऐप भी शामिल है, जिसके मुख्य प्रमोटर छत्तीसगढ़ के हैं।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि मेटा के अधिकारियों ने बयान दर्ज नहीं कराया है। ईडी ने दोनों टेक कंपनियों के अधिकारियों को पहले 21 जुलाई को बुलाया था, लेकिन बाद में उन्हें अधिक समय देते बयान दर्ज करने की तारीख 28 जुलाई तक बढ़ा दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में ईडी गूगल के एक अनुपालन अधिकारी का भी बयान दर्ज कर सकती है और कंपनी से कुछ दस्तावेज भी प्राप्त कर सकती है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: अदालत ने जस्टिस वर्मा से पूछा- पहले कोर्ट क्यों नहीं आए? 'नकदी विवाद' पर अब 30 जुलाई को सुनवाई
विज्ञापन
गूगल के एक प्रवक्ता ने पिछले हफ्ते पीटीआई को बताया था कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाए रखने और अवैध जुआ विज्ञापनों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा था, हम पूरा सहयोग प्रदान कर रहे हैं, ताकि दोषी लोगों को जिम्मेदार ठहराया जा सके और उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) की सुरक्षा हो।
मेटा ने नहीं दर्ज कराया बयान
मेटा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसे पहले फेसबुक के नाम से जाना जाता था। केंद्रीय एजेंसी कई ऐसे प्लेटफॉर्म की जांच कर रही है, जो अवैध सट्टेबाजी और जुआ से जुड़े लिंक होस्ट करते हैं। साथ ही ऐसे विज्ञापनों की भी जांच कर रही है, जो विभिन्न सोशल मीडिया और ऐप स्टोर पर दिखाए गए हैं।
जांच के दायर में अभिनेता और खिलाड़ी
ईडी ने इन टेक दिग्गजों को बुलाकर यह पता लगाने की कोशिश की है कि ये अवैध प्लेटफॉर्म उनके प्लेटफॉर्म पर कैसे विज्ञापन देते हैं। कुछ अभिनेता, सेलिब्रिटी और खिलाड़ी भी इस जांच के दायरे में हैं और उनसे भी बयान लिए जाने की संभावना है।
ये भी पढ़ें: हरिद्वार मंदिर में रिसीवर नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, उत्तराखंड सरकार को जारी किया नोटिस
कर चोरी और धनशोधन करते हैं सट्टेबाज
ईडी का दावा है कि अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ खेलने वाले प्लेटफॉर्म लोगों की कमाई का गबन करते हैं और करोड़ों रुपये की कर चोरी व धनशोधन करते हैं। गूगल ने यह भी कहा कि उनकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक और मानव विशेषज्ञता निरंतर सुनिश्चित करती है कि उनके प्लेटफॉर्म पर सभी विज्ञापन स्थानीय कानूनों और उनकी सख्त विज्ञापन नीतियों के अनुरूप हों और यूजर्स को बढ़ते खतरे से बचाएं।
गूगल ने पिछले साल 2.47 करोड़ अवैध विज्ञापन हटाए
उन्होंने बताया कि पिछले साल भारत में उन्होंने 2.47 करोड़ से ज्यादा अवैध विज्ञापन हटाए और 29 लाख से अधिक विज्ञापन देने वाले खातों को निलंबित किया। ईडी देशभर में अवैध जुआ और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से जुड़े दर्जनों मामलों की जांच कर रही है, जिनमें महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) ऐप भी शामिल है, जिसके मुख्य प्रमोटर छत्तीसगढ़ के हैं।