{"_id":"68875c478b16c95f8b0957bd","slug":"supreme-court-issues-notice-to-uttarakhand-on-plea-over-haridwar-temple-receiver-appointment-2025-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: हरिद्वार मंदिर में रिसीवर नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, उत्तराखंड सरकार को जारी किया नोटिस","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: हरिद्वार मंदिर में रिसीवर नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, उत्तराखंड सरकार को जारी किया नोटिस
Mon, 28 Jul 2025 04:47 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 28 Jul 2025 04:47 PM IST
सार
हरिद्वार स्थित मां चंडी देवी मंदिर के "सेवायत" द्वारा दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिना किसी सबूत और शिकायत के मंदिर का नियंत्रण एक समिति को सौंप दिया, जबकि हाईकोर्ट द्वारा 2012 में ही हरिद्वार के डीएम और एसएसपी की एक समिति गठित की जा चुकी थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हरिद्वार स्थित मां चंडी देवी मंदिर के "सेवायत" द्वारा दायर याचिका पर उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई है। जिसमें बद्री-केदार मंदिर समिति को मंदिर के प्रबंधन के लिए एक रिसीवर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बद्री केदार मंदिर समिति द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय याचिका के परिणाम के अधीन होगा। वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और अधिवक्ता अश्विनी दुबे हरिद्वार स्थित मां चंडी देवी मंदिर के याचिकाकर्ता महंत भवानी नंदन गिरि की ओर से पेश हुए।
विज्ञापन
गिरि ने शीर्ष अदालत में अपनी याचिका में कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिना किसी सबूत और शिकायत के मंदिर का नियंत्रण एक समिति को सौंप दिया, जबकि हाईकोर्ट द्वारा 2012 में ही हरिद्वार के डीएम और एसएसपी की एक समिति गठित की जा चुकी थी।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता ने किया यह दावा-
याचिकाकर्ता का यह भी तर्क है कि रिसीवर नियुक्त करने का निर्देश एक आपराधिक मामले में एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जो प्रक्रिया के दायरे से बाहर है। मां चंडी देवी मंदिर की स्थापना 8वीं शताब्दी में जगद्गुरु श्री आदि शंकराचार्य ने की थी और तब से याचिकाकर्ता के पूर्वज इस मंदिर की 'सेवायत' के रूप में देखरेख करते आ रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त हरिद्वार के डीएम और एसएसपी की समिति ने न तो एक भी शिकायत दर्ज की है और न ही कुप्रबंधन या गबन का कोई सवाल उठाया है।
याचिका में कहा, हाईकोर्ट ने मनमाने, अवैध और विकृत निर्देश पारित किए हैं। याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि हाईकोर्ट ने नोटिस जारी नहीं किया और विवादित निर्देश पारित कर दिए। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने मंदिर का कार्य बद्री केदार मंदिर को "गलती से" सौंप दिया, बिना यह समझे कि हरिद्वार के डीएम और एसएसपी वाली समिति पूरी लगन से काम कर रही है। याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि हाईकोर्ट ने नोटिस जारी नहीं किया और विवादित निर्देश पारित कर दिए।
ये भी पढ़ें: Operation Mahadev: सेना ने डिटेक्ट किया पहलगाम हमले जैसे कम्युनिकेशन, उसको तस्दीक करने में खुफिया तंत्र जुटा
क्या है मामला?
हाईकोर्ट ने यह आदेश रीना बिष्ट नाम की एक महिला द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था। जिसने मंदिर के मुख्य पुजारी रोहित गिरि की लिव-इन पार्टनर होने का दावा किया था। रोहित की पत्नी गीतांजलि ने 21 मई को अपने पति रीना बिष्ट और सात अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि बिष्ट ने 14 मई को उनके बेटे को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की थी। उसी दिन रोहित को पंजाब पुलिस ने छेड़छाड़ के एक अलग मामले में गिरफ्तार कर लिया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
हाईकोर्ट ने पाया कि रोहित रीना बिष्ट के साथ रह रहा था जब उसकी तलाक की कार्यवाही लंबित थी और बिष्ट ने जनवरी में उनके बच्चे को जन्म दिया। कोर्ट ने कहा कि मंदिर के ट्रस्टी एक विषैली स्थिति बना रहे हैं और ट्रस्ट में पूरी तरह अव्यवस्था है। यह भी नकारा नहीं जा सकता कि दान राशि के दुरुपयोग की आशंका हो सकती है।