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FSSAI: अब घर की रसोई में लौटेगी आयुर्वेद की पारंपरिक रेसिपी, एफएसएसएआई ने जारी किया स्वस्थ व्यंजन संग्रह

Mon, 06 Jul 2026 05:01 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 06 Jul 2026 05:01 AM IST
सार

एफएसएसएआई ने आयुर्वेदिक खान-पान को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक व्यंजनों का नया संग्रह जारी किया है। इसमें सैकड़ों आयुर्वेदिक रेसिपी, उनकी सामग्री, बनाने की विधि, आयुर्वेदिक गुण, लाभ और सावधानियां शामिल हैं, ताकि आम लोग, छात्र और चिकित्सक इसका आसानी से उपयोग कर सकें। पढ़ें पूरी खबर...

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अब रसोई में लौटेंगी आयुर्वेद की पारंपरिक रेसिपी - फोटो : एडोब स्टॉक

विस्तार

अगर आप स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेदिक खान-पान अपनाना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि कौन-सा भोजन कैसे बनाया जाए, तो अब यह काम आसान होने वाला है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आयुर्वेद आहार व्यंजनों का संग्रह तैयार किया है। इसमें प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में दी गई सैकड़ों पारंपरिक रेसिपी को आधुनिक और व्यवस्थित रूप में पेश किया गया है।
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जारी की गई सूची में क्या?
इस संग्रह में केवल भोजन पकाने का तरीका ही नहीं, बल्कि हर व्यंजन के साथ उसकी सामग्री, बनाने की विधि, आयुर्वेदिक गुण, लाभ और सावधानियों की भी जानकारी दी गई है। अब तक यह जानकारी अलग-अलग संस्कृत ग्रंथों में बिखरी हुई थी, जिसे समझना आम लोगों के लिए बहुत मुश्किल था। इसके अलावा चिकित्सक, छात्र और शोधकर्ता भी इसका बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे। संग्रह में केवल औषधीय पेय ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के कई प्रकार के व्यंजन शामिल हैं। इनमें दही आधारित रेसिपी, सत्तू के अलग-अलग प्रकार, चावल की पेज और दलिया, छाछ, जौ, दूध, तिल व अदरक जैसी सामान्य सामग्री से बनने वाले पकवान शामिल हैं। 
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सामग्री की सटीक मात्रा का भी उल्लेख
किताब में स्पष्ट किया गया है कि कौन-सी सामग्री कितनी मात्रा में लेनी है। उदाहरण के लिए द्वितीय शिखरिणी नाम की रेसिपी में दही, शहद, घी, दालचीनी, इलायची और काली मिर्च का उपयोग बताया गया है। आयुर्वेद में इसे पाचन शक्ति बढ़ाने और पोषण देने वाला माना गया है। इसी तरह जौ और मसूर सत्तू की भी पूरी विधि दी गई है। सरकार का मकसद आयुर्वेदिक खान-पान को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ना है, ताकि लोग केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय स्वस्थ भोजन की भारतीय परंपरा अपनाएं।
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