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पांच करोड़ घरों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार, कैसे लगेगी लगाम

Sat, 31 Oct 2020 05:52 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 31 Oct 2020 05:52 PM IST
सार

  • देश के करीब पांच करोड़ घरों में अभी भी एलपीजी आधारित सेवा नहीं
  • देश में सक्रिय गैस कनेक्शनों की संख्या 01 अप्रैल 2018 को 22.4 करोड़ थी

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five crore homes are using coal in India, responsible for air pollution
दिल्ली में प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

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वायु प्रदूषण कई कारणों से बढ़ता है, जिनमें वाहनों-औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं के अलावा गैर-एलपीजी कनेक्शन वाले घरों से निकलने वाला धुआं भी बड़ी भूमिका निभाता है। पेट्रोलियम मंंत्रालय के एक अनुमान के मुताबिक देश में अभी भी लगभग हर पांचवां घर खाना बनाने के लिए कुकिंग गैस की बजाय अन्य साधनों का उपयोग करता है। यह संख्या पांच करोड़ परिवारों तक हो सकती है। इन घरों में भोजन पकाने के लिए अभी भी गोबर, लकड़ी, कोयला जैसे साधनों का इस्तेमाल होता है, जिससे वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन परिवारों को एलपीजी आधारित गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जा सके तो इससे प्रदूषण में कमी की जा सकती है।

 

बीएस-6 वाहनों का इस्तेमाल बढ़े

ऊर्जा विशेषज्ञ पूर्व सचिव अजय शंकर के अनुसार वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण बीएस-6 मानक वाहनों के आने के बाद धीरे-धीरे कम हो जाएगा। अगर एक पॉलिसी बनाकर पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने और उनकी जगह बीएस-6 वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाया जाता है, तो वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण बहुत हद तक कम किया जा सकता है। ई-वाहनों और सोलर वाहनों के आने से भी वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण में लगातार कमी आ रही है। ध्यान रहे कि यूरोप और अमेरिका में अच्छे मानक लागू होने के कारण वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण अब बड़ा मुद्दा नहीं रह गया है।

लेकिन घरेलू ईंधन उपायों में लकड़ी-गोबर-कोयले के इस्तेमाल से काफी प्रदूषण पैदा होता है जो महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ पूरे देश के लिए भारी पड़ता है। इसलिए इससे निजात पाने की कोशिशें की जानी चाहिए।

 

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क्या हैं आंकड़े

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2008-09 में देश में घरेलू ईंधन के लिए कुल एलपीजी कनेक्शन की संख्या 10.6 करोड़ थी, जो अगले दस वर्षों में लगभग दोगुनी हो गई। 2017-18 में घरेलू ईंधन के लिए कुल कनेक्शन की संख्या 26.3 करोड़ हो गई थी। इस प्रकार एलपीजी गैस की खपत भी 1.06 करोड़ टन से बढ़कर 2.04 करोड़ टन हो गई। एलपीजी ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी के पीछे पीएम उज्जवला योजना को सबसे बड़ा कारण माना गया है। 

मई 2016 में इस योजना की शुरुआत के समय निम्न आय वर्ग के पांच करोड़ परिवारों तक गैस कनेक्शन पहुंचाने की घोषणा हुई थी, जिसे फरवरी 2018 के बजट में बढ़ाकर आठ करोड़ कर दिया गया था। हालांकि, रिफिलिंग के आंकड़ों के आधार पर इनमें से काफी कनेक्शन दोबारा सक्रिय नहीं पाए गए थे। सक्रिय गैस कनेक्शनों की संख्या 1 अप्रैल 2018 को 22.4 करोड़ ही पाई गई थी। कुल एलपीजी की खपत में घरेलू ईंधन और गैर-घरेलू उपयोग का अनुपात पिछले दस वर्षों से लगभग 86-88 फीसदी के स्तर पर बना हुआ है। 

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