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सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान, बोले- 'बर्फबारी से नहीं लगा डर, जीत से पहले नहीं लौटेंगे घर'

Mon, 04 Jan 2021 06:45 AM IST
Kuldeep Singh सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 04 Jan 2021 06:45 AM IST
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Farmers said No fear of snowfall, will not return home before victory
मोहाली निवासी राजिन्दर सिंह - किसान - फोटो : self

सिंघु बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में डटे 63 वर्षीय राजिन्दर सिंह बाली को सर्दी की चिंता और न ही बारिश का खौफ है। किसानों के हक की इस लड़ाई में जीत मिलने पर ही लौटेंगे। चीन की सीमा पर सामान पहुंचाने के दौरान फंसे ट्रक को जिस तरह अपने साथ लेकर लौटा, किसानों की जीत के बाद ही ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ पंजाब लौटेंगे।

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किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोहाली निवासी राजिन्दर सिंह ने कहा कि पिछले करीब एक महीने से किसानों के साथ हैं। रात के वक्त अपनी कार को ही आशियाना बना लेते हैं तो सुबह होने पर कृषि कानूनों के विरोध के लिए तैयार हो जाते हैं।
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तीनों बॉर्डरों पर डटे रहे किसान 
राजधानी में रविवार को दिनभर हुई बारिश की बौछार दिल्ली के तीनों बॉर्डरों पर डटे किसानों के हौंसले के आगे हल्की पड़ी। सिंघु, टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर पर जहां कुछ किसानों ने भीगकर रोष जताया वहीं, कुछ किसानों ने बारिश से बचने के लिए अन्य किसानों की मदद की। रूक- रूक हो रही बूंदाबांदी की वजह से अधिकतर किसानों ने ट्रॉलियों व टेंट में ही आश्रय लिया व आगे की रणनीति तय की।
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पेशे से ड्राइवर बाली ने बताया कि डेढ़ करीब डेढ़ महीने पहले चीन की सीमा तक बिजली के पोल पहुंचाने गए। बर्फ़बारी की वजह से ट्रक फंस जाने की वजह से बॉर्डर पर दो दिन रुकना पड़ा। हर तरफ बर्फ से किसी तरह बचाव किया, क्योंकि ट्रक के बगैर न लौटने की कसम खा ली थी। आखिरकार 2 दिन बाद जब आर्मी की गाड़ी ने बर्फ हटाया तो बाली भी अपना ट्रक लेकर लौटे।

बाली ने कहा जिस तरह ट्रक को बीच में नहीं छोड़ा, ठीक उस तरह किसानों के अधिकार मिलने के बाद ही घर लौटेंगे। बाली की पुत्री एक स्कूल में वाइस प्रिंसिपल है तो बेटा इंजीनियर। लेकिन किसान परिवार से ताल्लुक होने का दर्द समझते हुए उम्र की परवाह किए बगैर किसानों के साथ सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं।

सरकार और सेलिब्रिटीज के खिलाफ जता रहे हैं रोष
सरकार और सेलिब्रिटीज के रवैये के खिलाफ रोष जताने के लिए अपनी कार पर ही पोस्टर लगाए हुए हैं, जिनपर संदेश भी लिखे हैं। हालांकि इनमें कुछ ऐसे संदेश हैं, जिन्हें बयां नहीं किया जा सकता है।

बाली ने अभिनेत्री कंगना, सनी दिओल, सांसद हंस राज हंस, प्रधानमंत्री के अलावा यूपी और हरियाणा के सीएम के पोस्टर पर मैसेज लिखकर विरोध जताया है। सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि पहले आतंकी फाइल असली नकली किसान बताकर आंदोलन कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ये  गलत है, और किसानों में इस बात को रोष है।

बचाव के लिए और कड़े किए बंदोबस्त
बारिश के मौसम को देखते हुए सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने बचाव के लिए और कड़े बंदोबस्त कर दिए हैं। इसके लिए किसानों ने ट्रॉली के ऊपर तिरपाल की तीन परत चढ़ा दी हैं जिससे बारिश की एक बूंद भी ट्रॉली के भीतर न पहुंच सके। वहीं, खाना बनाने के लिए रखी गई लकड़ी व उपलों को भी तिरपाल से ढका गया है जिससे आग जलाने की सामग्री में नमी ना हो। अन्य किसानों की व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त वाटर प्रूफ टेंट की व्यवस्था भी की गई है जिनमें अधिक से अधिक किसान रात गुजार सके। 

बारिश में भी चलती रही लंगर सेवा
बॉर्डर पर रविवार को बारिश के बाद भी कुछ सेवादारों ने बारिश में भीग कर लंगर की सेवा को जारी रखा। वहीं, भीड़ को संभालने के लिए कुछ सेवादार भी दिनभर बारिश में भीगते रहे। इस दौरान कुछ सेवादारों ने ट्रॉलियों के नीचे बैठकर भी बारिश से बचते हुए लंगर की सेवा की। सेवादारों का कहना था कि वे किसी भी आपदा के आगे घुटने नहीं टेकेंगे बल्कि हिम्मत से डटकर प्रदर्शन में किसानों की सेवा करते रहेंगे।  

बारिश के वजह से चरमराई सफाई व्यवस्था 
सिंघु बॉर्डर पर बारिश की वजह से सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। इस वजह से कीचड़ और गंदगी की स्थिति बनी रही। पैदल चलने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, कुछ सेवादारों ने अल सुबह ही पानी निकासी के लिए इंतजाम कर दिए थे जिससे बारिश का पानी सड़क किनारे से होकर बड़े गड्ढों में पहुंच सके। वहीं, कुछ सेवादारों ने कीचड़ की सफाई के लिए दिनभर मोर्चा संभाले रखा। 

टीकरी बॉर्डर: बारिश कम, ठिठुरन ज्यादा
दिल्ली के तमाम इलाकों में रविवार सुबह 4 बजे से ही रह रह कर जून-जुलाई जैसी मूसलाधार बारिश हुई। जबकि टीकरी बॉर्डर पर इंद्रदेव किसानों पर मेहरबान रहे और यहां हल्की बूंदाबांदी कर वापस चले गए। लेकिन सुबह से दोपहर तक दिल्ली में जबरदस्त बरसात होने से टीकरी बॉर्डर का तापमान नीचे चला गया था, यहां जबरदस्त ठिठुरन थी। ठंड से बचने के लिए जगह-जगह पर अलाव जलाए गए थे।

टीकरी बॉर्डर पर बरसात कम हुई जिसकी वजह से दिल्ली की दूसरी सीमाओं पर डटे किसानों की अपेक्षा यहां के किसानों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। सुबह से दोपहर तक कई बार बूंदाबांदी हुई, लेकिन किसानों का हौसला टस से मस नहीं हुआ। मंच पर रोज की तरह सरकार के खिलाफ भाषण चलता था। किसानों के जोश और आक्रोश में किसी तरह की कमी नजर नहीं आ रही थी।

भारतीय किसान यूनियन संगरूर के सदस्य पुरुषोत्तम सिंह ने कहा कि आज एक और किसान भाई ने काले कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते हुए बलिदान दे दिया। लेकिन किसानों का मनोबल इस बात से टूटने वाला नहीं है। वह जिस दिन घर से निकले, उसी दिन तय कर लिया था कि चाहे जान चली जाएगी, सरकार के फैसले बदल कर ही वापस लौटेंगे।

गुरमीत सिंह ने कहा कि हरियाणा और दिल्ली के लोग उनके के साथ हैं। वह खाने-पीने से लेकर दवा का भी इंतजाम करा रहे हैं। सर्दी और बीमारी से किसी की जान जाती है तो जाए। लेकिन किसान किसी से डरकर अब दिल्ली से वापस नहीं जाएगा।

रविवार को टीकरी बॉर्डर पर जींद के किसानों ने भारी मात्रा में दूध ला कर बंटवाया। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) जींद के सदस्य रामराजी धुल ने बताया कि शनिवार को भी एक हजार लीटर दूध ला कर यहां के किसानों के बीच बांटा गया था। किसानों को मनमर्जी दूध प्रदान किया गया। ताकि सर्दी से बचने के लिए वह अधिक से अधिक इसका सेवन कर सकें।

गाजीपुर बॉर्डर: बारिश के कारण किसानों को हुई परेशानी
गाजीपुर बॉर्डर पर डटे हुए किसानों के लिए रविवार की सुबह कुछ अलग थी। करीब पांच बजे तेज बारिश के साथ उनकी आंखे खुली। कई शिविरों में बारिश का पानी पहुंच गया।  उनके बिस्तर और अन्य सामान गिला हो गया। इससे उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लगातार हो रही बारिश से बचने के लिए किसानों को गाजीपुर प्लाईओवर के नीचे जाना पड़ा।

वहीं, कुछ किसानों ने ट्रालियों के नीचे शरण ली। खराब मौसम के चलते रविवार को मंच का संचालन भी नहीं किया गया। इस सबके बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ है। ऐसे मौसम में भी वह पूरी ताकत के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर टीके हुए हैं।

प्रदर्शनकारी किसान अजय बलियान ने बताया कि सुबह करीब पांच वह अपने टेंट में सो रहे थे। अचानक बारिश होने लगी। इससे बचने के लिए उन्होंने टेंट के ऊपर तिरपाल लगाई और खुद का बचाव किया। कई किसान शिविरों से निकलकर प्लाईओवर के नीचे पहुंच गए। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण करीब 50 से 70 टेंट में पानी चला गया था।

यह सभी शिविर हाइवे की ढलान पर बने हुए थे। किसान मलूक सिंह ने बताया कि भारी बारिश के कारण धरना स्थल के आसपास जलभराव हो गया था। वालंटिययर सुबह से ही पानी कि निकासी और साफ-सफाई में लगे हुए थे। दोपहर तक यही सिलसिला चलता रहा। उन्होंने कहा कि कई टेंट को हटाना पड़ा है।


तेज बारिश के कारण टेंट पूरी तरह गिले हो गए हैं। उनके स्थान पर तिरपाल लगाई गई है। इससे आने वाले दिनों में बारिश से बचाव किया जा सकेगा। मलूक सिंह ने बताया कि जो टेंट वाटर प्रूफ थे। वह सुरक्षित हैं। कई किसानों ने दिनभर इन टेंट में भी शरण ली।    - सर्वेश, किशन, आदित्य पांडेय, अभिषेक पांचाल

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