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केंद्र और महाराष्ट्र सरकार गैर कोरोना रोगियों का इलाज सुनिश्चित करें: बॉम्बे हाईकोर्ट
Fri, 24 Apr 2020 12:05 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: अनवर अंसारी
Updated Fri, 24 Apr 2020 12:05 PM IST
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bombay high court
बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को गैर कोविड-19 मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने को कहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार उन मरीजों के लिए इलाज सुनिश्चित करने का समाधान खोजें, जो कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में पूरा ध्यान कोरोना वायरस मरीजों के इलाज पर लगाया जा रहा है, लेकिन ऐसे में अन्य मरीजों को चिकित्सा उपचार से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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न्यायमूर्ति के आर श्रीराम ने गुरुवार को तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि कई पुरानी या गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें पाया गया है कि इन मरीजों को क्लीनिक और अस्पतालों से वापस भेज दिया जा रहा है।
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याचिकाओं में वर्तमान समय में राज्य, नगरपालिका-संचालित और निजी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाओं और चिकित्सा बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दों को उजागर किया गया है।
न्यायाधीश ने अधिकारियों को इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने के लिए कहते हुए, महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को 29 अप्रैल तक दलीलों का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
केंद्र के वकील एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी तरह की याचिका पर सुनवाई की, जिसको लेकर जल्द ही केंद्र सरकार जरूरी कदम उठाएगी। सिंह ने कहा कि इसलिए हाईकोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार को जवाब दायर करने की कोई जरूरत नहीं है।
न्यायाधीश श्रीराम ने कहा कि मैं अपेक्षा करता हूं कि संबंधित लोग इन याचिकाओं को गंभीरता से लेंगे और अपने हलफनामों में एक प्रभावी समाधान के साथ आएंगे। उन्होंने कहा कि अन्य उत्तरदाता भी अपने सुझाव निगम/ राज्य सरकार/ केंद्र सरकार को दे सकते हैं।
यह याचिका दो अधिवक्ताओं और मुंबई शहर के एक कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई। इसमें कहा गया है कि समाचार रिपोर्टों और उनके स्वयं के निष्कर्षों के अनुसार, कई गैर कोरोना मरीजों को भर्ती करने और उनके इलाज के लिए मना किया जा रहा है।
मेडिकल स्टाफ द्वारा ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उन्हें अपने अस्पतालों और क्लीनिकों में कोरोना वायरस के फैलने की आशंका है। साथ ही डॉक्टरों, तकनीशियनों, चिकित्सा कर्मचारियों, अस्पताल के बेड, सुरक्षात्मक किटों की कमी के चलते भी मरीजों को इलाज से इनकार किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष ऐसे कई उदाहरणों का हवाला दिया।