Earthquake: 15 घंटे में 13 बार हिली नेपाल की धरती, अभी टला नहीं है दिल्ली-एनसीआर में भूकंप का खतरा!
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विस्तार
नेपाल के पश्चिमी हिस्से में आए मंगलवार को भूकंप के बाद सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। क्योंकि नेपाल में मंगलवार दोपहर दो बजे से लेकर बुधवार की सुबह पांच बजे तक लगातार धरती का हिलना जारी रहा। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक इन 15 घंटों में नेपाल के पश्चिमी इलाके में बने एपिसेंटर से 13 बार नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में भी धरती का कंपन महसूस किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरीके से लगातार प्रत्येक घंटे में औसतन चार की तीव्रता से ज्यादा वाले भूकंप नेपाल में आ रहे हैं, वह खतरे की ओर इशारा भी कर रहे हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरीके के आफ्टर शॉक्स लगातार बने हुए हैं और तीव्रता बढ़ती है तो निश्चित तौर पर खतरा भी बड़ा हो सकता है। जिसका उसका असर नेपाल के साथ-साथ भारत के अलग अलग हिस्सों समेत दिल्ली-एनसीआर तक में देखा जा सकता है।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में पहली बार मंगलवार को भूकंप दो बजकर 25 मिनट पर 4.6 की तीव्रता का आया था। उसके ठीक 26 मिनट बाद यानी दो बजकर मिनट पर नेपाल में जबरदस्त तरीके की धरती हिली। उस वक्त भूकंप की तीव्रता 6.2 की आंकी गई। यही वह दो भूकंप के झटके थे, जिन्हें दिल्ली-एनसीआर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में जबरदस्त तरीके से महसूस किया गया। आंकड़े बताते हैं कि नेपाल में इन दो बड़े झटकों के बाद एक नियमित अंतराल पर लगातार बुधवार की सुबह तक भूकंप के झटके आते रहे। इन दो झटकों के बाद मंगलवार दोपहर बाद तीन बजे से लेकर चार बजे के अंतराल में तीन और भूकंप के झटके नेपाल में महसूस किए गए। इन तीनों झटकों की रिक्टर स्केल पर तीव्रता साढ़े तीन की आंकी गई।
नेपाल में महज दो घंटे के भीतर आए पांच बड़े झटकों से सिर्फ नेपाल ही नहीं बल्कि आसपास की इलाकों और भारत में भी दहशत का माहौल बन गया। नेपाल मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पांच बजे से लेकर शाम साढ़े सात बजे के बीच में तीन और भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसमें दो भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर पांच आंकी गई। नेपाल के कैलाली जिले में रहने वाले पत्रकार राजगुरु थापा ने अमर उजाला डॉट कॉम से बताया कि मंगलवार को दोपहर और शाम पांच बजे के बाद लगातार झटके महसूस होते रहे। वह कहते हैं कि नेपाल के मौसम विभाग के आंकड़ों में दर्ज भूकंप के झटकों की संख्या में कोई कमी नहीं देखी गई। नेपाल के इसी इलाके में रात को 12 बजे से लेकर साढ़े बारह बजे यानी आधे घंटे के भीतर तीन बार और धरती में कंपन पैदा हुआ। उसके बाद एक बार फिर बुधवार को सुबह 4 बजे और फिर उसके डेढ़ घंटे बाद साढ़े पांच बजे नेपाल में भूकंप के झटके महसूस हुए।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के वैज्ञानिक संजय कुमार कहते हैं, क्योंकि यह झटके नेपाल के पश्चिमी हिस्से में आए थे, तो उसका असर उत्तर प्रदेश के लगते हुए बॉर्डर वाले जिलों समेत देश के उत्तर भारतीय राज्यों में तो महसूस ही किए गए। इस भूकंप की इंटेंसिटी इतनी ज्यादा नेपाल में थी कि इसके झटके गुजरात के कुछ इलाकों में भी महसूस किए गए। सिस्मोलॉजी सेंटर के वैज्ञानिक एसपी चंदेल बताते हैं कि जिस तरीके से नेपाल में 15 घंटे के भीतर 13 बार धरती हिली है, वह वैसे तो बड़े भूकंप के बाद आने वाले आफ्टर शॉक्स के तौर पर एक सामान्य घटना है। लेकिन आफ्टर शॉक्स की मापी गई तीव्रता औसतन साढ़े चार से पांच के बीच पाई है। चंदेल कहते हैं कि यही पॉइंट खतरनाक श्रेणी में माना जाता है। क्योंकि बड़े भूकंप की तीव्रता के बाद आने वाले आफ्टर शॉक्स की फ्रीक्वेंसी तो ज्यादा होती है, लेकिन उनकी तीव्रता फिर उसे पैमाने की तुलना में धीरे-धीरे कम होती जाती है। लेकिन नेपाल में इस बार के भूकंप के बाद या ट्रेंड नहीं दिखा है।
वह कहते हैं कि बुधवार की सुबह भी नेपाल के इलाके में आए भूकंप की तीव्रता का पैमाना चार के करीब ही था। यह कहना कि भूकंप का खतरा पूरी तरीके से नेपाल के इलाके समेत उत्तर भारतीय राज्यों में पूरी तरीके से टल गया है, ठीक नहीं है। भू वैज्ञानिकों का मानना है कि नेपाल में जब 6.2 की तीव्रता का भूकंप आया, तो दिल्ली-एनसीआर में महसूस किए गए भूकंप की तीव्रता तीन से ज्यादा की थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जितना नेपाल के हिस्से में भूकंप के झटके आते रहेंगे, उतना ही उत्तर भारत खासतौर से दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाके डेंजर जोन में बने रहेंगे। वरिष्ठ भू वैज्ञानिक एसपी चंदेल कहते हैं कि वैसे तो नेपाल के जिस हिस्से में भूकंप आया वह तकरीबन दिल्ली-एनसीआर से साढ़े चार सौ किलोमीटर की दूरी पर है। फिर भी अगर उतनी ही तीव्रता या उससे ज्यादा की तीव्रता का भूकंप का केंद्र नेपाल के उस एपिसेंटर से सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर भारत के हिस्से में खिसक आता है, तो यह बहुत बड़ी तबाही भी ला सकती है। भूवैज्ञानिक चंदेल का मानना है कि लगातार रिक्टर स्केल पर ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप के बाद आफ्टर शॉक्स बड़े खतरे की निशानी माने जाते हैं। फिलहाल जिस तरीके के भूकंप के बाद के झटके नेपाल में आ रहे हैं, उन पर नजर बनाए रखने की बेहद आवश्यकता है। देखा यह भी जाना चाहिए कि क्या भूकंप के केंद्र में कोई बड़ा परिवर्तन तो नहीं हो रहा है। अगर अगर ऐसा दिख रहा है और उसका केंद्र बिंदु पश्चिम से दक्षिण में यानी कि भारत के क्षेत्र में शिफ्ट हो रहा है तो या बेहद चिंता की बात हो सकती है।