फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Due to increasing heat, cows' milk production has decreased drastically, climate crisis has affected the dairy

अध्ययन: गर्मी बढ़ने से गायों के दूध उत्पादन में भारी कमी, जलवायु संकट ने डेयरी सेक्टर पर डाला असर

Fri, 11 Jul 2025 08:36 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 11 Jul 2025 08:36 AM IST
सार

एक अंतरराष्ट्रीय शोध में खुलासा हुआ है कि जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ती गर्मी अब गायों के दूध उत्पादन को भी प्रभावित कर रही है। भारत जैसे देशों में रोज़ाना प्रति गाय 4% तक दूध उत्पादन घट सकता है। इससे पोषण प्रणाली और करोड़ों लोगों की आजीविका पर संकट गहराएगा।

विज्ञापन
Due to increasing heat, cows' milk production has decreased drastically, climate crisis has affected the dairy
गायों के दूध उत्पादन में कमी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण की चिंता नहीं बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा का बड़ा संकट बनता जा रहा है। इसका असर अब दूध के गिलास तक पहुंच रहा है। इस संबंध में किए गए अंतरराष्ट्रीय शोध में खुलासा हुआ है कि बढ़ती गर्मी का सीधा असर अब गायों के दूध उत्पादन पर पड़ने लगा है। इस अध्ययन में चेताया गया है कि गर्मी के कारण भारत जैसे देशों में हर दिन प्रति गाय दूध उत्पादन में औसतन 4% तक की गिरावट आ सकती है, जिससे न केवल देश की पोषण प्रणाली बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
विज्ञापन


शोध इस्राइल की हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ यरुशलम, तेल अवीव यूनिवर्सिटी और अमेरिकी शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा इस्राइल की डेयरी व्यवस्था को आधार बनाकर संयुक्त रूप से किया गया। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने इस्राइल की 1.3 लाख से अधिक गायों के 12 वर्षों (2010–2022) तक के दूध उत्पादन और मौसम संबंधी आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इसके अलावा 300 से अधिक डेयरी फार्मों से प्राप्त फील्ड डेटा और मौसम रिकॉर्ड के माध्यम से यह समझने की कोशिश की गई। अध्ययन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जर्नल ‘साइंस एडवांसेज’ में प्रकाशित हुआ है। इसमें यह भी बताया गया है कि भारत जैसे देशों के लिए शोध के निष्कर्ष और भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
विज्ञापन


शोधकर्ताओं ने बताया कि जब वेट-बल्ब तापमान यानी गर्मी और आर्द्रता का संयुक्त सूचकांक 26 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है तो गायों पर हीट स्ट्रेस का असर पड़ता है। इससे न केवल उनका चारा खाने का व्यवहार प्रभावित होता है बल्कि उनके शरीर की गर्मी नियंत्रण प्रणाली भी असफल हो जाती है, जिससे दूध उत्पादन में अचानक 10% तक की गिरावट देखी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह असर केवल एक दिन के लिए नहीं बल्कि 10 से अधिक दिनों तक बना रह सकता है। वेट बल्ब तापमान वातावरण की गर्मी और नमी दोनों को मिलाकर दर्शाता है। जब यह तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, तो यह इंसानों और पशुओं दोनों के लिए खतरनाक स्थिति बनाता है क्योंकि शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा नहीं कर पाता। भारत जैसे देशों में जहां गर्मी के साथ अत्यधिक आर्द्रता भी आम है, वहां गर्मियों के दौरान यह तापमान अक्सर 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे गायों में हीट स्ट्रेस बढ़ता है और दूध उत्पादन में गिरावट आती है।

ये भी पढ़ें:- Tariff Policy: अमेरिका ने कनाडा पर लगाया 35% टैरिफ, ट्रंप बोले- एक अगस्त से होगा लागू

भारत और दक्षिण एशिया सबसे अधिक जोखिम में
अध्ययन के अनुसार अगले दशक में दुनिया में जितनी दूध उत्पादन वृद्धि होगी उसका 50% से अधिक हिस्सा दक्षिण एशिया से आने की संभावना है। लेकिन यहीं पर गर्मी और उमस का खतरा सबसे अधिक है। भारत, पाकिस्तान और ब्राजील जैसे देश सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जहां प्रति गाय दूध उत्पादन में औसतन 3.5 से 4% तक की गिरावट आने की आशंका है।

तकनीकें मददगार लेकिन सीमित
इस्राइल में अधिकतर डेयरी फार्म वेंटिलेशन, पानी के छिड़काव और शेड जैसी कूलिंग तकनीकों का उपयोग करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि ये उपाय दूध उत्पादन में गिरावट को केवल 40–50% तक ही रोक पाते हैं। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है इन तकनीकों की प्रभावशीलता भी घटती जाती है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों का कहना है कि इन तकनीकों में निवेश फायदेमंद है, क्योंकि किसान 1से1.5 वर्षों में लागत निकाल सकते हैं।

भारत में दुग्ध अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। 2023 में 23.9 करोड़ टन दूध उत्पादन हुआ था। देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा डेयरी पर निर्भर करता है। लगभग 70% ग्रामीण परिवार दूध उत्पादन और पशुपालन से जुड़े हैं। ऐसे में गर्मी से यदि दूध उत्पादन प्रभावित होता है, तो इससे पोषण सुरक्षा, दूध की कीमतों और ग्रामीण रोजगार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

भारत में प्रति व्यक्ति दूध की खपत करीब 427 किलोग्राम प्रति वर्ष है जो वैश्विक औसत से लगभग चार गुना अधिक है। देश की अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र का योगदान 4.5% है और यह ग्रामीण आजीविका की रीढ़ बना हुआ है, क्योंकि लगभग 8 करोड़ ग्रामीण परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हुए हैं। खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के अनुमानों के अनुसार तापमान में प्रत्येक 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से दूध उत्पादन में 3 से 4 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है जो भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देश के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है।

ये भी पढ़ें:- Israel: अमेरिकी हमले में भी बच गया ईरान का परमाणु कार्यक्रम, इस्राइली अधिकारी का चौंकाने वाला दावा

 दुनिया भर में पड़ेगा असर
दुनिया भर में लगभग 15 करोड़ परिवार दूध उत्पादन से अपनी जीविका चलाते हैं। लेकिन सबसे अधिक निर्भरता भारत और दक्षिण एशिया में है। यदि यहां दूध उत्पादन में गिरावट आती है तो इसका प्रभाव वैश्विक दूध आपूर्ति, खाद्य मूल्य और आयात-निर्यात संतुलन पर भी पड़ेगा। इसलिए बढ़ते तापमान के कारण गिरते दूध उत्पादन का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

नीतिगत सुधार और व्यवहारिक बदलाव की जरूरत
शोधकर्ताओं ने नीति-निर्माताओं को सुझाव दिया है कि तकनीकी उपायों के साथ-साथ पशु कल्याण आधारित व्यवहारिक सुधार भी जरूरी हैं। जैसे गायों को अधिक खुला वातावरण देना, बछड़ों से अनावश्यक अलगाव से बचना और जल स्रोतों की सहज उपलब्धता देना ये उपाय गायों के तनाव को कम कर सकते हैं और उन्हें गर्मी के प्रति अधिक सहनशील बना सकते हैं। जल स्रोतों की सहज उपलब्धता देने से तात्पर्य यह है कि पशुओं को उनके आसपास ही पर्याप्त, साफ और ठंडा पानी बिना किसी रुकावट और कठिनाई के नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए। डेयरी फार्म या गोशालाओं में पानी तक पहुंचने के लिए गायों को अधिक दूरी न तय करनी पड़े।लगातार पानी पीने से गायों का शरीर गर्मी से लड़ने में सक्षम होता है और हीट स्ट्रेस कम होता है, जिससे उनका दूध उत्पादन बना रहता है।

दूध अब केवल पोषण नहीं जलवायु रणनीति की प्राथमिकता
शोध के निष्कर्ष में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन की मार अब रसोई तक पहुंच चुकी है। भारत जैसे देश जहां दूध केवल पोषण नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, वहां इस खतरे को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सरकारों को चाहिए कि वे दूध उत्पादन को जलवायु नीति का हिस्सा बनाएं और समय रहते ठोस रणनीति बनाएं नहीं तो आने वाले वर्षों में दूध की हर बूंद पर तपती गर्मी का बोझ होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed