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ड्रोन अटैक: ये पाकिस्तान की 'रेकी' और 'साजिश' है तो निंदा या बदले का मौका नहीं मिलेगा

Tue, 29 Jun 2021 04:50 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 29 Jun 2021 04:50 PM IST
सार

देश में 'ड्रोन अटैक' को लेकर हल्ला मचा है। शनिवार से लेकर सोमवार तक लगातार तीन दिन ड्रोन अटैक की साजिश रची गई। जम्मू में तो एयरबेस पर ड्रोन से दो ब्लास्ट भी किए गए। इसके बाद कालूचक मिलिट्री बेस पर ड्रोन दिखा। अगले दिन जम्मू में सुंजवान मिलिट्री स्टेशन के पास संदिग्ध ड्रोन नजर आया। कश्मीर में भी हलचल है। कुछ दूसरे इलाकों में भी ड्रोन दिखाई देने की खबरें आ रही हैं। 

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Drone Attack: there will be no scene for revenge or condemnation if it is done by Pakistan, detailed analysis
Representative Image - फोटो : iStock

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, ड्रोन अटैक को सरकार ने हल्के में लिया तो आगे शर्म, निंदा या बदले का मौका नहीं मिलेगा। वजह, सीज फायर के दौरान ड्रोन अटैक, पाकिस्तान की उस चाल की 'रेकी व साजिश' का हिस्सा हैं, जिसे अंजाम देने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। ऐसे में केंद्र सरकार को जितना जल्द हो सके, एंटी ड्रोन तकनीक हासिल करनी होगी।

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दुनिया की नजर में अब पाकिस्तान शांत है, मौन है, लेकिन ड्रोन अटैक के जरिए उसने बता दिया है कि जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना व दूसरे सुरक्षा बलों के मूवमेंट बड़े जोखिम में फंस सकते हैं। ड्रोन अटैक से पाकिस्तान के सुसाइड बॉम्बर 'फिदायीन दस्ता' और बॉर्डर से भारतीय सीमा में धकेले जाने वाले आतंकी भी बचे रहेंगे। डिफेंसिव पोजिशन, जहां आतंकी नहीं पहुंच पा रहे थे, ड्रोन वहां जा सकता है। 

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हथियारबंद ड्रोन पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा

जम्मू में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) स्टेशन पर हुए दो ड्रोन हमले के एक दिन बाद भारत ने यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीसी) में उठाया। भारत ने कहा, सामरिक और वाणिज्यिक संपत्तियों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए हथियारबंद ड्रोन के इस्तेमाल को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। भविष्य में ड्रोन अटैक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। हथियारों की तस्करी के लिए ड्रोन का उपयोग अब पुरानी बात हो गई है। अगर इस पर अब लगाम नहीं लगी तो भविष्य में ये अंतहीन मुश्किलें खड़ी कर सकता है। 

यूएन महासभा में सदस्य देशों के आतंकवाद-रोधी एजेंसियों के प्रमुखों के दूसरे उच्च स्तरीय सम्मेलन में गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) वीएसके कौमुदी ने कहा, आज आतंकवाद के प्रचार और कैडर की भर्ती के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया का दुरुपयोग हो रहा है। कम लागत वाला विकल्प होने के कारण आतंकी ड्रोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है। ड्रोन अटैक अब केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर खतरा और चुनौती बन चुका है। 

अफगानिस्तान और तालिबान को समझना जरूरी

रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) के अनुसार, पाकिस्तान की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए। बालाकोट में एक स्ट्राइक हुई, लेकिन उससे काम तो नहीं चलेगा। उससे ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ। बदमाश आपके घर में उस वक्त तक घुसने की कोशिश करता रहेगा, जब तक आप एक बड़ी मार नहीं कर देंगे। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाएं वापसी कर रही हैं। तालिबान हावी होगा, इसमें कोई शक नहीं है। तालिबान या दूसरे कैडर वाले आतंकी, पाकिस्तानी आईएसआई उन्हें कश्मीर में भेजेगी। असल खतरा भी तभी शुरु होगा। 

अभी पाकिस्तान विश्व को ये दिखा रहा है कि वह शांति चाहता है, आतंकवाद पर भी लगाम कस रहा है। इसके पीछे की कहानी समझें। बतौर अनिल गौर, सीजफायर की आड़ में पाक, कश्मीर में भारत के खिलाफ नई रणनीति पर काम कर रहा है। बंकर बना रहा है, आतंकियों को ड्रोन की ट्रेनिंग दिला रहा है, अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। ड्रोन अटैक उसी रणनीति का हिस्सा है। ये एक सोची समझी साजिश है। ध्यान रहे, बड़ा ड्रोन भारी नुकसान पहुंचा सकता है। अगर सिलसिलेवार तरीके से ड्रोन अटैक हुए तो शर्म, निंदा या बदले की कोई जगह नहीं बचेगी।

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पुलवामा हमले के बाद अब जोखिम में सैन्य मूवमेंट

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह और कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने ड्रोन अटैक को आतंकी हमला बताया है। इसके पीछे पाकिस्तान की आईएसआई का हाथ होने की बात कही गई है। इस बाबत अनिल गौर कहते हैं, पुलवामा में सीआरपीएफ की मूवमेंट पर सुसाइडल स्ट्राइक हुई थी, जिसमें चालीस जवान शहीद हो गए थे। उस वक्त आतंकियों ने गाड़ी का इस्तेमाल किया था। एक आतंकी मारा भी गया। सैन्य प्रतिष्ठानों पर ड्रोन अटैक एक ऐसी नई तकनीक है, जिसका मुकाबला करने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है। कश्मीर या देश के दूसरे हिस्सों में सुरक्षा बलों की बड़ी मूवमेंट रहती है। 

यहां एक साथ सैकड़ों वाहन, जिनमें हजारों सैनिक बैठे रहते हैं, सड़क से गुजरते हैं। ड्रोन अटैक, इनके लिए एक बड़े जोखिम का संकेत है। बीच राह में कहां से और कब, कोई अटैकिंग ड्रोन निकल आए, किसी को नहीं मालूम। इनकी मूवमेंट आबादी वाले इलाकों से भी होती है। हो सकता है 50 मीटर दूर से कोई ड्रोन आ जाए। चूंकि पाकिस्तानी आईएसआई ने बड़े पैमाने पर कश्मीर में अपने अंडर ग्राउंड वर्कर तैयार कर रखे हैं। वे ड्रोन से किसी भी वक्त हमले को अंजाम दे सकते हैं। इसके लिए खुफिया एजेंसी आईबी और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ), दोनों की रणनीतिक समीक्षा बहुत जरूरी है।

20 किलोमीटर अंदर तक तबाही मचा सकते हैं ड्रोन

आर्मेनिया-अजरबैजान की लड़ाई में ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है। अजरबैजान ने आर्मेनिया में बॉर्डर से 20 किलोमीटर अंदर तक ड्रोन घुसा दिए थे। पहले ड्रोन के जरिए यह पता लगाया कि डिफेंस पोजीशन कहां पर और कौन सी हैं। चूंकि उस वक्त आर्मेनिया के पास एंटी ड्रोन सिस्टम नहीं था, इसलिए उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। लद्दाख में चीन के बहुत सूक्ष्म ड्रोन देखे गए हैं। उन्हें रडार और इंसानी आंखों से नहीं देखा जा सकता। कोई भी देश अपने दुश्मन राष्ट्र की डिफेंसिव पोजीशन की जानकारी रखता है। इनमें हथियार, गोला बारूद, टैंक, एयर सिस्टम और जवानों की बैरक आदि की जानकारी शामिल रहती है। 

ड्रोन, इन सब पोजिशन तक पहुंच सकता है। ड्रोन, जीपीएस तकनीक से काम करते हैं। लोकेशन तय कर वहां बम या छोटी मिसाइल छोड़ी जा सकती है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन, भारतीय सेना के हाथों मारे जाने वाले अपने सदस्यों का दूसरे कार्यों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। बॉर्डर से 15-20 किमी दूर बैठा कोई व्यक्ति ड्रोन के जरिए सैन्य मूवमेंट को टारगेट कर सकता है। पहले कई आतंकी मिलकर हमले को अंजाम देते थे, अब अकेला ड्रोन वह काम कर सकता है। अगर कोई तकनीकी दिक्कत है तो दूसरे मुल्क में बैठे अंडर ग्राउंड वर्कर को ड्रोन की मदद से अपने नापाक इरादों को अंजाम देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। 

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