सरकार का बड़ा फैसला: सैन्य नर्सिंग सेवा के अधिकारियों को मिला पूर्व सैनिक का दर्जा, DoPT ने जारी की अधिसूचना
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने सैन्य नर्सिंग सेवा (एमएनएस) अधिकारियों को औपचारिक रूप से पूर्व सैनिक का दर्जा बहाल किया है, जिससे सशस्त्र बलों में उनके योगदान को मान्यता मिली है। इस संशोधन के बाद एमएनएस अधिकारियों को अन्य सैनिकों की तरह सभी लाभ मिलेंगे। पढ़िए रिपोर्ट-
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यह फैसला पूर्व सैनिक (केंद्रीय सिविल सेवाओं और पदों में पुनर्नियोजन) नियम, 1979 में संशोधन के जरिये लिया गया है। अब इन नियमों में एमएनएस अधिकारियों को स्पष्ट रूप से पूर्व सैनिक की परिभाषा में शामिल किया गया है।
डीओपीटी ने क्या कहा?
डीओपीटी ने इसकी जानकारी 'एक्स' पर एक पोस्ट में दी। पोस्ट में कहा गया कि भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त एमएनएस अधिकारी सशस्त्र बलों की चिकित्सा सेवाओं का एक अहम हिस्सा हैं। वे सेना, नौसेना और वायुसेना के चिकित्सा प्रतिष्ठानों में सेवाएं देते हैं। वे सैन्य अस्पतालों में अहम नर्सिंग देखभाल प्रदान करते हैं, आपात स्थितियों के दौरान अभियानों में सहयोग करते हैं और कठिन तथा शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों में घायल सैनिकों की देखभाल करते हैं।
उनकी भूमिका को लंबे समय से बेहद जरूरी माना जाता रहा है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों में अन्य सैन्य कर्मियों के बराबरी का दर्जा न होने के कारण यह मुद्दा विवाद का विषय बना हुआ था। अब इस संशोधन के बाद एमएनएस अधिकारियों को पूर्व सैनिकों को मिलने वाले सभी लाभ मिलेंगे। इन लाभों में केंद्र सरकार की नौकरियों में आयु में छूट और आरक्षण, उनके बच्चों के लिए शिक्षा में आरक्षण और सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर करियर सुरक्षा शामिल है।
Military Nursing Service – A Pillar of Armed Forces Medical Services
— DoPT (@DoPTGoI) March 14, 2026
Military Nursing Service (MNS) forms a vital component of the Armed Forces Medical Services, working in close coordination with the Army Medical Corps (AMC) and Army Dental Corps (ADC) to deliver comprehensive… pic.twitter.com/v2E0vcfsWQ
डीओपीटी ने कहा, यह बदलाव सुनिश्चित करता है कि एमएनएस अधिकारियों को भी सशस्त्र बलों की अन्य शाखाओं के अधिकारियों की तरह समान दर्जा और सुविधाएं मिलें, जिससे उनकी सम्मान और भलाई दोनों मजबूत होंगी। सरकार ने कहा कि यह सुधार तुरंत प्रभाव से लागू होगा और यह पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और एमएनएस अधिकारियों की अहम सेवा की मान्यता को दर्शाता है। इस दर्जे की बहाली से न केवल लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है, बल्कि इससे सेवा में मौजूद कर्मियों का मनोबल भी बढ़ेगा और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद समान व्यवहार का भरोसा मिलेगा।
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सरकार ने कहा, यह केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि उन लोगों के प्रति देश की कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने वर्दी में रहकर कठिन परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने का काम किया है। एमएनएस अधिकारी युद्ध और शांति दोनों स्थितियों में चिकित्सा सेवा की अग्रिम पंक्ति में खड़े रहते हैं। अब इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि उनके त्याग और सेवा को नागरिक जीवन में भी ठोस समर्थन के साथ सम्मान दिया जाए।
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