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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की पहल, कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में ली जाएगी योग और ध्यान की मदद
Sun, 12 Apr 2020 06:34 PM IST
श्रीधर मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Sun, 12 Apr 2020 06:34 PM IST
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सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
कोविड-19 और ऐसे ही दूसरे वायरस के खिलाफ मुकाबला करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने एक नई पहल की है। इन बीमारियों के खिलाफ योग और ध्यान का सही इस्तेमाल के लिए विभाग ने अध्ययन करने के लिए प्रस्ताव भेजा है।
योग और ध्यान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों और अनुभवी चिकित्सकों के दल को इस प्रस्ताव पर अपना सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इस प्रस्ताव में उन्हीं लोगों का सुझाव या सहायता मांगी गई है, जिनका योग और ध्यान के क्षेत्र में सालों पुराना अनुभव है।
यह प्रस्ताव DST के साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ योगा एंड मेडिटेशन (SATYAM) प्रोग्राम के तहत आता है। बता दें कि यह विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन आता है।
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन विभाग, DST के विज्ञान और प्रौद्योगिकी और योग और ध्यान (SATYAM) कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए कॉल फॉर प्रपोजल्स के मुताबिक, कॉन्सेप्ट नोट में लक्ष्य, प्रस्तावित काम का उद्देश्य, मौजूदा साहित्य, कार्यप्रणाली, अपेक्षित परिणाम, बजट की आवश्यकता और प्रमुख संस्थानों के विस्तृत बायोडाटा के विवरण जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
इस प्रस्ताव में कहा गया है कि परियोजना में इम्यूनिटी, श्वसन प्रणाली में सुधार और श्वसन विकारों को दूर करने और अन्य आयामों को दूर करने जैसे तनाव, चिंता और अनिश्चितता संबंधित मुद्दों को दूर करने के लिए संबोधित पहलुओं को कवर किया जाएगा।
इस विशेष कॉल का मकसद कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति में समाज की सहायता करना है। अब जब यह एक आवश्यकता आधारित कॉल है, इसलिए, प्रस्तावित काम को 6-12 महीनों के भीतर पूरा किया जाएगा।
अवधारणा पर चर्चा करते हुए, DST सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि SATYAM एक संज्ञानात्मक विज्ञान कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि COVID-19 में आमतौर पर तीन आयाम होते हैं, जो तनाव (चिंता, घर बैठे), श्वसन और इम्यूनिटी से संबंधित होते हैं।
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योग और ध्यान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों और अनुभवी चिकित्सकों के दल को इस प्रस्ताव पर अपना सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इस प्रस्ताव में उन्हीं लोगों का सुझाव या सहायता मांगी गई है, जिनका योग और ध्यान के क्षेत्र में सालों पुराना अनुभव है।
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यह प्रस्ताव DST के साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ योगा एंड मेडिटेशन (SATYAM) प्रोग्राम के तहत आता है। बता दें कि यह विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन आता है।
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन विभाग, DST के विज्ञान और प्रौद्योगिकी और योग और ध्यान (SATYAM) कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए कॉल फॉर प्रपोजल्स के मुताबिक, कॉन्सेप्ट नोट में लक्ष्य, प्रस्तावित काम का उद्देश्य, मौजूदा साहित्य, कार्यप्रणाली, अपेक्षित परिणाम, बजट की आवश्यकता और प्रमुख संस्थानों के विस्तृत बायोडाटा के विवरण जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
इस प्रस्ताव में कहा गया है कि परियोजना में इम्यूनिटी, श्वसन प्रणाली में सुधार और श्वसन विकारों को दूर करने और अन्य आयामों को दूर करने जैसे तनाव, चिंता और अनिश्चितता संबंधित मुद्दों को दूर करने के लिए संबोधित पहलुओं को कवर किया जाएगा।
इस विशेष कॉल का मकसद कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति में समाज की सहायता करना है। अब जब यह एक आवश्यकता आधारित कॉल है, इसलिए, प्रस्तावित काम को 6-12 महीनों के भीतर पूरा किया जाएगा।
अवधारणा पर चर्चा करते हुए, DST सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि SATYAM एक संज्ञानात्मक विज्ञान कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि COVID-19 में आमतौर पर तीन आयाम होते हैं, जो तनाव (चिंता, घर बैठे), श्वसन और इम्यूनिटी से संबंधित होते हैं।