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Supreme Court: दशकों तक काम, फिर भी पक्की नौकरी नहीं! सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नियमितीकरण पर करें विचार

Sat, 23 May 2026 04:47 AM IST
Pavan अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Sat, 23 May 2026 04:47 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ शुरुआती नियुक्ति अस्थायी या स्वीकृत पद पर न होने के आधार पर कर्मचारियों को नियमित नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने असम सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वर्षों तक नियमित काम लेने के बाद कर्मचारियों के साथ भेदभाव करना संविधान की समानता की भावना के खिलाफ है।

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Decades of work, yet no permanent job! The Supreme Court said, 'Consider regularization.'
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस कारण से किसी कर्मचारी को नियमित नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसकी नियुक्ति शुरुआत में अस्थायी रूप से या स्वीकृत पद पर नहीं हुई थी। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अगर कर्मचारी कई वर्षों तक लगातार सरकारी विभागों में नियमित काम करते रहे हैं तो उन्हें नियमित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
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गौहाटी हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को किया रद्द
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने गौहाटी हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को रद्द करते हुए असम सरकार के कई विभागों में मस्टर रोल पर काम कर रहे कर्मचारियों को राहत दी। ये कर्मचारी कई वर्षों से सरकारी विभागों में काम कर रहे थे पर उन्हें नियमित नहीं किया गया था। राज्य सरकार का कहना था कि उनकी शुरुआती नियुक्ति स्वीकृत पदों पर नहीं हुई थी इसलिए उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता।
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एक जैसी स्थिति वाले कर्मचारियों से अलग-अलग व्यवहार नहीं हो सकता
पीठ ने कहा, असम सरकार ने बाद में एक कैबिनेट नीति बनाकर लगभग 30 हजार समान स्थिति वाले कर्मचारियों को नियमित भी कर दिया। ऐसे में बाकी कर्मचारियों को इससे बाहर रखना गलत और भेदभावपूर्ण है। सरकार एक जैसी स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं कर सकती। अदालत ने साफ कहा कि समान काम करने वाले कर्मचारियों को समान अधिकार मिलने चाहिए।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार लंबे समय तक कर्मचारियों से नियमित काम लेकर उन्हें अस्थायी दर्जा देकर नहीं रख सकती। निष्पक्षता और समानता संविधान की मूल भावना है और सरकार को उसी के अनुसार काम करना चाहिए।
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