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CRPF: करप्शन पर एक्शन मोड में आए DG, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति से नपे सीआरपीएफ के दो रसूखदार कमांडेंट

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 19 May 2023 03:35 PM IST
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सार
CRPF: सीआरपीएफ में इस तरह के मामलों को लेकर पहले भी शिकायतें मिलती रही हैं। ये अलग बात रही कि अधिकांश मामले, बिना किसी कार्रवाई के रफा दफा हो जाते थे। एसएल थाउसेन ने सीआरपीएफ डीजी का पदभार संभालने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती बरतनी शुरू कर दी...
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CRPF DG came in action mode on corruption, two influential commandants of CRPF transferred in remote area
CRPF DG IPS Sujoy Thaosen - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति का असर देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में दिखने लगा है। भ्रष्टाचार के मामलों में बल के डीजी एसएल थाउसेन एक्शन मोड में आ गए हैं। बल के दो कमांडेंट, जिन पर भ्रष्टाचार सहित कई दूसरे आरोप लगे थे, वे नप गए हैं। पुख्ता जांच और पर्याप्त सबूतों के आधार पर दोनों कमांडेंट का तबादला कहीं दूर किया गया है। इसके बावजूद दोनों कमांडेंट ने उनके मामले में दोबारा से विचार करने के लिए डीजी सीआरपीएफ को प्रतिवेदन दिया। निजी तौर पर बल प्रमुख के समक्ष पेश हुए। यहां तक कि एक कमांडेंट तो हाई कोर्ट में भी चले गए, लेकिन डीजी ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए दोनों कमांडेंट को राहत प्रदान नहीं की।

दोनों रसूखदार कमांडेंट पर लगे हैं आरोप

सीआरपीएफ में इस तरह के मामलों को लेकर पहले भी शिकायतें मिलती रही हैं। ये अलग बात रही कि अधिकांश मामले, बिना किसी कार्रवाई के रफा दफा हो जाते थे। एसएल थाउसेन ने सीआरपीएफ डीजी का पदभार संभालने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती बरतनी शुरू कर दी। दो माह पहले लखनऊ स्थित सीआरपीएफ की 93वीं बटालियन के कमांडेंट नीरज दत्त पांडे के आवास/निवास पर सीबीआई रेड हुई थी। पांडे पर सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में केस दर्ज किया था। उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कई जगह चलअचल संपत्तियां मिली थीं। तत्कालीन आईजी 'पर्स' एवं विजिलेंस वितुल कुमार की ओर से सीबीआई को शिकायत दी गई।

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पांडे पर कई दूसरे आरोप भी लगे थे। उन्होंने 2021-2022 के दौरान एक डिप्टी कमांडेंट और तीन सहायक कमांडेंट की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) पर प्रतिकूल टिप्पणियां कर दी थी। उनका करियर खराब करने का प्रयास हुआ। दूसरा केस 230वीं बटालियन, जो छत्तीसगढ़ में तैनात है, वहां का एक ड्राइवर 'हवलदार' मो. तारिक, कई महीनों से यूपी के इलाहाबाद में था। इस मामले में कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल पर कार्रवाई की तलवार लटक गई। बल के सूत्रों का कहना है कि दोनों ही कमांडेंट रसूखदार बताए जाते हैं।

तबादला आदेश रद्द कराने की हर संभव कोशिश

दोनों ही कमांडेंट काफी रसूखदार बताए जाते हैं। कोई धन बल से तो कोई राजनीतिक सिफारिश पर, खुद को बचाता रहा। ऐसा नहीं है कि इससे पहले इनके खिलाफ कोई मामला सामने न आया हो। कई मामले आए, मगर रफा दफा हो गए। सीबीआई रेड के बाद नीरज दत्त पांडेय का तबादला 93वीं बटालियन से सीआरपीएफ के प्रतिविद्रोहिता एवं आतंकवाद विरोधी स्कूल, कालीकिरी 'आंध्रप्रदेश' में कर दिया गया। उन्होंने अपना तबादला रद्द कराने के लिए डीजी को प्रतिवेदन दिया। डीजी के सामने पेश हुए, मगर तबादला रद्द नहीं हो सका।

सीआरपीएफ मुख्यालय की ओर से उन्हें कोई राहत नहीं दी गई। दूसरा मामला कथित फर्जी अटैचमेंट का था। इसमें सीआरपीएफ की 230वीं बटालियन, जो छत्तीसगढ़ में तैनात है, वहां के कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल पर मैनपावर का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। उनका तीन वर्ष का तय कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था। गत वर्ष जब यह मामला सामने आया तो अब समर चेन ट्रांसफर लिस्ट में उनका नाम भी आ गया। उन्हें 230वीं बटालियन से नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर हेडक्वार्टर शिलांग 'मेघालय' भेजा गया है। चंदेल ने तो अपना तबादला रद्द कराने के लिए बाकायदा हाईकोर्ट की शरण ली, मगर उन्हें राहत नहीं मिल सकी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीआरपीएफ मुख्यालय ने एक सप्ताह में उनके ट्रांसफर पर निर्णय दे दिया। कमांडेंट को नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर हेडक्वार्टर शिलांग में ज्वाइन करना होगा।

कमांडेंट चंदेल पर लगे थे ये आरोप

सीआरपीएफ में पहले भी फर्जी अटैचमेंट के मामले सामने आते रहे हैं। दर्जनों जवानों को महज एक मौखिक आदेश पर लंबे समय के लिए रसूखदार अफसरों या दूसरे वीवीआईपी के यहां भेज दिया जाता है। कई मामलों में तो यह तैनाती कई वर्षों तक चलती रहती है, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती कि उस पर कोई कदम उठा सके। 230वीं बटालियन के ड्राइवर 'हवलदार' मो. तारिक भी लंबे समय से इलाहाबाद में तैनात है। कायदे से उन्हें अपनी बटालियन, जो छत्तीसगढ़ में तैनात हैं, वहां होना चाहिए। अटैचमेंट के जरिए किसी भी जवान को दूसरी जगह पर तैनात किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। 230वीं बटालियन के कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल थे। वे कई साल तक यूपी में तैनात रहे हैं। उन पर अपने निजी कार्यों के लिए फर्जी अटैचमेंट करने का आरोप था। यह मामला तब खुला, जब मो. तारिक ने निजी झगड़े में अपने पड़ोसी पर गोली चला दी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। जांच शुरू हुई तो मामले का खुलासा हुआ।

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कई शहरों में मिली थी कमांडेंट की संपत्तियां

सीबीआई ने कमांडेंट नीरज पांडे के खिलाफ 16 मार्च को आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। एफआईआर में कमांडेंट की जो संपत्ति दिखाई गई है, वह उनके लीगल संसाधनों से होने वाली आय के मुकाबले लगभग सौ फीसदी ज्यादा है। लखनऊ, नोएडा और वाराणसी के अलावा कई दूसरे शहरों में भी संपत्तियां होने की बात कही गई है। यह मामला 2014 से 2022 के बीच अर्जित संपत्तियों को लेकर है। उनके परिवार के अलग-अलग बैंक खातों में भी बड़ी रकम जमा है। आरोपी अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा नियंत्रित कंपनियों के खातों में भी लेन-देन का पता चला है। शक्ति खंड एवं ज्ञान खंड, इंदिरापुरम गाजियाबाद, वाराणसी, मीरापुर और नोएडा में चल अचल संपत्तियां बताई गई हैं। नोएडा की जो संपत्ति है, वह चार मंजिला एक व्यावसायिक प्रॉपर्टी है। हालांकि सीधे तौर पर किसी दस्तावेज में इसका जिक्र नहीं है। इसकी कीमत करोड़ों रुपये बताई गई है। आरोप है कि कमांडेंट ने बल के तीन जवानों को बहुमंजिला इमारतों के निर्माण कार्य पर तैनात कर रखा था। इस कथित तैनाती पर विजय दहिया, प्रेम चंद्र गौतम और प्रदीप कुमार भट्ट का नाम सामने आया। फाइलों में भले ही इन जवानों की तैनाती लखनऊ मुख्यालय पर थी, लेकिन हकीकत में ये जवान अधिकांश समय नोएडा में ही रहते थे।

 

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