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CAPF: केंद्रीय सुरक्षा बलों के इन छह कोर्स पर नजर रखेगा पीएमओ, ऐसे रुकेगा महिला जवानों का यौन उत्पीड़न

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 15 May 2023 06:38 PM IST
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सार
केंद्र सरकार में 'कर्मयोगी प्लेटफार्म' के तहत, ये कोर्स सभी कर्मियों के लिए अनिवार्य हैं। सीआरपीएफ ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं। अन्य बलों में भी यह प्रक्रिया जारी है। सुरक्षा बलों के जितने भी ऐसे सदस्य हैं, जिनके पास सरकारी ईमेल आईडी है, उन्हें छह तरह के कोर्स करने होंगे...
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CAPF: PMO will keep an eye on these six courses of Central Security Forces
CAPF - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए छह कोर्स अनिवार्य कर दिए गए हैं। खास बात है कि इन कोर्सों पर प्रधानमंत्री कार्यालय नजर रखेगा। साथ ही डीओपीटी और क्षमता निर्माण आयोग 'सीबीसी' के द्वारा भी उक्त कोर्स की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इन कोर्सों के जरिए कार्य स्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने में मदद मिलेगी। कर्मचारी को सेवा के दौरान कैसा व्यवहार रखना चाहिए, उन्हें इस बाबत भी ट्रेनिंग दी जाएगी। सुरक्षा बलों में सब-इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर और इसके ऊपर के सभी रैंकों के ऐसे कार्मिक, जिनकी सरकारी ईमेल आईडी बन चुकी है, उन्हें ये कोर्स करने होंगे हैं। समय-समय पर कोर्स की प्रगति रिपोर्ट जांची जाएगी।

सभी कर्मियों के लिए अनिवार्य हैं ये कोर्स

बता दें कि केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के अलावा अब सुरक्षा बलों को भी ये कोर्स करना है। केंद्र सरकार में 'कर्मयोगी प्लेटफार्म' के तहत, ये कोर्स सभी कर्मियों के लिए अनिवार्य हैं। सीआरपीएफ ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं। अन्य बलों में भी यह प्रक्रिया जारी है। सुरक्षा बलों के जितने भी ऐसे सदस्य हैं, जिनके पास सरकारी ईमेल आईडी है, उन्हें छह तरह के कोर्स करने होंगे।

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सामाजिक कानून और प्रधानमंत्री गतिशक्ति भी

इनमें सरकारी कर्मियों के लिए 'कोड ऑफ कंडक्ट', कार्य स्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकना, इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज लेवल-1, सामाजिक कानून, प्रधानमंत्री गतिशक्ति और प्रारंभ मॉड्यूल (केवल उनके लिए, जो सेवा में नए आए हैं) शामिल हैं। सरकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों में एसआई और उसके ऊपर के सभी रैंकों के कार्मिकों की सरकारी ईमेल आईडी बन चुकी हैं। ऐसे में इन सभी जवानों और अधिकारियों को उक्त कोर्स को लेकर सीधे पत्राचार किया जाए। ये कोर्स कहां-कहां पर शुरू हुआ है, उसकी जानकारी 15 दिन के भीतर देनी होगी। जो भी कर्मी, 'प्रारंभ मॉड्यूल' के दायरे में आते हैं, उनकी रिपोर्ट महीने में एक बार देनी है। भारत सरकार द्वारा 01 अप्रैल 2021 को गठित, क्षमता निर्माण आयोग 'सीबीसी' की भारतीय सिविल सेवा परिदृश्य में मानकीकरण और सामंजस्य स्थापित करने में अहम भूमिका है।

सिविल सेवकों में विश्वसनीयता पैदा करना

सिविल सेवा क्षमता निर्माण सुधारों के संरक्षक के रूप में, आयोग की भूमिका मिशन कर्मयोगी के समग्र संस्थागत ढांचे के केंद्र में है। इस आयोग में तीन सदस्य शामिल हैं। आयोग का मुख्य उद्देश्य, सिविल सेवा के अधिकारियों में सहयोगी और सह-साझाकरण के आधार पर क्षमता निर्माण करना है। सिविल सेवकों में विश्वसनीयता के साथ समान दृष्टिकोण तैयार करने की जिम्मेदारी भी सीबीसी की है।

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डीओपीटी के नीतिगत हस्तक्षेप की जिम्मेदारी

सीबीसी के कार्यों में सिविल सेवा रिपोर्ट की वार्षिक स्थिति तैयार करना, प्रशिक्षण संस्थानों को लेकर कार्यात्मक पर्यवेक्षण करना, साझा शिक्षण संसाधन बनाना, मंत्रालयों और विभागों के लिए वार्षिक क्षमता निर्माण योजनाओं की प्रक्रिया को सुगम बनाना और ग्लोबल एचआर समिट का आयोजन करना है। क्षमता निर्माण पहल के लिए एक सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण विकसित करना और सरकार में उपलब्ध मानव संसाधन की लेखापरीक्षा, यह कार्य भी सीबीसी का है। मानव संसाधन के क्षेत्रों में डीओपीटी के नीतिगत हस्तक्षेप की सिफारिश भी आयोग द्वारा की जाती है।

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