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CRPF: तबादला आदेश की ना-फरमानी करना सीआरपीएफ कमांडेंट को पड़ा भारी, दी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 22 May 2023 05:44 PM IST
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सार
CRPF: सीआरपीएफ की 230वीं बटालियन, जो छत्तीसगढ़ में तैनात है, वहां के कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल पर गत वर्ष मैनपावर का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। मामले की जांच पड़ताल हुई। उसमें कई सारे आरोप सही साबित हुए। उनका तीन वर्ष का तय कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था...
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CRPF: CRPF commandant Disobeyed the transfer order, warned for disciplinary action
CRPF - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में तबादला आदेश की ना-फरमानी करना, एक कमांडेंट को भारी पड़ गया है। बल मुख्यालय के निर्देश पर 230वीं बटालियन के कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल को तत्काल प्रभाव से रिलीव करने के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही उक्त अधिकारी को यह चेतावनी भी दे दी गई है कि समर चेन ट्रांसफर में उसे जो स्टेशन मिला है, वहां पर ज्वाइन करना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें: CRPF: करप्शन पर एक्शन मोड में आए DG, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति से नपे सीआरपीएफ के दो रसूखदार कमांडेंट

कमांडेंट ने नए स्टेशन पर ज्वाइन नहीं किया

आईजी छत्तीसगढ़ सेक्टर ने डीआईजी 'ऑप्स' को इस बाबत लिखे पत्र में कहा है कि कमांडेंट दिनेश सिंह को 20 मई की दोपहर से रिलीव होना चाहिए। उन्हें पहले भी कहा गया था कि वे समर चैन तबादला सूची के मुताबिक, अपने नए स्टेशन पर ज्वाइन करें। आईजी ने उक्त सूचना सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी रायपुर और डीआईजी 'पर्स' हेडक्वार्टर को भी दी है। साथ ही 230वीं बटालियन में यह सूचना दी गई है। पत्र में कहा गया है कि कमांडेंट दिनेश को पहले भी नए स्टेशन पर ज्वाइनिंग करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने आदेशों का पालन नहीं किया। इस संबंध में डीआईजी 'पर्स' ने भी एक आदेश निकाला था। जब उसके बाद भी ज्वाइनिंग नहीं हुई तो यह माना गया कि उक्त कमांडेंट, अपने मुख्यालय के आदेशों को नहीं मानता। सीआरपीएफ में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है कि कोई अधिकारी अपनी तय जगह पर ज्वाइनिंग नहीं कर रहा। यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि आखिर वे ज्वाइन करने में देरी क्यों कर रहे हैं। आदेशों में कहा गया है कि 230वीं बटालियन में जो भी अफसर सबसे अधिक वरिष्ठ है, उसे चार्ज देकर तुरंत रिलीव हो जाएं। ज्वाइनिंग न करने के लिए क्या कोई बहाना तलाशा जा रहा है। अगर वह अधिकारी सेकंड इन कमांड को चार्ज नहीं देता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

मामले की जांच में आरोप सही पाए गए

सीआरपीएफ की 230वीं बटालियन, जो छत्तीसगढ़ में तैनात है, वहां के कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल पर गत वर्ष मैनपावर का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। मामले की जांच पड़ताल हुई। उसमें कई सारे आरोप सही साबित हुए। उनका तीन वर्ष का तय कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था। सीआरपीएफ मुख्यालय द्वारा समर चेन ट्रांसफर लिस्ट में उनका नाम शामिल कर दिया गया। उन्हें 230वीं बटालियन से नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर हेडक्वार्टर शिलांग 'मेघालय' भेजा गया है। चंदेल ने तो अपना तबादला रद्द कराने के लिए बाकायदा हाई कोर्ट की शरण ली, मगर उन्हें राहत नहीं मिल सकी। हाई कोर्ट के निर्देश पर सीआरपीएफ मुख्यालय ने एक सप्ताह में उनके ट्रांसफर पर निर्णय दे दिया। कमांडेंट को नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर हेडक्वार्टर शिलांग में ज्वाइन करना होगा।

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कमांडेंट चंदेल पर लगे थे ये आरोप

सीआरपीएफ में पहले भी फर्जी अटैचमेंट के मामले सामने आते रहे हैं। दर्जनों जवानों को महज एक मौखिक आदेश पर लंबे समय के लिए रसूखदार अफसरों या दूसरे वीवीआईपी के यहां भेज दिया जाता है। कई मामलों में तो यह तैनाती कई वर्षों तक चलती रहती है, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती कि उस पर कोई कदम उठा सके। 230वीं बटालियन के ड्राइवर 'हवलदार' मो. तारिक भी लंबे समय से इलाहाबाद में तैनात हैं। कायदे से उन्हें अपनी बटालियन, जो छत्तीसगढ़ में तैनात हैं, वहां होना चाहिए। अटैचमेंट के जरिए किसी भी जवान को दूसरी जगह पर तैनात किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। 230वीं बटालियन के कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल थे। वे कई साल तक यूपी में तैनात रहे हैं। उन पर अपने निजी कार्यों के लिए फर्जी अटैचमेंट करने का आरोप था। यह मामला तब खुला, जब मो. तारिक ने निजी झगड़े में अपने पड़ोसी पर गोली चला दी। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। जांच शुरू हुई तो मामले का खुलासा हुआ।

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