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कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए लोगों में कोविशील्ड वैक्सीन का हो रहा तेजी से असर : स्टडी

Thu, 04 Mar 2021 03:14 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 04 Mar 2021 03:14 AM IST
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covishield vaccine is very effective in people recovering from corona infection
कोविशील्ड - फोटो : twitter@serum institute

कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए लोगों में कोविशील्ड वैक्सीन का तेजी से असर होता है और उनमें एंटीबॉडी का उच्च स्तर पाया जा रहा है। इसका पता एक स्टडी से लगा है। इससे उम्मीद जगी है कि ऐसे लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज देने की आवश्यकता नहीं पड़े और इस तरह से देश में कोरोना वायरस टीकाकरण का विस्तार करने में सहायता मिलेगी।

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कोविशील्ड की प्रतिरक्षा रिस्पांस पर स्टडी नई दिल्ली के सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी), मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी, डायबिटीज एंड मेटाबॉलिज्म के साथ ही एकेडमी आफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआईआर) गाजियाबाद द्वारा की गई है।
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स्टडी में शामिल शोधकर्ता व सीएसआईआर-आईजीआईबी के निदेशक अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कोविशील्ड से एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न हो रही है। जो आधारभूत तौर पर सीरोपॉजिटिव होते हैं उनमें प्रतिक्रिया तेजी से होती है और उनमें एंटीबॉडी उच्च स्तर तक पहुंचते हैं।
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सीरोपॉजिटिविटी सीरम में वायरस की मौजूदगी का संकेत होता है या इसका साक्ष्य होता है कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में वायरस की चपेट में आया है। कोविशील्ड वैक्सीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका का उत्पाद है और इसका निर्माण पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किया जा रहा है।

कोविशील्ड बनाम कोवाक्सिन

कोविशील्ड कोवाक्सिन
एस्ट्राजेनेका कंपनी और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से तैयार यह वैक्सीन एडिनोवायरस पर बनाया है। इसे पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से उत्पादन किया जा रहा है। यह वैक्सीन 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जा सकता है। एक वॉयल में 10 लोगों को डोज दिए जाने की वैक्सीन है। इस वैक्सीन की दो डोज लेना जरूरी है। यह वैक्सीन 70 फीसदी असरदार बताया गया है। भारत में इस वैक्सीन के लिए तीसरे चरण के परीक्षण के दौरान 1600 लोगों को वैक्सीन दिया गया था।
वुहान से संक्रमित होने के बाद भारत लौटी केरल की छात्रा के सैंपल से पुणे स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस को आइसोलेट कर भारत बायोटेक कंपनी को सौंप दिया। इसके बाद यह वैक्सीन तैयार हुआ। यह वैक्सीन 81 फीसदी तक असरदार है। 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तक इसे तापमान पर रखा जा सकता है और इसकी दो डोज लेना जरूरी है। यह देश का पहला स्वदेशी वैक्सीन है। जबकि कोविशील्ड स्वदेशी न होकर देश में उत्पादित होने वाला वैक्सीन है। इसके सभी परीक्षण भारत में 27 हजार लोगों पर हुए हैं।

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